क्या है Beating Retreat कार्यक्रम, जिसका ताल्लुक गणतंत्र दिवस से है?

29 जनवरी को गणतंत्र दिवस समारोह का आधिकारिक समापन होता है (Photo- news18 English via PTI )

29 जनवरी को गणतंत्र दिवस समारोह का आधिकारिक समापन होता है (Photo- news18 English via PTI )

बीटिंग रिट्रीट (Beating Retreat) के दौरान राष्ट्रपति सेनाओं को अपने बैरकों में वापस लौटने की अनुमति देते हैं. ये एक तरह से गणतंत्र दिवस (Republic Day) का समापन उत्सव है, जो बेहद खास होता है.

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  • Last Updated: January 29, 2021, 8:28 AM IST
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आज यानी 29 जनवरी को गणतंत्र दिवस समारोह का आधिकारिक समापन होता है. बीटिंग द रिट्रीट (Beating The Retreat) नाम के इस समारोह का आयोजन 29 की शाम होता है, जिस दौरान सेना की तीनों शाखाएं पारंपरिक धुन बजाते हुए मार्च करती हैं. विजय चौक में होने वाले इस कार्यक्रम के मुख्य अतिथि राष्ट्रपति होते हैं. इस दौरान राष्ट्रपति से गणतंत्र दिवस समारोह खत्म करने की अनुमति मांगी जाती है.

होगी बीटिंग रिट्रीट सेरेमनी
इस बार गणतंत्र दिवस कई वजहों से अलग रहा. एक बड़ी वजह कोरोना महामारी भी रही, जिसके कारण लोग घरों से बाहर नहीं निकल सके. हालांकि गणतंत्र दिवस के बारे में जानने वाले बहुत से लोग आज के दिन की महत्ता से वाकिफ नहीं. आज बीटिंग द रिट्रीट सेरेमनी है, जो अपने-आप में बेहद खास है. इस आयोजन की सबसे अनूठी बात ये है कि समारोह का आयोजन शाम को सूरज अस्त होने के साथ होता है.

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बीटिंग रिट्रीट वैसे एक सांकेतिक आयोजन है, जिसका असली नाम वॉच सेटिंग है (Photo- news18 English via PTI )

ऊंटों का दस्ता बहुत खास


राष्ट्रपति चूंकि इस समारोह का हिस्सा होते हैं इसलिए उनके भवन को रोशनियों से सजाया जाता है. पहले हर साल राष्ट्रपति भवन की सजावट देखने के लिए भी लोग आया करते थे, लेकिन इस बार ये रौनक नहीं होगी. हालांकि इसके अलावा भी रिट्रीट में कई बातें हैं, जो इसे अलग बनाती हैं. जैसे इसका ऊंटों का दस्ता. पहली बार 1976 में 90 ऊंटों की टुकड़ी गणतंत्र दिवस का हिस्सा बनी थी, जिसमें 54 ऊंट सैनिकों के साथ और बाकी ऊंट बैंड के जवानों के साथ थे.

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तब से ये लगातार रिट्रीट सेरेमनी का खास आकर्षण हैं. बीटिंग रिट्रीट में शामिल किए जाने वाले ऊंटों का खूब श्रृंगार किया जाता है और फिर बीएसएफ के जवान उनकी सवारी करते हुए निकलते हैं. बता दें कि बीएसएफ के पास ऊंटों की एक फोर्स है, जो समारोहों से लेकर अभियानों का भी हिस्सा बनती रही है.

सांकेतिक है ये आयोजन 
बीटिंग रिट्रीट वैसे एक सांकेतिक आयोजन है, जिसका असली नाम वॉच सेटिंग है. ये उस पारंपरिक युद्ध के जमाने की याद है, जिसमें सैनिक दिनभर युद्ध करते थे और शाम को सूरज ढलने के साथ लौट जाया करते थे. इस समारोह के साथ ही तीनों सेनाओं के सैनिक भी अपने बैरकों में लौट जाएंगे. वे लौटने से पहले राष्ट्रपति से आधिकारिक अनुमति लेते हैं.

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बीटिंग रिट्रीट में सेना की तीनों शाखाएं एक साथ अपनी धुन बजाती हैं (Photo- news18 English via PTI )


ड्रम और घंटियों की आवाज
इस दौरान थल-जल और वायु सेना की धुनें एक साथ बजाई जाती हैं. ये अपने-आप में इतना सुहाना लगता है कि इसे सुननेभर के लिए लोग पूरे साल इंतजार करते हैं. इस दौरान एक खास धुन अबाइड विद मी (abide with me) बजाई जाती है, जो महात्मा गांधी की प्रिय धुन थी. ये धुन ड्रमर्स कॉल के तहत बजाई जाती है, जिस दौरान ड्रमर एकल प्रदर्शन भी करते हैं. अबाइड विद मी के दौरान ड्रम के साथ ही घंटियों की धुन भी निकाली जाती हैं, जो सुनने वालों को मोह लेती है.

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इसके बाद रिट्रीट का बिगुल बजाया जाता है
ये संकेत है कि समापन के लिए राष्ट्रपति से इजाजत लेने का समय आ चुका. तब बैंड मास्टर राष्ट्रपति के पास जाकर उनसे गणतंत्र दिवस समारोह खत्म करने की अनुमति लेते हैं. इसके साथ ही तीन दिवसीय समारोह राष्‍ट्रगान के साथ खत्म होता है.

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आज तक केवल दो बार हुआ रद्द 
गणतंत्र दिवस के आधिकारिक समापन का ये समय काफी अहम माना जाता है, लेकिन दो बार ऐसा भी हुआ रिट्रीट कार्यक्रम रद्द करना पड़ा. पहली बार साल 2001 में गुजरात में आए विनाशकारी भूकंप के बाद ऐसा हुआ था. दूसरी बार साल 2009 में कार्यक्रम रोकना पड़ा क्योंकि 27 जनवरी को देश के 8वें राष्ट्रपति रामस्वामी वेंकटरमण का निधन हो गया था. इन दो मौकों के अलावा कभी भी गणतंत्र दिवस से जु़े इस समारोह का रद्द नहीं किया गया.
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