US Election Results 2020: जानें राष्ट्रपति चुनाव में इलेक्टोरल वोट का बंटवारा कैसे होता है?

चुनाव के तीन दिन बीतने के बाद भी अगले राष्ट्रपति को लेकर तस्वीर साफ नहीं हो सकी - सांकेतिक फोटो
चुनाव के तीन दिन बीतने के बाद भी अगले राष्ट्रपति को लेकर तस्वीर साफ नहीं हो सकी - सांकेतिक फोटो

अमेरिका में जनता सीधे अपना सर्वोच्च लीडर नहीं चुनती, बल्कि इलेक्टोरल बॉडी (electoral body in America) ये काम करती है. कई बड़े राज्यों के पास चूंकि ज्यादा इलेक्टोरल वोट होते हैं, लिहाजा राष्ट्रपति पद की चाभी उनके पास होती है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: November 7, 2020, 7:15 AM IST
  • Share this:
सुपर पावर देश अमेरिका में राष्ट्रपति चुनाव (presidential election in America) के तीन दिन बीतने के बाद भी अगले राष्ट्रपति को लेकर तस्वीर साफ नहीं हो सकी है . कई राज्यों मे मौजूदा राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप, विपक्षी उम्मीदवार जो बाइडन से आगे हैं तो कहीं-कहीं बाइडन ने ट्रंप को पछाड़ा हुआ है. वैसे अमेरिका के इस सर्वोच्च पद के लिए जनता सीधे राष्ट्रपति नहीं चुनती है, बल्कि इसके लिए इलेक्टोरल वोट काम करता है, जो इलेक्टोरल कॉलेज से मिलकर बनता है.

क्या है इलेक्टोरल कॉलेज
इलेक्टोरल कॉलेज असल में एक बॉडी है, जो जनता के वोट से बनती है. इसे ऐसे भी समझा जा सकता है कि जनता के वोट से अधिकारियों का एक समूह बनता है, जो इलेक्टोरल कॉलेज कहलाता है. ये इलेक्टर्स होते हैं और मिलकर राष्ट्रपति चुनते हैं. उप-राष्ट्रपति भी यही बॉडी चुनती है.

ये भी पढ़ें: US में क्या हैं सीनेट और हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स, कैसे काम करते हैं ये?
इलेक्टोरल कॉलेज अलग तरह से काम करता है


इसमें कुल 538 सदस्य होते हैं लेकिन हर स्टेट की आबादी के हिसाब से ही उस स्टेट के इलेक्टर्स चुने जाते हैं. यानी अगर कोई स्टेट बड़ा है, तो उससे ज्यादा इलेक्टर चुने जाएंगे ताकि वो अपनी आबादी का प्रतिनिधित्व सही तरीके से कर सकें. जैसे कैलिफोर्निया की आबादी ज्यादा हैं इसलिए वहां 55 इलेक्टर हैं. वहीं वॉशिंगटन डीसी में केवल 3 ही सदस्य हैं, जो राष्ट्रपति चुनने में रोल अदा करेंगे.

उम्मीदवार को चुनाव जीतने के लिए 270 या उससे ज्यादा वोटों की जरूरत होती है- सांकेतिक फोटो (pikrepo)


किस तरह का गणित लगाती हैं पार्टियां
राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार को चुनाव जीतने के लिए 270 या उससे ज्यादा वोटों की जरूरत होती है. किसी राज्य में जो भी पार्टी जीतती है, सारे इलेक्टर्स उसी के हो जाते हैं. यही वजह है कि अमेरिका में सारे राज्यों पर फोकस करने की बजाए उम्मीदवार कुछ खास-खास राज्यों पर फोकस करता है ताकि अगर उसकी पार्टी जीते तो इलेक्टोरल कॉलेज में उसकी सदस्य संख्या ज्यादा हो जाए. ऐसे में वो राष्ट्रपति पद के ज्यादा करीब होता जाता है.

ये भी पढ़ें: जानें उस महिला के बारे में, जो बन सकती है America की फर्स्ट लेडी 

लोकप्रियता जीत की गारंटी नहीं 
यही वजह है कि वोटरों के बीच ज्यादा लोकप्रिय होने के बाद भी ये पक्का नहीं है कि उम्मीदवार प्रेसिडेंट बन ही जाएगा. अगर उसे इलेक्टोरल कॉलेज में 270 वोट नहीं मिल सके तो हार तय है. जैसे कि पिछले चुनाव में भी हुआ था, जब हिलेरी को वोटर्स से ज्यादा प्यार मिला लेकिन वे जीत नहीं पाईं. बीबीसी की एक रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिका में पिछले पांच चुनावों से लगातार यही ट्रेंड चल रहा है.

क्या हैं स्विंग स्टेट 
इसके अलावा कई स्विंग स्टेट भी होते हैं, जहां किसी एक पार्टी का गढ़ नहीं, बल्कि मत बदलते रहते हैं. इस बार कांटे की टक्कर के बीच यही स्टेट बड़ी भूमिका निभाएंगे. इनमें जॉर्जिया, टेक्सस, ओहियो, विस्कोनिस, मिनिसोटा, मिशिगन, पेंसिलविनिया, फ्लोरिडा, एरिजोना और नेवादा राज्य शामिल हैं.

ज्यादा लोकप्रिय होने के बाद भी इसी गारंटी नहीं है कि उम्मीदवार प्रेसिडेंट बन ही जाएगा फोटो (cnbc)


कहां कितने वोट हैं 
वैसे ये भी देखना अमेरिकी चुनावों को समझने में मदद कर सकता है कि किस राज्य में कितने इलेक्टोरल वोट हैं. सबसे पहले बात करते हैं कैलीफोर्निया की. यह 55 इलेक्टोरल वोटों के साथ सबसे ऊपर है, यानी सबसे अहम है. टेक्सास में 38 वोट हैं. फ्लोरिडा और न्यूयॉर्क दोनों के पास 29 वोट हैं, जो कुल मिलाकर 58 हैं. इलिनोइस और पेन्सिल्वेंनिया के पास 20-20 वोट हैं. ओहियो भी अहम राज्य है, जहां 18 वोट हैं. जॉर्जिया और मिशिगन में 16-16 वोट होते हैं. नॉर्थ कैरोलिना में 15 इलेक्टोरल वोट आते हैं. न्यू जर्सी में 14, जबकि वर्जीनिया में 13 वोट हैं.

ये भी पढ़ें: US Election Result 2020: क्या बाइडन की जीत के बाद भी ट्रंप राष्ट्रपति बने रहेंगे? 

इन राज्यों के हिस्से क्या?
अब बात करके हैं पॉलिटिकल हेडक्वार्टर वॉशिंगटन की तो यहां 12 इलेक्टोरल वोट हैं. अरिजोना, इंडियाना, मैसाचुसेट्स और टेनेसी में 11-11 वोट आते हैं. इसी तरह से मेरीलैंड, मिनेसोटा, मिसौरी और विंस्कॉसिन में कुल 40 इलेक्टोरल वोट हैं. अलबामा, कोलैरेडो और साउथ कैरोलिना में 9-9 वोट हैं. केंटकी और लूसियाना में कुल 16 इलेक्टोरल वोट हैं.

कनेक्टिकट, ओक्लाहोमा और ओरेगन में बराबरी से 21 वोट बंटे हुए हैं. अरकंसास, लोवा, कंसा, मिसिसिपी, नेवादा और उताह में कुल 36 इलेक्टोरल वोट हैं. न्यू मैक्सिको और वेस्ट वर्जीनिया में 5-5 वोट हैं. हवाई, न्यू हैंपशायर और रोड आइलैंड में 4-4 वोट आते हैं. बाकी राज्यों में तीन-तीन के हिसाब से इलेक्टोरल वोट बंटे हुए हैं. इस तरह से कुल 538 वोट होते हैं, जो अमेरिका में राष्ट्रपति कौन बनेगा, ये तय करते हैं.
अगली ख़बर

फोटो

टॉप स्टोरीज