Coronavirus: क्या है डबल म्यूटेंट वेरिएंट वायरस और कितना घातक हो सकता है?

(Photo- news18 English via PTI)

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पूरा का पूरा महाराष्ट्र राज्य ही कोरोना संक्रमण के लिए हॉटस्पॉट बन चुका है. इस बीच वहां से लिए गए सैंपल में 20% में डबल म्यूटेंट वेरिएंट (double mutant variant of coronavirus) मिला.

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  • Last Updated: March 27, 2021, 7:58 AM IST
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भारत में फरवरी के दूसरे हफ्ते से कोरोना संक्रमण ने एक बार फिर रफ्तार पकड़ ली. पिछले 5 दिनों में एक्टिव केस में एक लाख की बढ़त हुई. इस बीच एक और डरावनी बात दिखी है. दरअसल बढ़ते कोरोना मामलों के बीच डबल म्यूटेंट वेरिएंट होने की पुष्टि हुई है. अब विशेषज्ञ अंदेशा जता रहे हैं कि डबल म्यूटेशन इंफेक्शन की दर और तेज कर सकता है.

डबल म्यूटेंट वेरिएंट की पुष्टि हुई

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने बताया कि देश के 18 राज्यों में कई वेरिएंट ऑफ कन्सर्न (VoC) पर गए. यानी वायरस के कई अलग-अलग रूप देखे गए. इन तमाम प्रकारों के बीच डबल म्यूटेंट वेरिएंट भी है. जीनोम सीक्वेंसिंग के दौरान इसका पता लगने के बाद से चिंता जताई जा रही है कि कहीं तेजी से दर बढ़ने की वजह यही वेरिएंट तो नहीं.


जताई जा रही आशंका

फिलहाल ये वेरिएंट महाराष्ट्र से जांच के लिए भेजे गए सैम्पल्स में से 20% में मिला है. इधर जिस तेजी से महाराष्ट्र में संक्रमण के मामले बढ़े हैं, उससे ये डरा वाजिब ही है कि कहीं म्यूटेशन की प्रक्रिया के कारण इंफेक्शन रेट तो नहीं बढ़ रहा. हालांकि स्वास्थ्य मंत्रालय ने फिलहाल ऐसी कोई बात नहीं कही है लेकिन वो लगातार ये कह रहा है कि अब संक्रमण के बढ़ते मामलों के बीच ज्यादा सतर्क रहने की जरूरत है.

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नया वेरिएंट महाराष्ट्र से जांच के लिए भेजे गए सैम्पल्स में से 20% में मिला है- सांकेतिक फोटो (pixabay)




क्या है डबल म्यूटेंट वेरिएंट

जिस वेरिएंट का हल्ला हो रहा है, एक बार उसे समझ लेते हैं. ये वायरस का वो रूप है, जिसके जीनोम में दो बार बदलाव हो चुका है. वैसे वायरस के जीनोमिक वेरिएंट में बदलाव होना आम बात है. दरअसल वायरस खुद को लंबे समय तक प्रभावी रखने के लिए लगातार अपनी जेनेटिक संरचना में बदलाव लाते रहते हैं ताकि उन्हें मारा न जा सके. ये सर्वाइवल की प्रक्रिया ही है, जिसमें जिंदा रहने की कोशिश में वायरस रूप बदल-बदलकर खुद को ज्यादा मजबूत बनाते हैं. ये ठीक वैसा ही है, जैसे हम इंसान भी खुद को बेहतर बनाने के लिए कई नई चीजें सीखते और आजमाते हैं. बस वायरस भी इसी फॉर्मूला पर काम करता है.

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बढ़ता है वायरल लोड

कई बार म्यूटेशन के बाद वायरस पहले से कमजोर हो जाता है. वहीं कई बार म्यूटेशन की ये प्रक्रिया वायरस को काफी खतरनाक बना देती है. ऐसे में ये जब होस्ट सेल यानी हमारे शरीर की किसी कोशिका पर हमला करते हैं तो कोशिका कुछ ही घंटों के भीतर वायरस की हजारों कॉपीज बना देती है. इससे शरीर में वायरस लोड तेजी से बढ़ता है और मरीज जल्दी ही बीमारी की गंभीर अवस्था में पहुंच जाता है.

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कई बार म्यूटेशन की ये प्रक्रिया वायरस को काफी खतरनाक बना देती है- सांकेतिक फोटो (pixabay)


फिलहाल हेल्थ एक्सपर्ट केवल सचेत रहने और जरूरत न होने पर बाहर न निकलने की सलाह दे रहे हैं. इस बीच ये भी जानने की कोशिश हुई कि अब तक देश में कितने वेरिएंट दिखे हैं. बता दें कि कोरोना संक्रमण के साथ ही देश में विशेषज्ञों की एक टीम ने काम करना शुरू किया, जिसका मकसद वेरिएंट के बारे में ही पता लगाना है. इसे SARS-CoV-2 कंसोर्टियम ऑन जीनोमिक्स (INSACOG) कहा गया. इसके तहत 10 राष्ट्रीय स्तर के लैब काम करते हुए वायरस के जीनोम सीक्वेंस को समझ रहे हैं. इसी जांच के दौरान पता चला कि देश में अब तक वायरस के 771 वेरिएंट दिखे हैं. इनमें से भी डबल म्यूटेंट हाल ही में दिखा है.

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इसके बाद से रिसर्च चल रही है कि क्या वायरस में हुआ ये म्यूटेशन ज्यादा घातक या फिर संक्रामक है. या फिर क्या वैक्सीन की क्षमता इससे कमजोर पड़ सकती है. बता दें कि फिलहाल देश में टीकाकरण अभियान जोरों पर है और 1 करोड़ से भी ज्यादा लोगों को वैक्सीन के दोनों डोज दिए जा चुके. टीकाकरण से जुड़ी कोई भी नई जानकारी सरकारी वेबसाइटों पर लगातार अपडेट हो रही है और इसकी सूचना अस्पतालों में भी दी जा रही है ताकि टीकाकरण में किसी तरह बाधा न आए.
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