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आप जानते हैं 'आंधी' क्‍या है? जिसने राजस्‍थान, यूपी, एमपी, दिल्‍ली में ले ली सैकड़ों जानें

प्रिया गौतम | News18Hindi
Updated: May 25, 2018, 3:38 PM IST

प्री मानसून सीजन में आंधी आती है. मार्च से लेकर जून तक तेज हवाएं चलती हैं. मई और जून में तापमान भी काफी बढ़ जाता है. यही तेज गर्म हवाएं धूल के साथ तेजी से अागे बढ़ती हैं. साल 2014 में भी भीषण आंधी आई थी, जिसमें कई इलाकों में जनहानि भी हुई थी.

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मई का महीना इसी डर में बीत रहा है कि पता नहीं कब वो हौव्‍वा वापस लौट आए जिसने पिछले 20 दिनों में लोगों के मन में दहशत पैदा कर दी है. जिसने करीब एक सैकड़ा जानें ले लीं. यही वजह है कि लोग घर से निकलते वक्‍त भी सोचते हैं जाने कब धूल भरी हवाएं चलें, बिजली चमके, बादल गरजें और रास्‍तों में खड़े पेड़ गिरने लगें. ये डर लाजमी भी है क्‍योंकि मई की श्‍ाुरुआत से ही पूरा उत्‍तर पश्चिम भारत भीषण आंधी की चपेट में रहा है. एेसी धूल भरी आंधी जो राजस्‍थान से लेकर हरियाणा, उत्‍तर प्रदेश, मध्‍य प्रदेश, पंजाब और दिल्‍ली-एनसीआर में तबाही मचाती रही.

आंधी की इसी भयावहता का नतीजा था कि लोगों ने इसे तूफान तक कह डाला. लेकिन क्‍या आप जानते हैं कि वास्‍तव में आंधी तूफान से अलग है. तो फिर आंधी क्‍या है? यह कैसे आती है? क्‍यों आती है? इसके आने के पीछे आखिर क्‍या वजह है? इससे कैसे बचा जा सकता है? क्‍या फिर आएगी आंधी ?

इन्‍ही सब सवालों के जवाब देते हुए भारत मौसम विज्ञान विभाग में प्रादेशिक मौसम केंद्र नई दिल्‍ली के वैज्ञानिक कुलदीप श्रीवास्‍तव बताते हैं कि प्री मानसून सीजन में आंधी आती है. मार्च से लेकर जून तक तेज हवाएं चलती हैं. मई और जून में तापमान भी काफी बढ़ जाता है. इस दौरान बादलों की गड़गड़ाहट, हल्‍की बारिश और बिजली भी चमकती है और इसके साथ गर्म हवाएं धूल के साथ तेजी से अागे बढ़ती जाती हैं जो आंधी कहलाती हैं.



scientist kuldeep srivastava, IMD





श्रीवास्‍तव कहते हैं कि मई और जून में दो तरह से मौसम प्रभावित होता है. यही कारण है कि आंधी आती है. एक तो पश्चिमी विक्षोभ (western disturbance) के कारण हवाएं उत्‍तर पश्चिम भारत के मैदानी इलाकों की ओर बढ़ती हैं तो आंधी आती है. हालांकि इसका ज्‍यादा प्रभाव नहीं होता लेकिन दूसरी स्थिति में पश्चिमी विक्षोभ के अलावा अगर पूर्वी हवाएं भी आने लगें, तापमान भी काफी बढ़ जाए तो ये तीनों मिलकर एेसी स्थिति पैदा कर देते हैं कि आंधी भीषण रूप धारण कर लेती है और बड़े इलाके को प्रभावित करती हुई आगे तक बढ़ती जाती है.

पिछले कुछ दिनों में आई आंधी इन्‍हीं तीनों का परिणाम थी. हालांकि आंधी कुछ घंटों तक ही सीमित रहती है. एक-डेढ़ घंटे में आगे बढ़ जाती है लेकिन नुकसान काफी करती है. श्रीवास्‍तव कहते हैं कि हर साल आंधी आती है हालांकि उसकी भयावहता हर साल अलग-अलग होती है. मई-जून में 4-5 दिन तक आंधी का मौसम हर साल रहता ही है. साल 2014 में भी भीषण आंधी आई थी, जिसमें कई इलाकों में जनहानि भी हुई थी.

dust storm.


वे बताते हैं कि जून में आंधी आएगी या नहीं ये कहना मुश्किल है क्‍योंकि मौसम विभाग ही नहीं विश्‍व भर में आंधी को लेकर कम रिसर्च हुई हैं. जबकि तूफान को लेकर बहुत काम हुआ है. आंधी और तूफान दोनों एक दूसरे से अलग हैं. आंधी की चेतावनी भी तूफान की तरह चार पांच दिन पहले नहीं दी जा सकती. यह बहुत से बहुत चार से पांच घंटे पहले दी जा सकती है.

आंधी तूफान में सैकड़ों पेड़ भी गिर गए


इसके साथ ही आंधी का कोई केंद्र भी नहीं होता ताकि ये बताया जा सके कि यहां नुकसान होगा. ये बहती हुई हवाएं होती हैं, ऐसे में बढ़ती जाती हैं. इस बार आई आंधी की भी चेतावनी दी गई थी. हवा के अस्थिर होने के कारण कई बार अनुमान सटीक भी नहीं बैठ पाता. हालांकि इन महीनों में जैसे ही धूल के साथ हवा चलने लगे और गर्मी पड़ रही हो तो आंधी की संभावना बढ़ जाती है.

dust storm


ऐसे में लोगों को चाहिए कि वे इसके प्रकोप में आने से बचें. जिस वक्‍त तेज धूल भरी हवाएं चल रही हों तो किसी भी पेड़ या जर्जर इमारत के आसपास न खड़े हों. वाहन भी न चलाएं क्‍योंकि अगर वाहन हल्‍का है तो हवा के दवाब के चलते पलट जाएगा. ऐसे में आंधी के दौरान सुरक्षित स्‍थान पर रहें, पक्‍के मकानों में रहें. बाहर न निकलें.

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First published: May 25, 2018, 3:38 PM IST
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