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Explained: कैसी होती है वो लैब, जहां दुनिया के सबसे खतरनाक पैथोजन रखे जाते हैं

वायरस के फैलने को लेकर जांच के लिए विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की टीम वुहान पहुंच चुकी - सांकेतिक फोटो (pixnio)
वायरस के फैलने को लेकर जांच के लिए विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की टीम वुहान पहुंच चुकी - सांकेतिक फोटो (pixnio)

बायोसेफ्टी लेवल (BSL) 4 लैब दुनिया में चुनिंदा ही हैं. भारत में इस स्तर की कोई लैब नहीं, वहीं चीन की वुहान लैब (Wuhan Institute of Virology) इसी लेवल की है. यहां वही पैथोजन होते हैं, जो लाइलाज और जानलेवा हों.

  • News18Hindi
  • Last Updated: January 17, 2021, 4:34 PM IST
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कोरोना वायरस के फैलने को लेकर जांच के लिए विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की टीम वुहान पहुंच चुकी है. शुरुआती जांच में ही एक वीडियो की जानकारी मिली, जिसके वहां की टीम बिना किसी एहतियात चमगादड़ों के सैंपल ले रही थी. ये टीम वुहान इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी से थी, जहां से वायरस फैलने का अंदेशा है. बता दें कि इस लैब को लेवल-4 का दर्जा मिला हुआ है, जो सबसे संवेदनशील लैब को मिलता है.

कितने स्तर होते हैं लैब के 
सेंटर फॉर डिसीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन (CDS) ने बायोसेफ्टी स्तर पर लैब को 4 श्रेणियों में बांट रखा है. बायोसेफ्टी लेवल (BSL) वो सावधानी या तैयारी है जिसमें खतरनाक रोगाणुओं (वायरस, बैक्टीरिया) को लैब के भीतर रखा जाता है.

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लैब की दुर्लभ श्रेणी है BSL-4


यहां दुनिया के सबसे खतरनाक पैथोजन होते हैं और उनपर लगातार प्रयोग भी चलता रहता है. आमतौर पर यहां वही वायरस या बैक्टीरिया होते हैं, जो लाइलाज हों और जानलेवा भी. यही वजह है कि ये लैब आबादी से काफी दूर होते हैं ताकि कोई दुर्घटना हो भी जाए तो आबादी पर उसका असर न हो. इस लैब की इमारत में पानी से लेकर हवा की सप्लाई भी अलग होती है और संक्रमण मुक्त करने का सिस्टम भी अलग होता है.

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यहां पर दुनिया के सबसे खतरनाक पैथोजन होते हैं और उनपर लगातार प्रयोग भी चलता रहता है- सांकेतिक फोटो (pixnio)


अमेरिका में सबसे ज्यादा लेवल 4 लैब्स हैं 
अमेरिका के Government Accountability Office (GAO) के अनुसार अकेले अमेरिका में ही 15 लेवल 4 लैब हैं, जहां जानलेवा बीमारी फैलाने वाले पैथोजन पर प्रयोग चलता रहता है. हालांकि अब भी दुनिया में कुछेक लैब्स के नाम ही लिए जाते हैं. इनमें कनाडा का National Microbiology Lab (NML) मुख्य है. ये कनाडा का अकेला लेवल 4 लैब है, जहां COVID-19 की जांच को कन्फर्म किया जा सकता है. हालांकि अब इस ग्राउंड जीरो के 3 वैज्ञानिक भी कोरोना पॉजिटिव आ चुके हैं.

प्राइवेट लैब भी शामिल
टैक्सास का Texas Biomedical Research Institute भी इसी श्रेणी का लैब है. साल 1941 में बने इस लैब में लगातार पैथोजन्स पर काम चल रहा है. इसके लिए यहां 60 वैज्ञानिक, 18 रिसर्चर और लगभग 400 स्टाफ है. ये अमेरिका की इकलौती निजी लैब है, जहां लेवल-4 पैथोजन पर काम होता है.

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चीन का वुहान इंस्टीट्यूट भी लेवल-4 से है 
माना जा रहा है कि Chinese Academy of Sciences (CAS) के तहत आने वाले इसी लैब में SARS coronavirus पर लंबे वक्त से रिसर्च चल रही थी और यहीं से दुर्घटनावश ये वायरस लीक हो गया. हालांकि अभी तक इसके कोई प्रमाण नहीं मिल सके हैं. लेकिन अब जो वीडियो आ रहे हैं, उनमें साफ है कि वैज्ञानिक बगैर ग्लव्स और पीपीई किट के चमगादड़ को हाथों से पकड़े हुए हैं. वहीं, कई लोग महज टीशर्ट और शॉर्ट्स में ही चमगादड़ों का मल इकट्ठा करते नजर आ रहे हैं.

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वैज्ञानिक बगैर ग्लव्स और पीपीई किट के चमगादड़ को हाथों से पकड़े हुए हैं- सांकेतिक फोटो (pixabay)


रूस में इस स्तर के लैब में हो चुके कई हादसे
रूस में State Research Center of Virology and Biotechnology VECTOR में भी लाइलाज बीमारियां फैलाने वाले वायरस और बैक्टीरिया पर लगातार काम होता आया है. 1974 में बने इस लैब में स्मॉलपॉक्स और हेपेटाइटिस पर काफी काम हुआ था. हालांकि यहां दुर्घटनाएं भी होती रही हैं. साल 2004 में एक रिसर्चर ने गलती से खुद को इबोला वायरस का इंजेक्शन लगा लिया और 2 हफ्ते के भीतर उसकी मौत हो गई. 2019 के सितंबर में वेक्टर में गैस धमाका हुआ था, जिसमें कई लोगों में थर्ड डिग्री बर्न हुआ था. रूस ने दुनिया को धमाके के तुरंत बाद आश्वस्त किया कि किसी तरह का कोई पैथोजन नहीं फैला है.

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क्या है पहला स्तर 
लैब 4 स्तर की लैब जहां दुनिया में सबसे कम हैं, वहीं तीन लेवल की बहुतेरी लैब्स हैं. सबसे पहले तो आता है BSL–1. ये लैब की 4 श्रेणियों में सबसे शुरुआती लैब है, जहां ऐसे पैथोजन होते हैं, जिनसे बहुत कम खतरा होता है. यहां पर रखी जाने वाली सावधानियों में प्रयोग के बाद सतह को संक्रमण मुक्त करना, हाथ धोना और Personal protective equipment पहनना शामिल है, जैसे मास्क, ग्लास और ग्लव्स. यहां पर कुछ खाना-पीने की भी मनाही होती है. यहां ई कोलई जैसे सैंपल ऑर्गेनिज्म होते हैं.

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लैब 4 स्तर की लैब जहां दुनिया में सबसे कम हैं, वहीं तीन लेवल की बहुतेरी लैब्स हैं- सांकेतिक फोटो


BSL–2 को दूसरे स्तर की लैब मानते हैं
यहां पर ऐसे पैथोजन होते हैं जिनके संक्रमण से वे बीमारियां हो सकती हैं, जिनका इलाज खोजा जा चुका है. हालांकि ये भी अपने-आप में खतरनाक होते हैं, जैसे HIV के पैथोजन या फिर staph infections जो कि खासे संक्रमाक होते हैं. यहां पर काम करने वाले भी लैब 1 की तरह ही सावधानी रखते हैं लेकिन यहां पर सावधानियों का स्तर थोड़ा बढ़ जाता है. अगर रिसर्चर की त्वचा पर छोटा सा कट या खरोंच भी काम के दौरान आ जाए तो ये खतरनाक हो सकता है. यही वजह है कि इस लैब में बाहरी लोगों के आने की मनाही होती है.

तीसरी श्रेणी BSL-3 कहलाती है
यहां दूसरे देशों से आए या फिर नए पैथोजन पर काम होता है. लैब में यलो फीवर, वेस्ट नाइल वायरस और टीबी के बैक्टीरिया भी पलते हैं. यहां पर काम इतना खतरनाक होता है कि ये लैब ज्यादातर देशों में सरकारी एजेंसी की तरह रजिस्टर्ड होते हैं. हमारे यहां भारतीय वायरोलॉजी संस्थान पुणे इसी श्रेणी का है.
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