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क्या है बोको हराम, और क्यों लगातार नरसंहार करता रहा है?

कुख्यात जिहादी संगठन बोको हराम ने नाइजीरिया में एक बार फिर कत्लेआम मचा दिया- सांकेतिक फोटो
कुख्यात जिहादी संगठन बोको हराम ने नाइजीरिया में एक बार फिर कत्लेआम मचा दिया- सांकेतिक फोटो

अफ्रीका में फैल चुके खूंखार आतंकी संगठन बोको हराम (terrorist organization Boko Haram) ने पश्चिमी शिक्षा और मान्यताओं के खिलाफ जिहाद छेड़ रखा है. यहां तक कि वो वोट डालने वालों को भी मार देता है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: December 1, 2020, 11:30 AM IST
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नरसंहार के लिए कुख्यात जिहादी संगठन बोको हराम ने नाइजीरिया में एक बार फिर कत्लेआम (Boko Haram Massacre in Nigeria) मचा दिया. इंटरनेशनल मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक 28 नवंबर को हुए हमले में कम से कम 110 लोग मारे गए, जो कि धान के खेतों में काम करने वाले किसान थे. ये इस जिहादी संगठन का पहला हमला नहीं, बोको हराम लगातार ऐसी घटनाओं को अंजाम देता रहता है. जानिए, क्या है ये संगठन और किस मसकद से कत्लेआम मचाता आता है.

साल 2002 में बना बोको हराम एक चरमपंथी समूह है जो नाइजीरिया से सरकार या किसी भी तरह की सत्ता को हटाकर उसे पूरी तरह से इस्लामिक स्टेट बनाना चाहता है. इसका ऑफिशियल नाम जमात एहल अस-सुन्ना लिद-दावा वल-जिहाद है. इसके मायने हैं- पैगंबर की शिक्षा और जेहाद को बढ़ाने में जुटे हुए लोग. मैदुगुरी शहर में इस संगठन का हेडक्वार्टर है. वैसे बोको हराम का नाइजीरिया की भाषा होसा में शाब्दिक अर्थ है पश्चिमी शिक्षा हराम यानी वर्जित है.

बोको हराम में बच्चों और किशोरों का ब्रेनवॉश होने लगा- सांकेतिक फोटो




ये कट्टरपंथी इस्लाम को मानता है और यकीन करता है कि मुस्लिमों को पश्चिमी तौर-तरीकों से दूरी रखनी चाहिए, चाहे वो सामाजिक, शैक्षिक या फिर आर्थिक हो. इसके तहत इलेक्शन में वोट करना पाप है. आधुनिक कपड़े पहनना या लड़कियों का घर से बाहर निकलना भी वर्जित है.
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इसी सोच के साथ मुस्लिम धर्मगुरु मोहम्मद युसुफ ने बोको हराम बनाया. शुरुआत में इस संगठन के पास एक मस्जिद और इस्लामी शिक्षा देने वाला स्कूल था. ये गरीब बच्चों को अपने यहां पढ़ाता. धीरे-धीरे गरीबी झेल रहे सैकड़ों नाइजीरियाई बच्चे यहां आने लगे. लेकिन अब बात पढ़ाई से आगे निकल चुकी थी.

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बोको हराम संगठन के तहत जल्दी ही राजनैतिक विचारधारा चलने लगी. इस्लामिक देश बनाने के लिए स्कूल पढ़ाई की जगह अपने ही तरह के कट्टर जेहादियों को शामिल करने लगा. बच्चों और किशोरों का ब्रेनवॉश होने लगा. साथ ही साथ उन्हें हथियार चलाने की ट्रेनिंग मिलने लगी.

बोको हराम ने जिहादियों के साथ नाइजीरिया की व्यवस्था को खत्म करने के लिए पुलिस पर हमला कर दिया- (CNN) सांकेतिक फोटो


साल 2009 में बोको हराम ने अपने ट्रेंड जिहादियों के साथ मिलकर नाइजीरिया की प्रशासनिक व्यवस्था को खत्म करने के लिए पुलिस पर हमला कर दिया. हालांकि हमले में पुलिस भारी पड़ूी और बोको हराम समर्थकों का काफी नुकसान हुआ. इसमें उनका नेता मोहम्मद युसुफ भी मारा गया. मान लिया गया कि नेता के खत्म होने पर संगठन खत्म हो गया लेकिन ऐसा हुआ नहीं.

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अगले ही साल संगठन दोबारा खड़ा हो गया. इसके बाद से बोको हराम लगातार हमले और नरसंहार करता आया है. इस कुख्यात संगठन के खिलाफ साल 2014 में काफी आवाजें उठी थीं, जब इसने नाइजीरिया के चिबोक कस्बे से अप्रैल के महीने में साल 2014 में 276 बच्चियों को अगवा कर लिया. लड़कियां बोर्डिंग स्कूल से उठाई गई थीं. इस घटना के बाद पूरी दुनिया में तहलका मच गया. किसी को नहीं पता था कि लड़कियां कहां रखी गई हैं और वे जिंदा हैं भी या नहीं. 4 साल बाद 107 लड़कियां लौटा दी गईं. लेकिन अब भी आधी से ज्यादा लड़कियां लापता हैं. परिवार अब उनके लौटने की उम्मीद लगभग खो चुका है.

बोको हराम ने साल 2014 में 276 बच्चियों को अगवा कर लिया था- सांकेतिक फोटो


बोको हराम से छूटकर आई लड़कियों के साथ असल में क्या होता रहा, इसकी कोई पक्की तफसील नहीं. लड़कियों को कुछ भी बोलने की मनाही है वरना इनकी सुरक्षा को खतरा हो सकता है. हालांकि टुकड़ों-टुकड़ों में कही बातों से सामने आया सच बहुत डरावना है. लड़कियों से खाना पकवाने, मजदूरी जैसे काम कराने के साथ उन्हें सेक्स स्लेव बनाकर रखा जाता रहा. हर लड़की को एक टेंट में रखा जाता, जहां मिलिटेंट आते और अपने लिए लड़की चुनकर ले जाते.

अब सवाल ये है कि आतंकी गतिविधियां चलाने के लिए लोगों को रखने और उन्हे ट्रेनिंग देने के पैसे कहां से आते हैं? बोको हराम को कथित तौर पर कई इस्लामिक आतंकी संगठनों से मदद मिलती रही है. इस्लामिक स्टेट से भी इसके जुड़ने की बातें सामने आती रही हैं. ये मिडिल ईस्ट से भगाए गए इस्लामिक स्टेट के आतंकियों को अफ्रीका में बसने और फैलने में मदद कर रहा है.

बदले में इस्लामिक स्टेट ट्रेनिंग और हथियारों की मदद करता है. नाइजीरिया के 6 प्रांत इसके कंट्रोल में हैं और यहां सरकार का कोई दखल नहीं. ड्रग्स और तेल माफिया की तरह भी ये काम कर रहा है, जिसके कारण पैसों की कोई कमी नहीं. स्थानीय लोग डरने की वजह से विरोध नहीं कर पाते. स्थानीय लोगों का समर्थन न मिलने की वजह से सैन्य कार्रवाई भी यहां खास कारगर नहीं रही.
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