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क्या Twitter से बेदखलों का अड्डा है गैब? ट्रंप की वजह से चर्चित सोशल नेटवर्क को जानें

सोशल नेटवर्क गैब का पहचान लोगो.

सोशल नेटवर्क गैब का पहचान लोगो.

सुर्खियां हैं कि पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति (US President) डोनाल्ड ट्रंप कुछ हफ्तों की खामोशी के बाद विवादास्पद सोशल मीडिया नेटवर्क (Controversial Social Media) गैब पर सक्रिय हुए. लेकिन क्या है सच? ये भी जानें कि क्यों इस सोशल प्लेटफॉर्म पर उंगलियां उठती रही हैं.

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    कट्टरपंथियों, रूढ़िवादियों (Extremists & Conservatives) और दक्षिणपंथियों के लिए पनाह के तौर पर जिस सोशल मीडिया नेटवर्क की चर्चा है, वो है गैब. 6 जनवरी को अमेरिका के कैपिटल हिल (Capitol Hill Violence) में हिंसा के बाद से ‘Parler’ नेटवर्क को इंटरनेट की दुनिया में बड़ी आलोचना झेलनी पड़ी तो गैब नया विकल्प बनकर उभरा. हिंसा के बाद के दिनों में गैब ने ट्वीट करके दावा किया एक हफ्ते में उसने 23 लाख नए यूज़र पाए. जनवरी के आखिर तक गैब के पास कुल करीब 34 लाख यूज़र (Gab  Users) होने के आंकड़े थे.

    अब यह प्लेटफॉर्म इसलिए चर्चा में है क्योंकि दावे किए जा रहे हैं कि ट्विटर और फेसबुक से धकेले गए पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप गैब पर सक्रिय हो गए हैं और उन्होंने यहां अपने पुराने अकाउंट को एक्टिवेट किया, लेकिन इन दावों की प्रामाणिकता को लेकर सवाल खड़े हैं. आपको आगे बताएंगे कि ये दावे सच हैं कि खोखले, लेकिन ट्रंप के कारण सुर्खियों के आ गए इस ऐप के बारे में कई दिलचस्प बातें जानिए.

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    न्यूज़18 क्रिएटिव

    क्या है गैब?
    ‘सबके लिए बोलने की आज़ादी’ के मिशन का प्रचार करते हुए 2016 में बना गैब वास्तव में ट्विटर और फेसबुक का कॉकटेल दिखता है. यहां यूज़र अपनी पोस्ट को ‘गैब्स’ कहते हैं और 300 शब्दों तक का संदेश पोस्ट कर सकते हैं. यहां यूज़रों के कंटेंट को लेकर कोई सेंसर या निगरानी जैसी स्थिति नहीं है.

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    गैब अपने वेब ब्राउज़र ‘डिसेंटर’ की सुविधा देता है और इसका अपना कमेंटिंग सिस्टम है. इस प्लेटफॉर्म की फिलॉसफी है कि ‘हमें लगता है कि ऑनलाइन कंटेंट का भविष्य यूज़र के ही हाथ में है और ओपन है.’

    क्यों विवादों में रहा है गैब?
    पिछले कुछ समय में सोशल मीडिया के बड़े और लीडिंग प्लेटफॉर्म्स कंटेंट को लेकर अपनी पॉलिसी रखते हैं या उन पर इस तरह का दबाव है, वहीं गैब ऐसी पॉलिसी न रखने के कारण आलोचना का शिकार रहा है. इस प्लेटफॉर्म पर धड़ल्ले से नफरत, नस्लभेदी, हिंसक और भ्रामक सूचनाओं व कमेंट्स होते हैं. कहा जाता है कि कैपिटल हिल हिंसा के लिए यहां काफी भड़काने वाले पोस्ट किए गए थे.

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    विवादों में रहने की वजह यह भी है कि यह प्लेटफॉर्म उन लोगों का अड्डा बन गया, जिन्हें ट्विटर या अन्य प्लेटफॉर्मों से निकाला गया. रिचर्ड स्पेंसर और एलेक्स जोन्स जैसे रूढ़िवादियों ने मुख्यधारा के सोशल मीडिया से बैन किए जाने के बाद गैब को अपना ठिकाना बनाया. प्रेसिडेंट ट्रंप को लेकर भी इसी तरह की चर्चाएं ज़ोरों पर चल रही हैं.

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    खबरों में कहा जा रहा है कि ट्रंप ने गैब पोस्ट से सोशल मीडिया पर वापसी के संकेत दिए.

    तो क्या गैब पर सब कुछ बेलगाम है?
    एक अपवाद ज़रूर है : गैब दावा करता है कि ‘गैर कानूनी गतिविधियों, हिंसा की धमकियों, पॉर्नोग्राफी, बच्चों के शोषण संबंधी कंटेंट’ पर नज़र रखता है और इस तरह के आपत्तिजनक कंटेंट को हटाता है.

    गैब को क्यों किया गया बैन?
    साल 2018 में पहली बार गैब तब निशाने पर आया था, जब पिट्सबर्ग में एक बंदूकधारी ने यहूदियों को धमकाने के लिए इस प्लेटफॉर्म का सहारा लिया. तब गैब ने उस यूज़र को अकाउंट सस्पेंड कर एफबीआई को सूचित करने की बात कही थी. बड़ी टेक कंपनियों ने गैब को बंद कराने की तमाम कोशिशें कीं और वो कुछ हद तक सफल भी रहीं, लेकिन अलग नाम यानी Epik डोमेन से यह प्लेटफॉर्म जारी रहा.

    कौन चलाता है गैब?
    खुद को ‘कंज़र्वेटिव रिपब्लिकन ईसाई’ कहने वाले उद्यमी एंड्रयू तोर्बा गैब के संस्थापक हैं, जिन्हें ट्रंप का सीधा सपोर्टर माना जाता है. जब ऐसा कहा जाने लगा था कि फेसबुक कंज़र्वेटिव लोगों के खिलाफ एक धारणा रखता है, तब सिलिकन वैली में काम करने वाले तोर्बा ने उन लोगों के लिए एक विकल्प के तौर पर यह प्लेटफॉर्म बनाया.

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    तोर्बा ने शिकायती लहजे में कहा था कि सभी बड़े सोशल नेटवर्क प्रोग्रेसिव वर्करों या लीडरों द्वारा संचालित या फिर नियंत्रित हैं. 2016 में उन्होंने यह भी कहा था कि गैब सिर्फ कंज़र्वेटिवों का नेटवर्क नहीं है लेकिन यह ऐसे लीडरों का प्लेटफॉर्म है, जहां सभी सेंसर के डर के बगैर अपने मन की बात कर सकें.

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    सोशल मीडिया और विदेशी मीडिया में ट्रंप के गैब अकाउंट को लेकर चर्चा है.

    क्या ट्रंप गैब पर पहुंचे?
    इनसाइड समेत बड़े पश्चिमी मीडिया हाउसों ने इस तरह की रिपोर्ट दी कि सोशल मीडिया से जूझ रहे ट्रंप ने आखिरकार खामोशी तोड़ी और गैब पर एक पोस्ट करते हुए अपने समर्थकों से बातचीत की. यह भी बताया गया कि ट्रंप ने अपने खिलाफ चल रहे म​हाभियोग को लेकर गैब पर पोस्ट किया. लेकिन गैब ने इन रिपोर्टों को खारिज किया.

    गैब के सीईओ तोर्बा ने आधिकारिक बयान जारी करते हुए कहा कि ये खबरें गलत हैं और ट्रंप उनके प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल नहीं कर रहे. बिज़नेस इनसाइडर ने रिपोर्ट में बताया कि तोर्बा ने साफ कहा कि गैब पर ट्रंप के जिस अकाउंट की चर्चा है, वो न तो है, न कभी रहा है.

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