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कोबरा गोल्ड ड्रिल, जहां दुनियाभर के सैनिक जहरीले सांपों से भूख मिटाना सीखते हैं

दुनियाभर से सैनिक कोबरा गोल्ड एक्सरसाइज में हिस्सा लेने पहुंचते हैं (Photo-  news18 via Reuters)
दुनियाभर से सैनिक कोबरा गोल्ड एक्सरसाइज में हिस्सा लेने पहुंचते हैं (Photo- news18 via Reuters)

सैनिकों के पास रसद खत्म हो जाए, और वे घने जंगलों में फंसे हों तो भी पेट भरा रहे, इसके लिए कोबरा गोल्ड मिलिट्री ड्रिल (Cobra Gold military drill) का आयोजन होता है. थाइलैंड (Thaliland) में होने वाला ये अभ्यास अब चिंता का सबब बना हुआ है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: February 23, 2021, 4:28 PM IST
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थाइलैंड में हर साल दुनियाभर से सैनिक कोबरा गोल्ड एक्सरसाइज में हिस्सा लेने पहुंचते हैं. वहां असामान्य हालातों में खुद को जिंदा रखने के तरीके सिखाए जाते हैं. इन्हीं में से एक तरकीब के तहत सैनिक सांपों से लेकर सारे जंगली जानवरों को खाने की ट्रेनिंग लेते हैं. अब दूसरे देश अपने सैनिकों से सांप-बिच्छू न खाने की अपील कर रहे हैं. उन्हें डर है कि इससे कोरोना से भी खतरनाक वायरस फैल सकता है.

असाधारण हालातों में जिंदा रहने का प्रशिक्षण
सैनिकों के लिए मौत का खतरा कोई नई बात नहीं. दुनिया की सबसे ऊंची चोटी से लेकर खाई तक में रहते हुए वे दुश्मनों से मुकाबला करते हैं. हालांकि दुश्मनों से मुकाबले के बीच एक और चीज भी है, जो सैनिकों की मजबूती को बताती है, वो है उनका असाधारण हालातों में भी खुद को जिंदा रख पाना. मिसाल के तौर पर घने जंगलों में फंसे आम इंसान के पास खाने को कुछ न हो तो वो वैसे ही खत्म हो जाएगा, जबकि सैनिक जिंदा रहने का कोई तरीका तो निकाल ही लेंगे. इसके लिए सैनिकों को अलग से ट्रेनिंग मिलती है.

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ड्रिल के दौरान सिखाया जाता है कि कैसे सांप को पकड़कर मारा जाए और कौन से अंग खाए जाने चाहिए (Photo- news18 via Reuters)

सांप तक खाने की ट्रेनिंग 


दुनियाभर के देश इस तरह की ट्रेनिंग के लिए अपने जवानों को थाइलैंड भेजते रहे हैं. यहां कोबरा गोल्ड मिलिट्री ड्रिल होती है. इस दौरान सैनिक कोबरा को मारकर खाते या उसका खून पीते हैं. सांपों के अलावा बिच्छू, छिपकली जैसे जीव भी खाए जाते हैं. ड्रिल के दौरान सिखाया जाता है कि कैसे जिंदा सांप को पकड़कर मारा जाए और कौन से अंग खाए जाने चाहिए.

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अब डरे हुए हैं देश
जाहिर है कि ऐसी ट्रेनिंग से गुजरा सैनिक कहीं भी हो, भूखा तो नहीं ही रहेगा. यही कारण है कि इस एक्सरसाइज में ब्रिटेन से लेकर अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया के सैनिक थाइलैंड आते रहे. लेकिन अब इस एक्सरसाइज में बड़ा बदलाव हो सकता है.

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वायरस फैलने की आशंका
हुआ ये कि साल 2019 में कोबरा ड्रिल के दौरान सैनिक सांप पकड़कर खाते हुए दिख गए. कैमरे में ये दृश्य आने के बाद पिछले ही साल कोरोना संक्रमण फैला. इसके बाद से लोग डरे हुए हैं कि सांप, छिपकली खाने के कारण कहीं कोई वायरस न फैलने लगे. गौरतलब है कि कोरोना वायरस के बारे में भी कहा जाता रहा कि ये बीमारी चीन के वुहान में उस बाजार से फैली, जहां सांप-चमगादड़ बिकते थे.

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कोबरा गोल्ड एक्सरसाइज एशिया-पैसिफिक की सबसे बड़ी सैनिक एक्सरसाइज मानी जाती है (Photo- news18 via Reuters)


भारत भी इस ड्रिल में जा चुका है
इसी डर से अब ड्रिल के तौर-तरीकों पर बात हो रही है. साल 1982 से चल रही ये मिलिट्री एक्सरसाइज एशिया-पैसिफिक की सबसे बड़ी सैनिक एक्सरसाइज मानी जाती है, जिसमें दुनिया के कई देश हिस्सा लेते रहे. वैसे ये थाइलैंड और अमेरिका ने मिलकर शुरू किया था, जिसका हेडक्वार्टर बैंकॉक रहा. भारत ने भी साल 2016 में इस सैन्य अभ्यास में पहली बार हिस्सा लिया था. वहीं चीन को इस पूरे अभ्यास के केवल एक चरण में ही जुड़ने की अनुमति मिल सकी थी.

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प्रशिक्षित लोग सैनिकों को सिखाते हैं 
सैन्य अभ्यास के दौरान एक बड़ा हिस्सा बीहड़ों में फंस जाने या रसद खत्म होने पर भी अपने खाने का इंतजाम करना है. इस दौरान सैनिक अफसर दूसरे सैनिकों को जहरीले से जहरीले सांप को मारकर उसे विषरहित बनाकर खाने की ट्रेनिंग देते हैं. सांप का खून पीने की भी सलाह दी जाती है. थाइलैंड और इंडोनेशिया में सांपों के खून को बेहद ताकतवर माना जाता है और उसका मांस पकाने और खून पीने का प्रशिक्षण देने के लिए एक पूरा दस्ता काम करता है.

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प्रशिक्षित लोग खतरनाक पायथन से लेकर जहरीले सांपों को बड़ी ही सावधानी से मारते हैं - सांकेतिक फोटो (pixabay)


कोबरा की भारी मांग है 
ये लोग खतरनाक पायथन से लेकर जहरीले सांपों को बड़ी ही सावधानी से मारते हैं और उसे पकाते हैं. कोबरा को सबसे ज्यादा ताकत देने वाला सांप माना जाता है और इंटरनेशनल बाजार में कोबरा की खूब तस्करी भी होने लगी है. थाइलैंड तो तो सैन्य अभ्यास का नाम ही कोबरा ड्रिल रख दिया गया. वहीं इंडोनेशिया में भी राजधानी जर्काता में सुबह 5 बजे से लेकर देर रात तक दुकानों में कई तरह के सांपों का खून बेचा जाता है. आमतौर पर ग्राहक की मांग पर सांपों को तुरंत मारकर उनका खून लिया जाता है. आम लोगों के अलावा सेना की रेगुलर डायट में भी कोबरा का खून और मांस शामिल होता है.

चीन में सांपों की खेती हो रही
थाइलैंड और इंडोनेशिया की तरह ही चीन में भी ट्रेडिशनल चिकित्सा के तहत सांपों का खूब उपयोग होता है. यही वजह है कि चीन के जिसिकियाओ गांव में बाकायदा सांपों की पैदावार शुरू हो गई, ठीक उसी तरह जैसे किसान अनाज उगाते हैं. साल 1980 से यहां ये काम शुरू हुआ और जल्द ही पूरी आबादी यही करने लगी. इससे पहले यहां के किसान जूट और कपास की खेती किया करते थे लेकिन ये काम उन्हें ज्यादा फायदेमंद लगा. ग्लोबल टाइम्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक गांव में अभी लगभग 170 परिवार हैं, जो हर साल 30 लाख से ज्यादा सांपों की पैदावार करते हैं.
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