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FATF के डार्क ग्रे लिस्ट में आने से कंगाल पाकिस्तान का होगा कितना बुरा हाल

News18Hindi
Updated: October 15, 2019, 12:18 PM IST
FATF के डार्क ग्रे लिस्ट में आने से कंगाल पाकिस्तान का होगा कितना बुरा हाल
पाकिस्तान FATF की डार्क ग्रे लिस्ट में जा सकता है

टेरर फंडिंग (Terror Funding) और मनी लॉन्ड्रिंग (Money Laundering) के मामलों पर नजर रखने वाली अंतरराष्ट्रीय संस्था फायनेंसियल एक्शन टास्क फोर्स यानी FATF पाकिस्तान (Pakistan) को डार्क ग्रे लिस्ट (dark grey list) में रख सकती है. जानिए अगर ऐसा हुआ तो पाकिस्तान का क्या हाल होगा..

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  • Last Updated: October 15, 2019, 12:18 PM IST
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पाकिस्तान (Pakistan) अगर टेरर फंडिंग (Terror Funding) और मनी लॉन्ड्रिंग (Money Laundering) रोकने में नाकाम रहता है, तो उसे कड़े आर्थिक प्रतिबंधों का सामना करना पड़ सकता है. आर्थिक मोर्चे पर पाकिस्तान को करारा झटका लगा है. अंतरराष्ट्रीय स्तर पर टेरर फंडिंग और मनी लॉन्ड्रिंग के मामलों को रोकने वाली संस्था फाइनेंसियल एक्शन टास्क फोर्स यानी FATF की रिव्यू मीटिंग में पाकिस्तान को कड़ी चेतावनी दी गई है.

पाकिस्तान FATF की डार्क ग्रे लिस्ट में जा सकता है. वो पहले से ही ग्रे लिस्ट में है. FATF की डार्क ग्रे लिस्ट में जाने का मतलब है कि अगर पाकिस्तान टेरर फंडिंग और मनी लॉन्ड्रिंग को नहीं रोकता है तो वो ब्लैक लिस्ट में जा सकता है.

कैसे काम करता है FATF?
FATF एक स्वतंत्र इंटर गवर्नमेंट बॉडी है. इसका काम ग्लोबल फायनेंसियल सिस्टम की नीतियों की रक्षा करना और इसे बढ़ावा देना है. ताकि फायनेंसियल सिस्टम का इस्तेमाल आतंकी और एंटी सोशल एलिमेंट नहीं कर पाएं.

FATF ग्लोबल फायनेंसियल सिस्टम को सही रखने के लिए नीतियां बना सकता है लेकिन वो किसी देश को अपनी रेटिंग सुधारने के लिए सलाह नहीं दे सकता. रेटिंग सही रखने की दिशा में काम उन देशों को ही करना है. FATF अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पॉलिसी बनाने वाली संस्था है. इसे कानून के लागू करने, जांच करने या आरोपित करने का अधिकार नहीं है.

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पाकिस्तान को पहली बार 2012 में ग्रे लिस्ट में डाला गया था


कैसे हुआ FATF का गठन?
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फायनेंसियल टास्क फोर्स का गठन जी-7 (G-7) देशों ने पेरिस समिट में जुलाई 1989 में किया था. FATF का मकसद मनी लॉन्ड्रिंग के मामलों को रोकना और उसपर निगरानी रखना था. अक्टूबर 2001 में FATF ने अपने कार्यक्षेत्र का विस्तार किया. इसमें मनी लॉन्ड्रिंग के अलावा टेरर फंडिंग और ह्यूमन ट्रैफिकिंग को रोकना और ऐसे मामलों पर नजर रखना शामिल किया गया.

FATF के पास कितने तरह के लिस्ट

FATF के पास मुख्य तौर पर दो लिस्ट होते हैं- ब्लैक लिस्ट और ग्रे लिस्ट. ब्लैक लिस्ट में उन देशों को डाला जाता है, जहां आतंकी गतिविधियों में पैसे का इस्तेमाल हो रहा है या फिर उन देशों में मनी लॉन्ड्रिंग के मामले आ रहे हों. अगर कोई देश इन गतविधियों को रोकने की बजाय बढ़ावा दे रहा हो तो FATF उन्हें ब्लैक लिस्ट में डाल सकता है.

FATF साल 2000 से ब्लैक और ग्रे लिस्ट की जानकारी पूरी दुनिया को दे रहा है. ब्लैक लिस्ट में होने का मतलब है कि वो देश मनी लॉन्ड्रिंग और टेरर फंडिंग से लड़ने में दुनिया के देशों के साथ सहयोग नहीं कर रहा है. FATF वक्त-वक्त पर ब्लैक लिस्ट को अपडेट करता रहता है.

ग्रे लिस्ट में कौन से देश डाले जाते हैं?

ग्रे लिस्ट में उन देशों को डाला जाता है, जो मनी लॉन्ड्रिंग और टेरर फंडिंग के लिए सेफ हेवन तो नहीं माने जाते लेकिन वहां ऐसी गतिवधियों के होने की जानकारी मिलती रहती है. ग्रे लिस्ट में डाले गए देशों के ब्लैक लिस्ट होने का खतरा बना रहता है.

एक तरह से उन्हें एक चेतावनी दी जाती है ताकि वो टेरर फंडिंग और मनी लॉन्ड्रिंग के मामलों पर रोकथाम लगा सकें. ये फुटबॉल मैच में खिलाड़ी को यलो कार्ड दिखाने जैसा है. इसका मतलब है कि ग्रे लिस्ट में गए देशों को मनी लॉन्ड्रिंग और टेरर फंडिंग के मामलों को रोकना होगा.

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पाकिस्तान टेरर फंडिंग और मनी लॉन्ड्रिंग के मामलों से निपटने में नाकाम रहा है


डार्क ग्रे लिस्ट का मतलब क्या है?

डार्क ग्रे लिस्ट, ग्रे लिस्ट के बाद का खतरनाक स्तर है. ये ग्रे लिस्ट के देशों को दी गई एक और चेतावनी होती है. इसका मतलब है कि डार्क ग्रे लिस्ट में गए देश अपने यहां टेरर फंडिंग और मनी लॉन्ड्रिंग के मामलो को गंभीरता से नहीं ले रहे हैं और उसे रोकने में सहयोग नहीं कर रहे हैं. ऐसे देशों के ब्लैक लिस्ट होने का खतरा सबसे ज्यादा होता है.

ग्रे लिस्ट और डार्क ग्रे लिस्ट में जाने पर क्या होता है?

ग्रे लिस्ट और डार्क ग्रे लिस्ट में जाने का मतलब होता है अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कई तरह के आर्थिक प्रतिबंधों का सामना करना. इस लिस्ट में गए देशों को अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष, वर्ल्ड बैंक और एडीबी जैसे अंतरराष्ट्रीय संगठनों से प्रतिबंध का सामना करना पड़ता है.

इस लिस्ट में गए देशों को आईएमएफ, वर्ल्ड बैंक और एडीबी जैसे इंटरनेशनल इंस्टीट्यूशन से लोन मिलना मुश्किल हो जाता है. ऐसे देशों के इंटरनेशनल ट्रेड पर बहुत बुरा असर पड़ता है. ऐसे देशों को अंतरराष्ट्रीय विरोध का सामना करना पड़ता है.

डार्क ग्रे लिस्ट में आने पर पाकिस्तान के साथ क्या होगा?

पाकिस्तान को पहली बार 2012 में ग्रे लिस्ट में डाला गया था. तबसे लेकर 2015 तक ये इसी लिस्ट में रहा. 29 जून 2018 को पाकिस्तान को दूसरी बार ग्रे लिस्ट में डाला गया. इसकी प्रक्रिया फरवरी 2018 में ही शुरू हुई थी. उसके बाद से पाकिस्तान ग्रे लिस्ट में है.

भारत, अमेरिका और यूके चाहते हैं कि पाकिस्तान को ब्लैक लिस्ट में डाला जाए. इन देशों की शिकायत है कि पाकिस्तान लगातार टेरर फंडिंग और मनी लॉन्ड्रिंग के मामलों की अनदेखी कर रहा है. हालांकि इसके पहले चीन और तुर्की जैसे देश पाकिस्तान को ब्लैक लिस्ट में डालने का विरोध करते रहे हैं.

पाकिस्तान को कहा गया था कि वो दुनिया के सामने प्लान लेकर आएं कि वो अपनी रेटिंग सुधारने के लिए क्या कर रहे हैं. लेकिन पाकिस्तान ऐसा करने में नाकाम रहा है. उसके डार्क ग्रे लिस्ट में जाने का खतरा बढ़ गया है. अगर ऐसा होता है तो पाकिस्तान की आर्थिक हालत और खस्ता होगी.

उसे आर्थिक प्रतिबंधों का सामना करना पड़ेगा. दुनिया के देशों से उसे कर्ज मिलना मुश्किल हो जाएगा. आईएमएफ और वर्ल्ड बैंक जैसे अंतरराष्ट्रीय संगठन उसे कर्ज देना बंद कर देंगे. अब पाकिस्तान की इमरान सरकार को टेरर फंडिंग और मनी लॉन्ड्रिंग जैसे मामलों से निपटने में ईमानदार कोशिश दिखानी होगी. अगर पाकिस्तान ऐसा नहीं करता है तो उसे बर्बाद होने से कोई नहीं रोक सकता.

ब्लैक लिस्ट में कौन-कौन से देश?

FATF कई देशों को ब्लैक लिस्ट में रख चुका है. इन देशों के साथ दुनिया के बाकी देश आर्थिक सहयोग नहीं रखते हैं. नॉर्थ कोरिया को FATF ने ब्लैक लिस्ट में रखा हुआ है. 2015 से ईरान को भी ब्लैक लिस्ट में रखा गया है. क्यूबा को ब्लैक लिस्ट में रखा गया है. उसे अमेरिकी प्रतिबंधों का सामना करना पड़ा है. हालांकि हाल के वर्षों में उसने दुनिया के कई देशों से आर्थिक संबंध बनाए हैं.

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First published: October 15, 2019, 11:44 AM IST
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