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क्यों चीन के लिए Indian Army का टैंक 'भीष्म' सबसे घातक साबित हो सकता है?

थर्ड-जेनरेशन T-90 भीष्म टैंक.
थर्ड-जेनरेशन T-90 भीष्म टैंक.

टी-90 भीष्म (T-90 Bhishma) की जो खासियत उसे भारतीय सेना (Indian Army) के सबसे नायाब हथियारों में से एक बनाती है, वो है इसका न्यूक्लियर, बायोलॉजिकल और केमिकल (NBC) से सुरक्षित होना.

  • News18Hindi
  • Last Updated: October 9, 2020, 7:58 AM IST
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पूर्वी लद्दाख में सीमा पार चीन के सैनिक पूरे लाव-लश्वर के साथ तैनात हैं. चीन के सरकारी टीवी चैनल सीसीटीवी के मुताबिक पीपल्स लिबरेशन आर्मी (People's Liberation Army in China) लड़ाई के पूरे मूड में है. दूसरी ओर भारत के सैनिक (Indian army in Ladakh) भी सीमा पर किसी भी चुनौती का सामना करने के लिए तैयार हैं. इसके लिए सीमा पर अत्याधुनिक हथियारों के इस्तेमाल के प्रशिक्षित सैनिकों के साथ टी-90 भीष्म जैसे टैंक भी रखे गए हैं. भीष्म टैंक खास लद्दाख जैसे इलाकों के लिए है, जो -40 डिग्री सेल्सियम तक तापमान में भी पूरी क्षमता से काम कर पाता है.

क्या हैं सीमा पर हालात
चीन से लगातार वार्ता की लगभग नाकाम होती कोशिशों के बीच भारतीय सेना लद्दाख सीमा पर पूरी तरह से तैयार हो चुकी है. इस बारे में यूरेशियन टाइम्स ने इंडियन एक्सप्रेस अखबार के हवाले से बताया कि जून से ही गलवान घाटी के हालात देखते हुए युद्ध जैसी तैयारियां की जा रही हैं. इनमें से एक है थर्ड-जेनरेशन टैंक T-90 भीष्म टैंकों की तैनाती. इन्हें भीषण सर्दियों में भी चीन के खिलाफ निपटने के लिए काफी माना जा रहा है.

विपरीत मौसम में भी काम करने वाले इस भीष्म टैंक की कई खासियतें हैं

अलग तरह के ईंधन से काम


दरअसल भीष्म टैंक इस तरह से डिजाइन किए गए हैं कि वे हड्डियां जमा देने वाले तापमान पर लद्दाख, सिक्कम और अरुणाचल प्रदेश की ऊंचाई वाले इलाकों में काम कर सकें. ये टैंक माइनल 40 डिग्री तापमान पर भी फंक्शनल रहते हैं. टी-90 भीष्म टैंक में आर्मी 3 तरह के फ्यूल का इस्तेमाल करती है ताकि यह कड़ाके की सर्दी में भी न जमे. भीष्म टैंकों को रूस की भयानक ठंड में भी आजमाया जा चुका है.

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जानिए, भीष्म की खूबियां
इस टैंक का निर्माण रूसी कंपनी अवडी हैवी व्‍हीकल्‍स ने भारत के साथ मिलकर किया है. देश के सबसे बेहतर और विपरीत मौसम में भी काम करने वाले इस भीष्म टैंक की कई खासियतें हैं, जैसे ये एक मिनट में 8 गोले फायर कर सकता है, जो दुश्मन सेना में खलबली मचा सकने के लिए काफी है. टैंक का हल्का होना भी इसे ज्यादा ऑपरेशन बना देता है. महज 48 टन के साथ ये दुनिया के सबसे हल्के टैंकों में शुमार है. लगभग 1000 हॉर्स पावर इंजन होने के कारण ये पहाड़ी इलाकों में भी मजबूती से आगे बढ़ सकता है.

पूर्वी लद्दाख में सीमा पार चीन के सैनिक पूरे लाव-लश्वर के साथ तैनात हैं- सांकेतिक फोटो (flickr)


कई तरह से है सुरक्षित
इसके साथ ही भीष्म एडवांस्‍ड ऑटोमेटेड डिजिटल फायर कंट्रोल सिस्‍टम (एफसीएस) से लैस है. यह सिस्टम टारगेट को पहचानकर उसे सेकंड्स में खत्म कर पाता है. भीष्म की एक और खासियत उसे भारतीय सेना के सबसे नायाब हथियारों में से एक बनाती है, वो है इसका न्यूक्लियर, बायोलॉजिकल और केमिकल (NBC) से सुरक्षित होना. ऐसे में दुश्मन के टैंक नष्ट करने के नापाक इरादों से भी ये टैंक अच्छी तरह निपट सकता है.

टी-72 मेन बैटल टैंक भी हैं
टी-90 भीष्म टैंक को और ज्यादा ताकतवर बनाने के लिए साथ में टी-72 मेन बैटल टैंक भी तैनात किए गए हैं. माना जा रहा है कि ये टैंक भी भीष्म की तरह ही ठंडे इलाकों में बढ़िया ढंग से काम करते हैं. डिफेंस राइटर सेलेब लार्सन के हवाले से यूरेशियन टाइम्स ने बताया कि इन टैंकों का आकार छोटा होने की वजह से माइनस तापमान पर पहाड़ी इलाकों में ये बड़े टैंकों की बजाए ज्यादा कारगर तरीके से काम करते हैं.

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चीनी टैंक अपेक्षाकृत कमजोर
इन टैंकों से मुकाबले के लिए चीन ने सीमा पार टी-25 टैंक खड़े रखे हैं. ये टैंक भी आकार में छोटे और इस तरह से डिजाइन किए गए हैं कि पहाड़ों पर काम कर सकें. हालांकि खुद चीनी रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि ये भारतीय भीष्म से मुकाबले में नहीं ठहरते. रक्षा विशेषज्ञ पीटर सुचेई के मुताबिक इस चीनी टैंक की वार करने की क्षमता भारतीय टैंकों से कमतर है.

बर्फीली ठंड से मुकाबले के लिए भारतीय सेना ने इंतजाम शुरू कर दिया है- सांकेतिक फोटो (pikist)


आर्कटिक टेंट बचाएगा बर्फीले तूफानों से
साथ ही इस बीच बर्फीली ठंड से मुकाबले के लिए भारतीय सेना ने इंतजाम शुरू कर दिया है. वो ऐसे टेंट लगा रही है, जिसके भीतर तूफानी रफ्तार वाली ठंडी हवाओं के बीच भी सैनिक सुरक्षित रह सकें. खास तरह के इन टेंट को आर्कटिक टेंट कहते हैं. खास तरह के इस टेंट को आर्कटिक ओवन टेंट भी कहते हैं. साल 1987 में बर्फीले इलाकों में कैंपिंग के साथ सैनिकों के लिए तैयार किए गए इन टेंट की खासियत इसका फैब्रिक है. वेपेक्स नाम के मटेरियल बना कुछ ऐसा होता है कि टेंट से बाहर भारी बारिश के साथ बर्फबारी भी हो रही हो तो भी अंदर के तापमान को सूखा रखता है. साथ ही अंदर की नमी भी बनाए रखता है ताकि सांस लेने में कोई समस्या न हो.

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फ्यूल के लिए भी खास इंतजाम
इन टेंटों के अलावा हमारी सेना ईंधन का भी स्टॉक करने में लगी हुई है. बता दें कि सर्दियों को देखते हुए वहां एक खास तरह की डीजल भी सप्लाई की जाने वाली है. माइनस तापमान में काम आने वाली इस डीजल को तेल कंपनी इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन लिमिटेड (IOCL) लेकर आई है ताकि सर्दियों में भी जवानों का मूवमेंट आसान हो सके. IOCL का दावा है कि ये लद्दाख की सर्दियों में भी जमेगा नहीं. इसे विंटर डीजल कहा जा रहा है. विंटर डीजल को ऊंचे स्थानों तक सप्लाई करने के लिए सारी तैयारियां हो चुकी हैं. ये पनीपत रिफाइनरी में पंप होगा और वहां से जालंधर जाएगा. जालंधर से फ्यूल सड़क मार्ग से लेह पहुंचेगा. यहां से वो और ऊंचे स्थानों पर ले जाया जाएगा.
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