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क्या है FATF, जिसने पस्त की हुई है पाकिस्तान की हालत

एफएटीएफ ने अगर पाकिस्तान को ब्लैकलिस्ट घोषित कर दिया तो आर्थिक संकट से पहले ही जूझ रहे देश को बहुत बड़ा झटका लगेगा.

FATF ने फौरी तौर पर कुछ समय के लिए पाकिस्तान को राहत दे दी है. आतंक पर पर्याप्त कार्रवाई न करने की वजह से पाकिस्तान पर ब्लैकलिस्ट होने का खतरा लगातार मंडरा रहा है.

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    फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (FATF) ने कोरोना वायरस महामारी को देखते हुए पाकिस्‍तान को चार महीने की राहत दे दी है. पहले से एफएटीएफ की ग्रे लिस्‍ट में चल रहे पाकिस्‍तान के ब्‍लैक लिस्‍ट होने पर फैसला जून में होना था. इसी बैठक में यह तय होगा कि क्‍या पाकिस्‍तान को ग्रे लिस्‍ट से हटाया जाए या उसे ब्‍लैक लिस्‍ट किया जाए. अब यह बैठक अक्टूबर में होने का अनुमान है. फरवरी में एफएटीएप ने कहा था कि पाकिस्तान के लिए हर डेडलाइन खत्म हो चुकी है और उसने मोटे तौर पर 27 में से केवल 14 को पूरा किया है. एफएटीएफ ने पाकिस्तान को चेतावनी दी थी कि यदि इसके एक्शन प्लान को पूरी तरह लागू नहीं किया गया तो इसे ब्लैक लिस्ट में डाला जा सकता है.

    चीन की मदद
    आतंकवाद फैलाने वाले पाकिस्तान को चीन पहले भी कई चीजों में मदद कर चुका है. अब एक बार फिर चीन ने पाकिस्तान की मदद करते हुए ये पहल की है. फाइनैंशल एक्शन टास्क फोर्स (एफएटीएफ) की ओर से दिए गए टारगेट को पूरा करने के लिए पाकिस्तान को और समय मिल गया है. क्योंकि कोरोना वायरस संकट की वजह से मनी लॉन्ड्रिंग और आतंकवादी संगठनों की फंडिंग की निगरानी संस्था ने अपनी सभी गतिविधियों को टाल दिया है. हालांकि, पेरिस बेस्ड संगठन ने बयान में कहा है कि मनी लॉन्ड्रिंग और टेरर फाइनेंसिंग को रोकने के लिए इसके प्रयासों में कोई कमी नहीं आएगी और अवैध वित्त पोषण से निपटने के उपायों पर कोविड-19 संकट के प्रभाव की सक्रिय रूप से निगरानी करेगा.



    क्या है FATF
    एफएटीएफ एक अंतरराष्ट्रीय संस्था है, जो मनी लॉन्ड्रिंग (Money Laundering) और टेरर फंडिंग जैसे वित्तीय मामलों में दखल देते हुए तमाम देशों के लिए गाइडलाइन तय करती है और यह तय करती है कि वित्तीय अपराधों (Financial Crimes) को बढ़ावा देने वाले देशों पर लगाम कसी जा सके. एफएटीएफ के ग्रे और ब्लैक लिस्ट का मतलब क्या होता है? और ये भी जानें कि अगर पाकिस्तान को ब्लैकलिस्ट कर दिया गया, तो क्या अंजाम होंगे.

    ब्लैक लिस्ट का क्या मतलब है?
    एफएटीएफ (Financial Action Task Force) दो लिस्ट में चिंताजनक हालात वाले देशों को शामिल करती है. इनमें से एक ब्लैकलिस्ट है. आतंकवाद (Terrorism) को वित्तीय तौर पर बढ़ावा देने वाले देशों को इस लिस्ट में तब रखा जाता है, जब उनका असहयोगात्मक रवैया जारी रहता है. मनी लॉन्ड्रिंग और टेरर फंडिंग को लगातार काबू न कर पाने के चलते इन देशों को टैक्स चोरी का स्वर्ग (Safe Tax Heavens) भी करार दिया जाता है.

    इस तरह के हालात वाले देशों को ब्लैकलिस्ट करने का सिलसिला साल 2000 से संस्था ने शुरू किया था. ऐसे देशों को पहले चेतावनी दी जाती है और फिर कुछ देशों की एक कमेटी बनाकर निगरानी की जाती है कि ऐसे देश गाइडलाइन्स के मुताबिक गंभीर मामलों को काबू करने के लिए क्या और कैसे कदम उठा रहे हैं.

    ग्रे लिस्ट होती है चेतावनी
    मनी लॉन्ड्रिंग और टेरर फंडिंग के मामलों में टैक्स चोरी का स्वर्ग न होकर ऐसे देश, जो इस स्थिति का शिकार होते लगते हैं, उन्हें इस लिस्ट में रखा जाता है. यह एक तरह से चेतावनी होती है कि समय रहते ये देश काबू करें और वित्तीय गड़बड़ियों को रोकने के कदम उठाएं. अगर ये देश ग्रे लिस्ट में आने के बाद भी सख़्त कदम नहीं उठाते हैं, तो इन पर ब्लैकलिस्ट होने का खतरा बढ़ता है.

    जब किसी देश को एफएटीएफ ग्रे लिस्ट में रखता है तो उसके सामने कुछ चुनौतियां पेश आती हैं. आईएमएफ, वर्ल्ड बैंक और एडीबी जैसी अंतर्राष्ट्रीय संस्थाओं और अन्य देशों से आर्थिक सहयोग, कर्ज़ मिलने में मुश्किल के साथ ही अंतर्राष्ट्रीय व्यापार में कई तरह की अड़चनें और इंटरनेशनल बहिष्कार तक की नौबत का खतरा पैदा होता है, अगर कोई देश ग्रे लिस्ट में आता है.

    देश में बढ़ते कोरोना के मामलों और बदहाली के मद्देनजर इमरान खान आलोचनाओं का निशाना बनाए जा रहे हैं.

    क्या होगा पाकिस्तान ब्लैकलिस्ट हुआ तो?
    विशेषज्ञों की मानें तो एफएटीएफ ने अगर पाकिस्तान को ब्लैकलिस्ट घोषित कर दिया तो आर्थिक संकट से पहले ही जूझ रहे इस देश को बहुत बड़ा झटका लगेगा. विशेषज्ञों का मानना है कि अगर पाक ब्लैकलिस्ट कर दिया गया तो उसे जिस तरह के निवेश की ज़रूरत है, वह लड़खड़ा जाएगी क्योंकि कोई भी वैश्विक बैंक या निवेशक पाकिस्तान के साथ कोई डील करने से पहले सौ बार सोचेगा. एक तरह से पाकिस्तान के सामने इंटरनेशनल बायकॉट के हालात हो जाएंगे.

    टूट जाएगी पाकिस्तान की कमर!
    एफएटीएफ ने अगर ब्लैकलिस्ट करने का फैसला किया तो पाकिस्तान को आईएमएफ यानी इंटरनेशनल मॉनेटरी फंड से जो 6 अरब डॉलर का कर्ज़ मिलने की स्थिति बन रही है, वह भी धराशायी हो सकती है. हालांकि आईएमएफ देश के साथ डील करता रहेगा लेकिन ब्लैकलिस्टिंग के बाद फंड जारी होने की रफ्तार या तो बहुत धीमी पड़ जाएगी या रुक जाएगी.

    गौरतलब है कि पिछले करीब डेढ़ साल से पाकिस्तान बड़े आर्थिक संकट से जूझ रहा है और ऐसे में कर्ज़, अंतरराष्ट्रीय फंडिंग और निवेश में किसी भी तरह की रुकावट आती है तो पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था बुरी तरह चरमरा सकती है.

    2012 में पहली ग्रे लिस्ट में आया था पाक
    पाकिस्तान 2012 में पहली बार एफएटीएफ की ग्रे लिस्ट में शुमार हुआ था और 2015 तक रहा था. इसके बाद 2018 से पाकिस्तान फिर ग्रे लिस्ट में है. लेकिन अगर उसने आतंक के खिलाफ कड़े कदम नहीं उठाए थे तो वो जल्द ही ब्लैक लिस्टेड होगा.

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