क्या है वो आर्टिकल 371, जिससे कोई छेड़छाड़ नहीं करेगा केंद्र

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Updated: September 8, 2019, 7:00 PM IST
क्या है वो आर्टिकल 371, जिससे कोई छेड़छाड़ नहीं करेगा केंद्र
प्रतीकात्मक तस्वीर

नगा जनजाति के लिए 1963 में बना प्रदेश नागालैंड (Naga Land) शुरू से ही हलचलें महसूस करता रहा है. स्थापना के साथ ही राज्य (North Eastern State) को संविधान की ओर से विशेष अधिकार के रूप में आर्टिकल 371 (A) का प्रावधान मिला था.

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भारत का उत्तर-पूर्व (North East India) फिर सुर्खियों में आ गया है क्योंकि देश के गृह मंत्री (Home Minister) अमित शाह (Amit Shah) ने स्पष्ट किया है कि धारा 371 (Article 371) के साथ कोई छेड़छाड़ नहीं की जाएगी. अस्ल में, जम्मू कश्मीर (Jammu & Kashmir) के विशेष राज्य के दर्जे यानी आर्टिकल 370 (Article 370) के प्रावधान खत्म किए जाने के बाद इस तरह की चर्चाएं थीं कि उत्तर पूर्व में आर्टिकल 371 को लेकर भी सरकार विचार कर रही है लेकिन इन चर्चाओं को शाह ने अफवाह बताकर विराम लगाने की कोशिश की है. इस बीच, आर्टिकल 371 को लेकर एक बार फिर दिलचस्पी पैदा हो गई है.

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नगा जनजाति (Naga Tribes) के लोगों के लिए 1963 में बना एक नया प्रदेश नागालैंड (Nagaland) शुरू से ही हलचल के बीच रहा है. इसके बनने के साथ ही इसे संविधान (Constitution of India) की ओर से विशेष अधिकार (Special Status) के रूप में आर्टिकल 371 (A) का प्रावधान मिला था. यह आर्टिकल नगा जनजाति के लोगों को सुरक्षित और उनके हितों को बचाए रखने के लिए लगाई गई थी.

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1. क्यों होता रहा नगालैंड में विरोध
हाल ही में सरकार द्वारा यह प्रस्तावित किया गया था कि नागरिकता (संशोधन) विधेयक 1955 के तहत इस आर्टिकल में कुछ बदलाव किए जाएंगे, जिससे किसी भी व्यक्ति की भारतीय नागरिकता तय होती है. 2011 में हुई जनगणना के आधार पर नगालैंड की जनसंख्या 20 लाख है. इनमें से 88% जनता ईसाई है, 8.74% जनता हिंदू, 2.44% जनता मुसलमान है और 0.14% नगा के स्थानीय धर्म को मानने वाले हैं.

पिछले साल नगालैंड के मुख्यमंत्री नेफियू रियो ने केंद्र सरकार के प्रस्तावित नागरिकता (संशोधन) विधेयक का विरोध किया था क्योंकि उन्हें अंदेशा था कि इस नए विधेयक की वजह के चलते उन गैर-मुस्लिमों यानी हिंदू, सिख, बौध, जैन, पारसी और ईसाई लोगों को नागरिकता प्रदान करने का प्रावधान है, जो अत्याचार के कारण अफगानिस्तान, बांग्लादेश और पाकिस्तान से भागकर भारत आए हैं. नागरिकों की बढ़ी संख्या से संसाधनों का बंटवारा हो जाएगा जो नगा जनजाति के अनुसार उनके हित में नहीं होगा.
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2. क्या है आर्टिकल 371 (A)
भारतीय संविधान के अनुसार देश के कुछ राज्यों को सीमित स्वायत्तता दी गई है. नगालैंड उनमें से एक है. इस राज्य की मूल नगा जनजाति के अधिकारों और हितों को सुरक्षित करने के लिए इन्हें आर्टिकल 371(A) के रूप में स्वायत्तता दी गई है. इसके कुछ मुख्य बिंदु ये हैं:

इसके अंतर्गत उन मामलों में नगालैंड में संसद और सरकार का कोई हस्तक्षेप नहीं होगा:

अ) धार्मिक और सामाजिक गतिविधियां
ब) नगा संप्रदाय के कानून
स) नगा कानूनों के आधार पर नागरिक और आपराधिक मामलों में न्याय
द) जमीन का स्वामित्व और खरीद-फरोख्त

राज्य की कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए राज्यपाल को विशिष्ट अधिकार. इसमें उसके पास नगा पहाड़ियों और त्यूसांग क्षेत्र की जिम्मेदारी है. (यह अधिकार राष्ट्रपति के आदेश से छीने जा सकते हैं.)

राज्यपाल की यह जिम्मेदारी है कि भारत सरकार की तरह से किसी खास काम के लिए दी गई धनराशि उसी काम के लिए प्रयोग की जाए, ना कि किसी और काम के लिए.

त्यूसांग जिले के लिए 35 सदस्यों की एक क्षेत्रीय काउंसिल बनाई जाए और इस काउंसिल से जुड़े सभी फैसले और कानून बनाने की जिम्मेदारी राज्यपाल की होगी.

कुल मिलाकर इस आर्टिकल के चलते भारत का हिस्सा होते हुए भी नगालैंड में सामाजिक और कानून व्यवस्था स्वयं की ही है.

प्रतीकात्मक


साल 1963 में जब नगालैंड राज्य बना था, इसे विशिष्ट और सुरक्षित राज्य का दर्जा दिया गया था. यह दर्जा आर्टिकल 371 (A) के जरिए ही दिया गया था. 13वें संशोधन में जब भारतीय संविधान में आर्टिकल 371 (A) को शामिल किया गया था. इसके साथ ही नगालैंड विधानसभा को 3 साल की अवधि दी गई थी, जिसमें व एक राज्य बनने की अपनी प्रक्रिया को शांतिपूर्ण रूप से पूरा कर ले. लेकिन उसके बाद 371 (A) को हटाने की जब भी बात हुई, नगालैंड में हमेशा ही इसका विरोध हुआ.

3. इनर लाइन परमिट क्या है?
इसे ऐसे समझिए जैसे विदेश जाने के लिए हमें उस देश का वीजा जरूरी होता है, उसी तरह भारत के इन सुरक्षित राज्यों में जाने के लिए भारत के अन्य राज्यों के नागरिकों को यह परमिट लेना जरूरी होता है. नगालैंड में घुसने के लिए भारतीय नागरिकों को इंटर-स्टेट चेक-गेट पर यह परमिट दिखाना ही पड़ता है, वरना उन्हें बॉर्डर पार नहीं करने दिया जाएगा.

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First published: September 8, 2019, 6:06 PM IST
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