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क्या होता है फ्लेक्स इंजन; 6-8 माह में गाड़ियों के लिए क्यों होने जा रहा अनिवार्य?

क्या होता है फ्लेक्स इंजन; 6-8 माह में गाड़ियों के लिए क्यों होने जा रहा अनिवार्य?

क्या है फ्लेक्स इंजन? आखिर भारत में क्या है इसका भविष्य?

क्या है फ्लेक्स इंजन? आखिर भारत में क्या है इसका भविष्य?

What Is Flex Fuel Engine: भारत सरकार देश में गाड़ियों के लिए फ्लेक्स फ्यूल इंजन को अनिवार्य करने जा रही है. ऐसे में जानिए कि आखिर यह इंजन होता क्या है और भारत के लिए यह कितना कारगर है?

Flex Fuel Engine: बीते दिनों केंद्रीय परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने घोषणा की थी कि अगले 6 से 8 महीनों के भीतर भारत सरकार सभी तरह के वाहनों के लिए फ्लेक्स इंजन को अनिवार्य कर सकती है. इसका मतलब है कि सरकार सभी वाहन निर्माता कंपनियों को भविष्य में यूरो-6 मानक के तहत फ्लेक्स इंजन बनाने को कह सकती है. लेकिन अब चर्चा इस बात पर हो रही है कि आखिर ये फ्लेक्स इंजन होता क्या है और इसमें कौन सा ईंधन इस्तेमाल किया जाता है.

क्या होता है फ्लेक्स इंजन
दरअसल, फ्लेक्स अंग्रेजी के Flexible शब्द से बना है. इस शब्द से ही स्पष्ट है फ्लेक्स इंजन का मतलब ऐसा इंजन जो आसानी से किसी दूसरे ईंधन पर चल सकता हो. दुनिया में ब्राजील एक ऐसा देश हैं जहां सबसे ज्यादा फ्लेक्स इंजन आधारित गाड़ियां चल रही हैं. वहां 30 लाख से अधिक वाहन इस फ्यूल पर चल रहे हैं. भारत के संदर्भ में जिस फ्लेक्स इंजन की बात की जा रही है वह पेट्रोल और डीजल के साथ बायो ईंधन इथेनॉल और मेथेनॉल को मिलाकर चलाया जाएगा.

क्या है इथेनॉल और मेथेनॉल
इथेनॉल और मेथेनॉल पूरी तरह से बायो उत्पाद हैं. इसे गन्ना, मक्का और अन्य अपशिष्ट पदार्थों से तैयार किया जाता है. यह पूरी तरह से जैविक ईंधन है. इससे प्रदूषण कम फैलता है. एक तरह से कहें तो फ्लेक्स इंजन टू इन वन सेटिंग है. इसमें आप अपनी गाड़ी को पूरी तरह से पेट्रोल या डीजल या फिर इथेनॉल पर चला सकते हैं.

क्या किफायती है इथेनॉल
अभी बाजार में पेट्रोल और डीजल के भाव काफी अधिक हैं. पेट्रोल 110 रुपये प्रति लीटर के आसपास पहुंच गया है वहीं डीजल 100 रुपये से ऊपर बिक रहा है. जहां तक इथेनॉल की बात है तो भारतीय बाजार में इसकी कीमत अभी 60 से 70 रुपये लीटर के बीच है. ऐसे में फ्लेक्स ईंधन वाली गाड़ियां आपकी जेब पर बोझ हल्का कर सकती हैं.

कम प्रदूषण करता है फ्लेक्स इंजन
इस वक्त दुनिया भर में जलवायु परिवर्तन एक बड़ी समस्या बनी है. ऐसे में जीवाश्म ईंधन के इस्तेमाल को कम से कम करने पर जोर दिया जा रहा है. जीवाश्म ईंधन यानी पेट्रोल-डीजल से काफी अधिक कार्बन का उत्सर्जन होता है. वहीं इथेनॉल से कार्बन का उत्सर्जन काफी कम होता है. इस कारण यह जीवाश्म ईंधन का एक बेहतर विकल्प हो सकता है.

भारत के लिए फायदेमंद
देश में इथेनॉल उत्पादन की काफी संभावना है. देश में मक्के और गन्ने का भरपूर उत्पादन होता है. इसी से इथेनॉल का उत्पादन किया जाता है. इससे सबसे ज्यादा फायदा विदेश मुद्रा यानी अमेरिकी डॉलर की बचत होगी. क्योंकि भारत अपनी जरूरत का करीब 80 फीसदी पेट्रोल-डीजल आयात करता है.

फ्लेक्स इंजन की कमियां
ऐसा नहीं है कि देश में फ्लेक्स इंजन वाले वाहनों के आ जाने के बाद सब समस्या दूर हो जाएगी. इसमें सबसे बड़ी समस्या कच्चे माल की है. इथेनॉल बनाने के लिए गन्ना और मक्के सहित कई अन्य कृषि उत्पादों का इस्तेमाल किया जाता है. इन उत्पादों का इस्तेमाल इथेनॉल बनाने में किए जाने से बाजार में इसकी कमी हो सकती है और उनसे बनने वाले उत्पाद महंगे हो जाएंगे. इससे अर्थव्यवस्था पर बोझ बढ़ सकता है. हालांकि इससे किसानों की आमदनी बढ़ सकती है. उनका जीवन स्तर सुधर सकता है.

इलेक्ट्रिक इंजन बनाम फ्लेक्स इंजन
देश और दुनिया में जीवाश्व ईंधन के बदले इलेक्ट्रिक गाड़ियों को एक विकल्प बताया जा रहा है. इस दिशा में काफी तेजी से काम चल रहा है. ऐसे में सवाल यह भी उठता है कि वाहन निर्माता कंपनियों को फ्लेक्स इंजन पर निवेश करने के लिए दबाव बनाना कितना जायज है. किसी भी नतीजे पर पहुंचने से पहले इस सारे तथ्यों पर विचार करना होगा.

Tags: Engine, Ethanol, Petrol price

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