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क्या है वो तकनीक जो कोरोना वैक्सीन के बंटवारे में काम आएगी?

जल्द से जल्द देश में वैक्सीन का बंदोबस्त हो सकता है- सांकेतिक फोटो (moneycontrol)
जल्द से जल्द देश में वैक्सीन का बंदोबस्त हो सकता है- सांकेतिक फोटो (moneycontrol)

अनुमान है कि साल 2021 की शुरुआत से देश में कोरोना के लिए टीकाकरण (coronavirus vaccination) शुरू हो सकता है. इस दौरान eVIN नामक तकनीक का जिक्र लगातार हो रहा है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: November 28, 2020, 11:45 AM IST
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कोरोना संक्रमितों की संख्या के हिसाब से अमेरिका के बाद भारत दुनिया में सबसे ज्यादा प्रभावित है, वहीं मौत की संख्या दुनिया में 7वें नंबर पर है. इस बीच वैक्सीन पर चर्चा जोरों पर है. माना जा रहा है कि जल्द से जल्द देश में वैक्सीन का बंदोबस्त हो सकता है. देश में वैक्सीन वितरण का काम eVIN की मदद से होगा. जानिए, क्या है ये eVIN और कैसे काम करेगा.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को केंद्र और राज्य से मंत्रियों से बात की, जिसमें कोनिड-19 वैक्सिनेशन प्रोग्राम पर चर्चा हुई. अनुमान है कि साल 2021 की शुरुआत से ही टीकाकरण शुरू हो सकता है. इस दौरान बार-बार एक शब्द का जिक्र हुआ, वो है eVIN यानी इलेक्ट्रॉनिक वैक्सीन इंटेलिजेंस नेटवर्क. इसी तकनीक के जरिए टीकाकरण सुनिश्चित होगा.

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eVIN खासतौर पर वैक्सीन वितरण के लिए बनाई गई तकनीक है. इसकी मदद से इस बात पर नजर रखी है कि कितनी वैक्सीन स्टॉक में है. स्मार्टफोन पर काम करने वाली ये तकनीक साल 2015 में लॉन्च की गई थी. इससे इस बात पर ट्रैक रखा जाता है कि कि कोल्ड चेन में वैक्सीन का सही ढंग से रखरखाव हो सके और वितरण के दौरान कोई समस्या न हो.
इससे रियल टाइम में वैक्सीन के रखरखाव पर नजर रखी जा सकती है
इससे रियल टाइम में वैक्सीन के रखरखाव पर नजर रखी जा सकती है


यहां बता दें कि वैक्सीन के स्टॉक को सुरक्षित रखने के लिए तापमान-नियंत्रित भंडारण की जरूरत होती है. हर टीके को रखने की एक निश्चित अवधि होती है, और इस दौरान भी उसे एक खास तापमान पर रखना होता है. अगर इसमें कमी या कोई असावधानी हुई तो टीका अपना असर खो देता है.

इलेक्ट्रॉनिक वैक्सीन इंटेलिजेंस नेटवर्क किसी भी देश की केंद्र सरकार को यूनिवर्सल इम्युनाइजेशन प्रोग्राम में काम आता है. इससे रियल टाइम में वैक्सीन के रखरखाव पर नजर रखी जा सकती है. साथ ही ये भी देखा जा सकता है कि स्टॉक में कितनी वैक्सीन अभी बाकी है.

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देश में वैक्सीन वितरण के लिए नेशनल वैक्सीन ग्रुप तैयार हो चुका है. ये समूह ही पक्का करेगा कि किस आधार पर वितरण शुरू करना है. इसपर पूरी गाइड बनाई जा रही है. इस बारे में इंडियन एक्सप्रेस से बात करते हुए हरियाणा के एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने बताया कि शुरुआत में मांग के अनुसार वैक्सीन का स्टॉक कम रहेगा. इस वजह से रिस्क एसेसमेंट के आधार पर पक्का करेंगे कि किन लोगों को वैक्सीन पहले मिलनी चाहिए. इसके बाद ही दूसरे लोगों तक टीका पहुंचेगा.

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केंद्र सरकार की अनुमित से अलग -अलग राज्यों में कोविड वैक्सीन बेनिफिशियरी मैनेजमेंट सिस्टम (CVBMS) तैयार हो रहा है. यूएनडीपी ने वे साइटें चिन्हित कर ली हैं, जहां ये होना है. कुशल एएनएम को वैक्सीन की ट्रेनिंग दी जाएगी. इनके अलावा स्टाफ नर्स और फार्मा के जानकारों को भी जरूरत के मुताबिक लिया जा सकता है.

राज्यों में कोविड वैक्सीन बेनिफिशियरी मैनेजमेंट सिस्टम (CVBMS) तैयार हो रहा है
राज्यों में कोविड वैक्सीन बेनिफिशियरी मैनेजमेंट सिस्टम (CVBMS) तैयार हो रहा है


इस सारी तैयारी के बीच लगातार वैक्सीन के कोल्ड स्टोरेज पर ध्यान देने की बात हो रही है. कोरोना वायरस के टीके को सुरक्षित रखने के लिए फैक्ट्री से लेकर सिरिंज (सुई) तक लगातार ‘कोल्ड चेन’ की जरूरत होगी. हालांकि ज्यादातर देशों में ये व्यवस्था आधी-अधूरी है.

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वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन (WHO) का मानना है कि हर साल दुनियाभर के देशों में भेजी गई आधे से ज्यादा वैक्सीन रखरखाव में गड़बड़ी के कारण खराब हो जाती हैं. इसमें सबसे बड़ी वजह तापमान कंट्रोल न रख पाना होता है. ऐसी वैक्सीन अलग लगा भी दी जाए तो बीमारी रोकी नहीं जा सकती.

फिलहाल कोरोना एकदम नया वायरस है इसलिए किसी भी ऐसे खतरे को हल्के तौर पर नहीं लिया जा सकता. अगर तापमान के कारण या गलत रखरखाव के कारण वैक्सीन खराब हुई तो वापस भारी मात्रा में वैक्सीन बनानी होगी और इसके बाद भी हैंडलिंग आसान नहीं होगी. वॉल स्ट्रीट जर्नल के मुताबिक दोनों ही फार्मा कंपनियां काफी पैसे थर्मल स्टोरेज पर खर्च करने वाली हैं. ऐसे में जाहिर सी बात है कि इसकी कीमत भी विक्रेताओं को चुकानी होगी.
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