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Flex Fuel: देश में क्या है इथेनॉल का भविष्य? कहीं जल संकट को न्योता तो नहीं!

Flex Fuel: देश में क्या है इथेनॉल का भविष्य? कहीं जल संकट को न्योता तो नहीं!

भारत में इथेनॉल मुख्य रूप से गन्ने से बनाया जाता है.

भारत में इथेनॉल मुख्य रूप से गन्ने से बनाया जाता है.

What Is Flex Fuel, What Is ethanol, How Much Water Needed to Produce Ethanol, Ethanol Production In India: केंद्रीय सड़क और परिवहन मंत्री नितिन गडकरी देश में फ्लेक्स इंजन को अनिवार्य बनाने की बात कर रहे हैं. लेकिन फ्लेक्स इंजन में इस्तेमाल होने वाले बायो ईंधन इथेनॉल का उत्पादन भारत के लिए कितना कारगर है? इस सवाल का जवाब अभी मिलना बाकी है. विशेषज्ञ इसको लेकर चेतावनी दे रहे हैं. कई का कहना है कि भारत की स्थिति अमेरिका और ब्राजील जैसी नहीं है. हम इथेनॉल के उत्पादन को बेतहाशा बढ़ाकर जल संकट पैदा कर सकते हैं.

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    What Is Flex Fuel? How Much Water Needed to Produce Ethanol? केंद्रीय सड़क और परिवहन मंत्री नितिन गडकरी अगले 6 से 8 माह के भीतर देश में फ्लेक्स फ्यूल इंजन (Flex Fuel Engine) को अनिवार्य करने की बात कर रहे हैं. फ्लेक्स फ्यूल इंजन यानी ऐसा इंजन जो बेहद फ्लेक्सिबल हो, जो दो तरह के फ्यूल से चले. यहां दो तरह के फ्यूल का मतलब पेट्रोल और डीजल नहीं है. बल्कि पेट्रोल और डीजल में मिलाए जाने वाले इथेनॉल से है. पेट्रोल और डीजल में इथेनॉल को मिलाकर इंजन को चलाया जाता है. ऐसे इंजन को फ्लेक्स फ्यूल इंजन कहा जाता है. ये इंजन ईंधन में 85 फीसदी तक इथेनॉल को मिलाकर चलने में सक्षम होते हैं. दुनिया के तमाम देशों में फ्लेक्स इंजन का इस्तेमाल होता है. ब्राजील, अमेरिका और चीन सहित दुनिया के कई देश बड़े पैमाने पर इथेनॉल का उत्पादन करते हैं और वे फ्लेक्स फ्यूल का इस्तेमाल करते हैं. लेकिन क्या यही तर्क भारत के लिए सही है?

    दरअसल, इथेनॉल के उत्पादन में सबसे बड़ी दिक्कत इसमें होने वाली पानी की बर्बादी है. दूसरी तरह भारत में गन्ने की फसल को उगाने में पानी की खूब जरूरत पड़ती है. ऐसे में आइए समझते हैं कि यह कितनी बड़ी चुनौती है और भारत के लिए यह कितना कारगर है.

    इथेनॉल और पानी
    इथेनॉल के प्रमुख उत्पादक देशों ब्राजील और अमेरिका की तुलना में भारत में स्थिति अगल है. भारत में खेती के लिए व्यापक स्तर पर भूजल का इस्तेमाल होता है. हमारी दैनिक जरूरत के लिए भी पानी धरती के सतह के नीचे से निकाला जाता है. दूसरी तरफ अमेरिका और ब्राजील में फसलों की सिंचाई के लिए पानी का इंतजाम नहर और अन्य साधनों से किया जाता है. लेकिन भारत के पास इन दोनों देशों की तुलना में बहुत कम भूजल है.

    संयुक्त राष्ट्र के मुताबिक भारत के पास केवल इतना पानी
    संयुक्त राष्ट्र के फूड एंड एग्रीकल्चर ऑर्गेनाइजेशन के मुताबिक अमेरिका के पास 2818 अरब घन मीटर जबकि ब्राजील के पास 5661 अरब घन मीटर भूजल हर साल इक्कठा होता है जबकि भारत के पास केवल 1447 अरब घन मीटर पानी जमा होता है. ऐसे में अगर भारत में इथेनॉल का उत्पादन जोरशोर से बढ़ाया जाता है तो आने वाले समय में पानी का गंभीर संकट पैदा हो जाएगा. क्योंकि गन्ने के फसल के उत्पादन से लेकर इथेनॉल बनाने वाली इकाइयों तक में बहुत ज्यादा पानी की जरूरत पड़ती है.

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    2025 तक ईंधन में 20 फीसदी इथेनॉल मिलाने का लक्ष्य
    भारत सरकार ने वर्ष 2025 तक पेट्रोल और डीजल में 20 फीसदी तक इथेनॉल मिलाने का लक्ष्य रखा है. इतना ही नहीं केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी जिस फ्लेक्स इंजन की बात कर रहे हैं उसमें 85 फीसदी तक इथेनॉल का इस्तेमाल किया जा सकता है. फिलहाल देश में पेट्रोल में 9 फीसदी तक इथेनॉल मिलाया जाता है. यह लक्ष्य बहुत बड़ा है. इसके लिए भारी मात्रा में इथेनॉल की जरूरत पड़ेगी.

    अमेरिका में मक्के से तो भारत में गन्ने से बनता है इथेनॉल
    अमेरिका में मक्के के स्टार्च से जबकि ब्राजील में गन्ने से इथेनॉल का उत्पादन किया जाता है. भारत में गन्ने से इथेनाॉल का उत्पादन किया जाता है. अमेरिका और ब्राजील दोनों मिलकर दुनिया के कुछ इथेनॉल उत्पादन का 84 फीसदी इथेनॉल पैदा करते हैं. भारत में फिलहाल बहुत कम इथेनॉल का उत्पादन किया जाता है.

    भू-जल संकट की आशंका
    अंग्रेजी अखबार मिंट की एक रिपोर्ट के मुताबिक ब्राजील अपने ईंधन में 45 फीसदी तक इथेनॉल मिलाता है. इतने इथेनॉल के उत्पादन में उसे अपने भू-जल का केवल 0.025 फीसदी पानी का इस्तेमाल करना पड़ता है जबकि भारत के लिए स्थिति बिल्कुल अलग है. अगर भारत ईंधन में केवल 20 फीसदी तक इथेनॉल की मिलावट करता है तो इसे इतने इथेनॉल बनाने के लिए अपने भूजल का 0.70 फीसदी पानी का इस्तेमाल करना पड़ेगा.

    Tags: Bio, Ethanol

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