फिर आए इलेक्टोरल बॉन्ड...जिसमें रिटर्न नहीं बल्कि सियासी दलों के लिए दान

राजनीतिक पार्टी को चंदा देना है तो चुनावी बॉन्ड खरीदकर पार्टी को दिए जा सकते हैं. ये बॉन्ड्स SBI से खरीदे जा सकते हैं. ये एक जुलाई से फिर रिलीज हो रहे हैं

News18Hindi
Updated: July 1, 2019, 3:28 PM IST
फिर आए इलेक्टोरल बॉन्ड...जिसमें रिटर्न नहीं बल्कि सियासी दलों के लिए दान
News18 क्रिएटिव
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Updated: July 1, 2019, 3:28 PM IST
11वें इलेक्टोरल बॉन्ड (चुनावी बॉन्ड) इस महीने में फिर जारी किए जा रहे हैं. पिछले दो सालों में कई बार इलेक्टोरल बांड लाए जा चुके हैं. शुरू में उन्हें लेकर जहां ठंडा रुख दिखा था, वहीं इस साल चुनावों से पहले तक उनकी अच्छी खरीद हुई. हालांकि इसको लेकर पिछले दिनों सवाल भी उठे. मामला सुप्रीम कोर्ट तक भी पहुंचा.

वैसे आपको पहले बता दें कि इलेक्टोरल बॉन्ड के जरिए अब तक 5851 करोड़ रुपये जुटाए जा चुके हैं. केवल मई माह में 822 करोड़ रुपये के इलेक्टोरल बॉन्ड खरीदे गए. जनवरी से लेकर मई 2019 तक भारतीय स्टेट बैंक की विभिन्न शाखाओं के जरिये 4794 रुपये के बांड खरीदे गए. जबकि इससे पहले 2018 में 1000 रुपये की बॉन्ड की खरीदी हुई थी.

क्यों इसका मामला सुप्रीम कोर्ट में गया
पहले चुनावी बॉन्ड के जरिये सियासी दलों तक जो धन आता था उसे वो गुप्त रख सकती थीं. लेकिन पिछले दिनों इस पर विवाद हुआ. मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा. इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुना दिया.

अब सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि सभी राजनीतिक दलों को इलेक्शन कमीशन के समक्ष इलेक्टोरल बॉन्ड्स की जानकारी देनी होगी. इसके साथ दलों को बैंक डीटेल्स भी देना होगा. अदालत ने कहा है कि राजनीतिक दल,आयोग को एक सील बंद लिफाफे में सारी जानकारी दें.

इस बांड के जरिए राष्ट्रीय मान्यता प्राप्त सियासी दलों को धन मिलता है


क्यों बनाया गया था चुनावी बांड
चुनावी बॉन्ड को केंद्र सरकार ने चुनाव में राजनीतिक दलों के चंदे का ब्योरा रखने के लिए बनाया है. केंद्र की तरफ से कहा गया था कि ये चंदे की पारदर्शिता के लिए है. चुनावी बॉन्ड के तहत हर राजनीतिक दल को दी जाने वाली पाई-पाई का हिसाब-किताब बैंक से होगा.

कहां मिलते हैं ये बॉन्ड
चुनावी बॉन्ड योजना को अंग्रेजी में 'इलेक्टोरल बॉन्ड्स स्कीम' (electoral bond scheme) नाम से जाना जाता है. ये बॉन्ड भारतीय स्टेट बैंक की चुनिंदा शाखाओं से मिलते हैं. जिन 29 शाखाओं से बॉन्ड्स खरीदे जा सकते हैं, वे नई दिल्ली, गांधीनगर, चंडीगढ़, बेंगलुरु, हैदराबाद, भुवनेश्वर, भोपाल, मुंबई, जयपुर, लखनऊ, चेन्नई, कलकत्ता और गुवाहाटी समेत कई शहर में हैं.

कौन खरीद सकता है
इसे कोई भी खरीद सकता है. इन बॉन्ड्स को भारत का कोई भी नागरिक, कंपनी या संस्था चुनावी चंदे के लिए खरीद सकता है. ये बॉन्ड एक हजार, दस हजार, एक लाख और एक करोड़ रुपये तक के हो सकते हैं. देश का कोई भी नागरिक किसी भी राजनैतिक पार्टी को चंदा देना चाहता है तो उसे एसबीआई से चुनावी बॉन्ड खरीदने होंगे. वो बॉन्ड खरीदकर किसी भी पार्टी को दे सकेगा.

इसे कौन जारी करता है
सरकार की ओर से आरबीआई ये बॉन्ड्स जारी करता है. दान देने वाला बैंक से बॉन्ड खरीदकर किसी भी पार्टी को दे सकता है. फिर राजनीतिक पार्टी अपने खाते में बॉन्ड भुना सकेगी. बॉन्ड से पता नहीं चलेगा कि चंदा किसने दिया.

ये बांड देशभर में स्टेट बैंक की कुछ शाखाओं के जरिये खरीदे जा सकते हैं


बॉन्ड में तीन खिलाड़ी
पहला- डोनर, जो राजनीतिक दलों को फंड डोनेट करना चाहता है. जो व्यक्ति, संस्था या कंपनी हो सकती है.
दूसरा- देश के राष्ट्रीय और क्षेत्रीय राजनीतिक दल.
तीसरा- देश का केंद्रीय बैंक रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया.

ये बॉन्ड भारतीय स्टेट बैंक से वर्ष 2018 में मार्च, अप्रैल, मई, जुलाई और अक्टूबर और नवंबर में खरीदे गए. बॉन्ड की मियाद 15 दिनों की थी. यानी खरीदने के 15 दिन बाद पॉलिटिकल पार्टी को बॉन्ड दे देना है वो भी पंजीकृत राजनीतिक दल को. पार्टी भी इन्हें सिर्फ अधिकृत बैंक खाते के जरिये ही भुना सकेंगी. खरीदने वाले का KYC जरूरी होगा. ये बांड उन्हीं पंजीकृत राजनीतिक दलों को दिए जा सकेंगे जिन्हें पिछले चुनाव में कम से कम एक फीसदी वोट मिला.

चुनावी बांड को देश का केंद्रीय बैंक रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया जारी करता है.


इसके बाद वर्ष 2019 में ये बॉन्ड जनवरी, मार्च, अप्रैल और मई में जारी किये गए और अब जुलाई में जारी हो रहे हैं.

1. मार्च 2018- 1 से 10 मार्च तक बिके. तब 222 करोड़ के बॉन्ड्स खरीदे गए थे.
2. अप्रैल 2018- अप्रैल माह में 114.9 करोड़ की बिक्री.
3. मई 2018- 1 मई से 10 मई तक बिके.
4. जुलाई 2018 - 2 जुलाई से 11 जुलाई तक बिके.
5. अक्टूबर 2018 - 1 से 10 अक्टूबर तक.
6. नवंबर 2018- 1 से 11 नवंबर तक बिके
7. जनवरी 2019 - 350 करोड़ के बिके
8. मार्च 2019 - 1365 करोड़ रुपये के बिके
9. अप्रैल 2019 - 2256 करोड़ रुपये के बिके
10. मई 2019 - 822 करोड़ रुपये के बिके

एक आरटीआई के जवाब में बताया गया कि अब तक कुल 5851 करोड़ रुपये के चुनाव बॉन्ड खरीदे गए हैं.

ये दुनिया का पहला चुनावी बॉन्ड है?
हो सकता है ऐसा हो. न्यूज18 ने कई फाइनेंशियल एक्सपर्ट से बात की. उनमें से किसी ने भी ये नहीं कहा कि दुनिया के किसी भी लोकतंत्र में ऐसी कोई भी पॉलीटिकल फंडिग पार्टी है. एसोसिएशन ऑफ डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स के जगदीप चोकर ने कहा कि भारत में इलेक्ट्रल ट्रस्ट रहे हैं, लेकिन इलेक्ट्रल बॉन्ड्स नया है.

बॉन्ड खरीदने वाले को कोई फायदा?
चुनावी बॉन्ड खरीदकर किसी पार्टी को देने से 'बॉन्ड खरीदने वाले' को कोई फायदा नहीं होगा. न ही इस पैसे का कोई रिटर्न है. ये अमाउंट पॉलिटिकल पार्टियों को दिए जाने वाले दान की तरह है. 


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