Explained: कैसे देश में डबल म्यूटेंट Coronavirus का पता लगा, क्यों हो रही जीनोम सिक्वेंसिंग?

समझने की कोशिश हो रही है कि क्या डबल म्यूटेशन ही भारत में घातक बनी दूसरी लहर का जिम्मेदार है ( news18 English AP illustration)

समझने की कोशिश हो रही है कि क्या डबल म्यूटेशन ही भारत में घातक बनी दूसरी लहर का जिम्मेदार है ( news18 English AP illustration)

SARS-CoV-2 कंसोर्टियम ऑन जीनोमिक्स (INSACOG) ने मार्च में सबसे पहले महाराष्ट्र में डबल म्यूटेंट कोरोना वायरस (double mutant coronavirus variant in Maharashtra) के होने की बात की. अब समझने की कोशिश हो रही है कि क्या ये म्यूटेशन ही भारत में घातक बनी दूसरी लहर का जिम्मेदार है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: April 20, 2021, 9:10 AM IST
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देश में कोरोना की दूसरी लहर के बीच लगातार महाराष्ट्र में कोरोना के डबल म्यूटेशन की बात हो रही है. B.1.617 नाम से ये म्यूटेंट ज्यादा संक्रामक और घातक भी माना जा रहा है. इस बीच हैदराबाद के सेंटर फॉर सेलुलर एंड मॉलिक्युलर बायोलॉजी (CCMB) ने ये जिम्मा लिया कि वो इस म्यूटेंट की जांच के साथ ये समझ सके कि क्या वाकई वायरस का यही रूप दूसरी लहर का जिम्मेदार है, या फिर इसकी वजह मिलीजुली है.

क्या है CCMB, जिसके नतीजों का इंतजार करना जरूरी है?

सेंटर फॉर सेलुलर एंड मॉलिक्युलर बायोलॉजी (CCMB) असल में काउंसिल ऑफ साइंटिफिक एंड इंडस्ट्रिअल रिसर्च के तहत आने वाली संस्था है. कई तरह की रिसर्च लगातार कर रही संस्था पहले अमेरिकन फार्मा कंपनी मॉडर्ना के साथ बातचीत भी कर रही थी कि वो अपनी वैक्सीन का उत्पादन भारत में करे. हालांकि ये वार्ता सफल नहीं हो सकी लेकिन इससे CCMB की अहमियत कम नहीं होती.

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दूसरी लहर के दौरान देश में संक्रमण दर काफी तेज हो चुकी है- सांकेतिक फोटो (pixabay)

किसका हिस्सा है ये संस्था 

फिलहाल ये जीनोम सिक्वेंस डिकोड करते हुए ये जानने की प्रक्रिया में है कि क्या B.1.617 नाम म्यूटेंट के कारण दूसरी लहर आई. ये जीनोम सिक्वेंसिंग लैब INSACOG का भी हिस्सा है, जिसकी शुरुआत साल 2020 के दिसंबर में हुई थी. INSACOG भी देशभर की 10 नामी लैब्स का संगठन है, जिसका काम ही कोरोना वायरस में म्यूटेशन पर नजर रखना है. इसे SARS-CoV-2 कंसोर्टियम ऑन जीनोमिक्स (INSACOG) कहा गया.

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इन राज्यों के सैंपल पर काम 

हैदराबाद की संस्था CCMB अब अलग-अलग राज्यों, जैसे महाराष्ट्र समेत आंध्रप्रदेश, तेलंगाना और कर्नाटक से आए सैंपल के जीनोम सिक्वेंस ले रही है. उम्मीद है कि लगभग दो हफ्ते में इसके नतीजे पता लग सकेंगे.

क्या है डबल म्यूटेंट और क्यों इसपर इतना बवाल हो रहा है

कोरोना के डबल म्यूटेंट का पहला जिक्र मार्च में हुआ था. तब सरकार ने कोरोना से प्रभावित 4 राज्यों- महाराष्ट्र, गुजरात, दिल्ली और पंजाब से वायरस के 200 सैंपल जमा करके उसपर रिसर्च की और ये नतीजा निकाला था.

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ये वेरिएंट महाराष्ट्र से जांच के लिए भेजे गए सैंपल्स में से 20% में मिला है- सांकेतिक फोटो (pixabay)


सतर्क रहने की बात की जा रही 

ये वेरिएंट महाराष्ट्र से जांच के लिए भेजे गए सैम्पल्स में से 20% में मिला है. इधर जिस तेजी से महाराष्ट्र में संक्रमण के मामले बढ़े हैं, उससे ये डरा वाजिब ही है कि कहीं म्यूटेशन की प्रक्रिया के कारण इंफेक्शन रेट तो नहीं बढ़ रहा. हालांकि स्वास्थ्य मंत्रालय ने फिलहाल ऐसी कोई बात नहीं कही है लेकिन वो लगातार ये कह रहा है कि अब संक्रमण के बढ़ते मामलों के बीच ज्यादा सतर्क रहने की जरूरत है.

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हमारी सहयोगी वेबसाइट न्यूज19 अंग्रेजी ने CCMB के डायरेक्टर राकेश मिश्रा की बात को टाइम्स ऑफ इंडिया के हवाले से देते हुए बताया कि महाराष्ट्र में डबल म्यूटेंट वायरस चिंता की बात तो है लेकिन डर की बात नहीं. लेकिन मामले बढ़ने के कारण इसपर ध्यान देना जरूरी है और यही कारण है कि संक्रमण दर और डबल म्यूटेंट के बीच लिंक पर शोध हो रहा है. इस दौरान ये भी देखा जाएगा कि क्या कोई नया वेरिएंट भी है, जो संक्रमण बढ़ा रहा है.

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कई बार म्यूटेशन की प्रक्रिया वायरस को काफी खतरनाक बना देती है- सांकेतिक फोटो (pixabay)


क्या है डबल म्यूटेंट वेरिएंट

जिस वेरिएंट का हल्ला हो रहा है, एक बार उसे समझ लेते हैं. ये वायरस का वो रूप है, जिसके जीनोम में दो बार बदलाव हो चुका है. वैसे वायरस के जीनोमिक वेरिएंट में बदलाव होना आम बात है. दरअसल वायरस खुद को लंबे समय तक प्रभावी रखने के लिए लगातार अपनी जेनेटिक संरचना में बदलाव लाते रहते हैं ताकि उन्हें मारा न जा सके. ये सर्वाइवल की प्रक्रिया ही है, जिसमें जिंदा रहने की कोशिश में वायरस रूप बदल-बदलकर खुद को ज्यादा मजबूत बनाते हैं. ये ठीक वैसा ही है, जैसे हम इंसान भी खुद को बेहतर बनाने के लिए कई नई चीजें सीखते और आजमाते हैं. बस वायरस भी इसी फॉर्मूला पर काम करता है. B.1.617 के साथ भी यही हुआ.

क्यों हो सकता है खतरनाक

कई बार म्यूटेशन के बाद वायरस पहले से कमजोर हो जाता है. वहीं कई बार म्यूटेशन की ये प्रक्रिया वायरस को काफी खतरनाक बना देती है. ऐसे में ये जब होस्ट सेल यानी हमारे शरीर की किसी कोशिका पर हमला करते हैं तो कोशिका कुछ ही घंटों के भीतर वायरस की हजारों कॉपीज बना देती है. इससे शरीर में वायरस लोड तेजी से बढ़ता है और मरीज जल्दी ही बीमारी की गंभीर अवस्था में पहुंच जाता है.

विदेशों में भी दिख चुका म्यूटेशन

वैसे कई दूसरे देशों, जैसे यूके, ऑस्ट्रलिया, जर्मनी, बेल्जियम, आयरलैंड, नामिबिया, न्यूजीलैंड, अमेरिका और सिंगापुर में भी कोरोना का डबल म्यूटेशन दिख चुका है लेकिन भारत में पहली बार कोरोना के दूसरे दौर के दौरान ही इसका पता चला.
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