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क्या होता है ‘ब्लैक बजट’ और किन देशों में कैसे समझा जाता है?

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न्यूज़ीलैंड (New Zealand) में ब्लैक बजट का अर्थ उस यादगार बजट से जुड़ा है, जो सरकार ने 60 साल पहले पेश किया था, तो भारत (Black Budget of India) में भी करीब 50 साल पुरानी ऐसी ही याद है. लेकिन अमेरिका (US Budget) समेत कुछ और देशों में इसका मतलब कुछ और ही है...

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गुप्त विनियोग (Covert Appropriation) या सरल भाषा में आप ऐसे समझें कि जब सरकारी बजट (Government Budget) में कुछ सीक्रेट ऑपरेशनों (Secret Operations) के लिए रकम आवंटित की जाती है, तो उसे ब्लैक बजट के तौर पर समझा जाता है. मिलिट्री से जुड़े रिसर्च वर्क (Military Research) और अन्य कामों के साथ ही गुप्त ऑपरेशनों पर होने वाले खर्च और आवंटन संबंधी ब्योरे को ब्लैक बजट कहा जाता है, जो अक्सर सुरक्षा कारणों से गोपनीय (Confidential Budget) ही रहता है. बेहद सीक्रेट होने के साथ ही यह समझने में भी काफी जटिल होता है. आपके लिए यह जानना दिलचस्प हो सकता है कि अमेरिका में एक अनुमान के मुताबिक करीब 50 अरब डॉलर का ब्लैक बजट हर साल होता है.

सिर्फ अमेरिका ही नहीं, कुछ और अहम देशों में भी इस तरह के बजट के प्रावधान होते हैं. कहीं इसे कुछ और नामों से भी समझा जाता है. कहां इसका क्या मतलब है, आपको बताते हैं.

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अमेरिका में बजट का 10 फीसदी ‘ब्लैक’
सालाना अनुमानित अमेरिकी बजट अगर 700 अरब डॉलर का माना जाए तो इसका करीब 10 फीसदी ब्लैक बजट का हिस्सा होता है. अमेरिका के रक्षा विभाग का यह बजट ‘ब्लैक प्रोजेक्टों’ को फंड करने के लिए होता है. यानी ऐसे प्रोजेक्ट जिन्हें रक्षा विभाग बेहद संवेदनशील और गोपनीय समझता है. 2008 में ब्लैक अजट यहां 30 अरब डॉलर का था, लेकिन 2009 में यह 50 अरब डॉलर का हो गया.

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अमेरिका में ब्लैक बजट बेहद गोपनीय होता है.

अमेरिका में ब्लैक बजट से जुड़े कई प्रोजेक्ट चुने हुए प्रतिनिधियों और अफसरों तक से छुपाए जाते हैं. कांग्रेस के चुनिंदा लोग ही इसके बारे में जान पाते हैं, वो भी कोड नेम और गुप्त आंकड़ों के साथ. अमेरिका में इस तरह के बजट की शुरूआत नेशनल सिक्योरिटी एक्ट 1947 से हुई थी. अमेरिकी सरकार का दावा रहा है कि ब्लैक बजट का इस्तेमाल रक्षा संबंधी रिसर्च के लिए किया जाता है, जो विज्ञान व तकनीक से जुड़ा मामला है.

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लैटेस्ट डेटा के हवाले से बताया जाता है कि ट्रंप प्रशासन के समय 2019 के ब्लैक बजट के लिए 81.1 अरब डॉलर की मांग रखी गई थी.

रूस में बड़ा होता है ब्लैक बजट
मॉस्को बेस्ड थिंक टैंक गैदर इंस्टीट्यूट के अनुमान की मानें तो रूस में ब्लैक बजट काफी बड़ा होता है. 2015 में यह कुल बजट का 21 फीसदी यानी 3.2 ट्रिलियन रूबल का था. और यह आंकड़ा 2010 के ब्लैक बजट की तुलना में दोगुना था. बताया जाता है कि रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के कार्यकाल में रूसी मिलिट्री के लिए बजट काफी बढ़ा है.

फ्रांस में ‘स्पेशल फंड्स’ है नाम
ब्लैक बजट को फ्रांस में स्पेशल फंड्स के नाम से जारी किया जाता है. ऐसा कहा जाता है कि इन फंडों का इस्तेमाल मंत्री गैर कानूनी ढंग से अपने लिए कर लेते हैं. यहां ब्लैक बजट के संबंध में कोई कानून नहीं है हालांकि हर साल ब्लैक बजट डिप्टियों के वोट से ही तय होता है.

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तुर्की में इस पर राजनीति
स्वविवेकी फंड और एक विधेयक को लेकर तुर्की में विपक्ष का आरोप रहा कि प्रेसिडेंट अर्दाेआन राष्ट्रीय इंटेलिजेंस ऑर्गेनाइज़ेशन को अपने काबू में लेना चाहते हैं. वहीं, तुर्की में कानून के मुताबिक सीक्रेट ऑपरेशनों के बजट के 0.5 फीसदी से ज़्यादा खर्च नहीं किया जा सकता लेकिन सप्लीमेंट के तौर पर अतिरिक्त 2 फीसदी का प्रावधान है.

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यशवंतराव चव्हाण ने 1973-74 में जो बजट पेश किया था, भारत में उसे ब्लैक बजट कहा गया.

भारत और न्यूज़ीलैंड में ब्लैक बजट का मतलब?
1973-74 में यशवंतराव चव्हाण ने जो बजट पेश किया था, उसे ब्लैक बजट कहा गया. इसके कारणों में सबसे पहले तो 550 करोड़ रुपये के घाटे का बजट होना था और दूसरी बात यह भी अहम थी कि इस बजट में 56 करोड़ रुपये कोयला खदानों के राष्ट्रवाद के लिए आवंटित किए गए थे. पावर, सीमेंट और स्टील उद्योगों में कोयला की सप्लाई को निर्बाध करने के लिए ये प्रावधान हुए थे.

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लेकिन, यह फैसला आने वाले समय में उल्टा साबित हुआ और देश में कोयला उत्पादन बेहद प्रभावित हुआ, जिससे भारत को कोयले के लिए आयात करना पड़ा. यही नहीं, इस बजट को सूखे और बांग्लादेश में युद्ध के लिए भी ज़िमेदार माना गया. इस तरह के कारणों से इसे देश के इतिहास में ‘ब्लैक बजट’ कहा गया.

वहं, न्यूज़ीलैंड में 1958 में सरकार ने जो बजट पेश किया था, उसमें बीयर, तंबाकू अज्ञैर पेट्रोल पर टैक्स काफी बढ़ाए गए थे. न केवल इस बजट को ‘ब्लैक बजट’ कहा गया बल्कि इसका खमियाज़ा सरकार को 1960 में भुगतना पड़ा और इसे पेश करने वाले वित्त मंत्री का राजनीतिक करियर अगले कुछ ही सालो में तकरीबन खत्म हो गया था.

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