क्या है ताइवान में 'अनानास की आजादी' मुहिम के मायने, जिसमें China घिर चुका है?

चीन ताइवान को अप्रत्यक्ष तौर पर नुकसान पहुंचाने की कोशिश में है- सांकेतिक फोटो (news18 English)

चीन ताइवान को अप्रत्यक्ष तौर पर नुकसान पहुंचाने की कोशिश में है- सांकेतिक फोटो (news18 English)

ताइवान पर भड़के चीन ने जैसे ही उससे अनानास का आयात (pineapple import ban Taiwan-China) बंद किया, धड़ल्ले से खुद ताइवानी जनता ने अनानास खरीदी शुरू कर दी. चार ही दिनों के भीतर 41 हजार टन से ज्यादा फल खरीद लिया गया.

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ताइवान के अनानास चीनी नीतियों का नया शिकार हैं. ताइवान के दूसरे देशों से बढ़ते संबंधों पर गुस्साए चीन ने पुरानी आदत के मुताबिक ताइवान को आर्थिक झटका देने की ठानी और वहां से आयातित अनानास पर पाबंदी लगा दी. अब तक ताइवानी अनानास का सबसे बड़ी खरीददार चीन रहा था. बैन के बाद उसकी उम्मीद के विपरीत ताइवान ने फ्रीडम पाइनएपल मुहिम चला दी. इसके तहत न केवल स्थानीय लोग, बल्कि विदेशी भी वहां से अनानास ले रहे हैं. इससे हुआ ये कि जितना फल चीन खरीदता था, वो सारा 4 दिन में ही खरीद लिया गया.

बीते कुछ सालों से ताइवान में सालाना लगभग 420,000 टन अनानास की पैदावार हो रही है. इसमें से लगभग 11% फल दुनिया के 16 देशों को बेचा जा रहा है. इसमें में अनानास का सबसे बड़ी खरीददार चीन है, जो कुल आयात का 90 प्रतिशत हिस्सा ले रहा है. साल 2020 में ही चीन ने इस देश से 41,661 टन अनानास खरीदा था, जिसकी लागत 1.5 बिलियन डॉलर रही. इसके बाद जापान, हांगकांग और सिंगापुर भी ताइवानी अनानास खरीदते हैं. यानी ताइवानी अर्थव्यवस्था का बड़ा हिस्सा चीन को अनानास बेचने से आता रहा.

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ताइवान में खेती की उपज अर्थव्यवस्था का बड़ा हिस्सा है- सांकेतिक फोटो (flickr)




अब हुआ ये कि ताइवान के ऑस्ट्रेलिया और कई दूसरे देशों से आर्थिक संबंध बढ़ने लगे. यूं तो चीन को इसपर कोई एतराज नहीं होना था, लेकिन उसे हुआ. इसकी वजह ये है कि चीन ताइवान को अपना ही हिस्सा मानता है और यहां तक कि उसे किसी भी अंतरराष्ट्रीय संस्था से जुड़ने की इजाजत नहीं देता है. यहां तक कि वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन में भी ताइवान अलग देश की तरह हिस्सा नहीं ले सका है. साल 2020 में इसपर काफी विवाद भी हुआ था.
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चूंकि ताइवान और चीन का मामला दो देशों का मामला है, इसलिए चाहकर भी दूसरे देश इसमें दखल नहीं दे पाते. अब चीन से नाराज देश ताइवान को किसी तरह से सपोर्ट करने की कोशिश कर रहे हैं. इसी सिलसिले में ताइवान और ऑस्ट्रेलिया के बीच व्यापारिक संबंधों में सुधार आया. ऑस्ट्रेलियाई सरकार ने ताइवान से अनानास के आयात को मंजूरी दे दी. खुद ताइवान की काउंसिल ऑफ एग्रीकल्चर (COA) ने इस बात की आधिकारिक घोषणा की थी. दोनों देशों के बीच एक-दो नहीं, बल्कि पांच सालों का एग्रीमेंट हुआ.

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इसपर भड़का हुआ चीन सीधे कुछ न कर पाने के कारण ताइवान को अप्रत्यक्ष तौर पर नुकसान पहुंचाने की कोशिश में है. साल 2020 में ही एकाएक चीन ताइवान के लिए सख्त हो गया. उसने शिकायत की थी कि ताइवान से आए फल की खेप में कीड़े लगे अनानास भी थे. चीन ने तभी संकेत दिया था कि वो इस देश से अनानास की खरीददारी बंद कर सकता है. हुआ भी यही. मार्च महीने की शुरुआत से ही चीन ने अपने बैन की आधिकारिक घोषणा कर दी.

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चीनी बैन के बाद उसकी उम्मीद के विपरीत ताइवान ने फ्रीडम पाइनएपल मुहिम चला दी- सांकेतिक फोटो (pxhere)


इसपर ताइवान ने चीन के अनानास में कीट की बात को गलत कहते हुए इसे अपने खिलाफ दुष्प्रचार बताया. एक ट्वीट में ताइवान के विदेश मंत्रालय ने कहा था कि उसकी तरफ से भेजे जा रहे 100 प्रतिशत फल सख्त निगरानी से गुजरते हैं और बिल्कुल ठीक हैं. ताइवान में चूंकि बड़ूी संख्या में किसान अनानास की पैदावार में लगे हुए हैं, लिहाजा उन्हें नुकसान से बचाने के लिए सरकार ने फ्रीडम पाइनएपल मुहिम शुरू की. इसमें अपील की गई कि लोग ज्यादा से ज्यादा अनानास खरीदें ताकि किसानों को नुकसान से बचाया जा सके.

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कृषि विभाग को 20 हजार टन अनानास की खरीदी की उम्मीद थी. लेकिन इस उम्मीद से कहीं ज्यादा बिक्री हुई. 4 दिनों के भीतर ही 41 हजार टन से अधिक अनानास खरीद लिया गया. अब इसमें अमेरिका, कनाडा और जापान भी ताइवान का साथ दे रहे हैं. ताइवान स्थित इन देशों के दूतावास अपने स्टाफ के साथ अनानास की तस्वीरें ट्वीट कर रहे हैं और फ्रीडम पाइनएपल मुहिम को सपोर्ट कर रहे हैं.
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