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    Eco-Friendly Diwali : क्या होते हैं ग्रीन पटाखे, कितनी तरह के और कैसे कम करते हैं प्रदूषण

    उत्तर भारत में गहराते वायु प्रदूषण (Air Pollution) के बीच इस बार दीवाली (Diwali) पर ग्रीन पटाखों (Green Crackers) का ही इस्तेमाल करें. वैसे तो ये इस बार बाजार में हर अधिकृत दुकान पर मिल जाएंगे. हम आपको बताते हैं कि क्या होते हैं ग्रीन पटाखे और इनसे कैसे कम होता है वायु प्रदूषण
    उत्तर भारत में गहराते वायु प्रदूषण (Air Pollution) के बीच इस बार दीवाली (Diwali) पर ग्रीन पटाखों (Green Crackers) का ही इस्तेमाल करें. वैसे तो ये इस बार बाजार में हर अधिकृत दुकान पर मिल जाएंगे. हम आपको बताते हैं कि क्या होते हैं ग्रीन पटाखे और इनसे कैसे कम होता है वायु प्रदूषण

    उत्तर भारत में गहराते वायु प्रदूषण (Air Pollution) के बीच इस बार दीवाली (Diwali) पर ग्रीन पटाखों (Green Crackers) का ही इस्तेमाल करें. वैसे तो ये इस बार बाजार में हर अधिकृत दुकान पर मिल जाएंगे. हम आपको बताते हैं कि क्या होते हैं ग्रीन पटाखे और इनसे कैसे कम होता है वायु प्रदूषण

    • News18Hindi
    • Last Updated: November 3, 2020, 3:14 PM IST
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    दो साल पहले सुप्रीम कोर्ट ने दीवाली से ठीक पहले ग्रीन पटाखों के इस्तेमाल का निर्देश दिया था. जैसा कि नाम से ही जाहिर है कि ग्रीन पटाखे कम प्रदूषण करते हैं, जो इस समय दिल्ली-एनसीआर और उत्तर भारत की विषैली हवा के अनुसार बिल्कुल फिट हैं. वैसे अब बाजार में आमतौर पर आप पटाखे खरीदने निकलेंगे ता आधिकारिक लाइसेंस वाली दुकानों पर आपको ग्रीन पटाखे ही मिलेंगे.

    दो साल पहले तक जब दीवाली पर पटाखे जलाए जाते थे. आतिशाबाजियां होती थीं तो प्रदूषण का स्तर यकायक बहुत बढ़ जाता था. इसमें सांस लेना औऱ भी ज्यादा मुश्किल हो जाता था.

    इस बीच ऐसी पटाखों और आतिशबाजियों की जरूरत महसूस की जाने लगी, जो कम प्रदूषण करते हों और कम हानिकारक हों. ऐसे में भारतीय संस्था राष्ट्रीय पर्यावरण अभियांत्रिकी अनुसंधान संस्थान (नीरी) ने ग्रीन पटाखों पर काम शुरू किया. जल्द ही उसके साइंटिस्ट ने ऐसे ग्रीन पटाखों को बनाने में सफलता पा ली. दुनियाभर में इन्हें प्रदूषण से निपटने के एक बेहतर तरीके की तरह देखा जा रहा है.




    कैसे होते हैं ये पटाखे
    औद्योगिक अनुसंघान परिषद (सीएसआईआर) से जुड़ी संस्था नीरी द्वारा तैयार पटाखे पारंपरिक पटाखों सरीखे ही होते हैं. इनके जलने से कम प्रदूषण होता है. इससे दीवाली का मज़ा कम नहीं होता, क्योंकि ये ग्रीन पटाखे दिखने, जलाने और आवाज़ में सामान्य पटाखों की तरह ही होते हैं.

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    इनसे कितना प्रदूषण कम होता है
    आमतौर पर ग्रीन पटाखों से 50 फीसदी तक वायु प्रदूषण कम हो जाता है. ये हवा में बहुत विषैली गैस रिलीज नहीं करते.



    ये कितनी तरह के होते हैं
    नीरी के मुताबिक फिलहाल तीन तरह के ग्रीन पटाखे बनाए जा रहे हैं.
    1. सेफ वाटर रिलीजर - पहले वाले जलने के साथ पानी पैदा करते हैं जिससे सल्फ़र और नाइट्रोजन जैसी हानिकारक गैसें इन्हीं में घुल जाती हैं. इन्हें सेफ़ वाटर रिलीज़र भी कहा जाता है.

    2. स्टार क्रैकर - दूसरी तरह के स्टार क्रैकर के नाम से जाने जाते हैं. ये सामान्य से कम सल्फ़र और नाइट्रोजन पैदा करते हैं. इनमें एल्युमिनियम का इस्तेमाल भी कम से कम किया जाता है.



    3. अरोमा क्रैकर्स - तीसरी तरह के अरोमा क्रैकर्स हैं जो कम प्रदूषण के साथ-साथ खुशबू भी पैदा करते हैं.

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    कहां मिलेंगे ग्रीन पटाखे
    अब ग्रीन पटाखे उन सभी आतिशबाजी की दुकानों पर उपलब्ध होंगे, जिन्हें इसका लाइसेंस मिला हुआ है. वैसे बाजार में अब पुरानी तरह के प्रदूषण फैलाने वाली पटाखे बेचने पर मनाही है. ज्यादातर क्रैकर्स निर्माता कंपनियां अब ऐसे ही पटाखों का उत्पादन कर रही हैं.



    तैयार है शिवकाशी भी
    आमतौर पर बाजार में जो पटाखे और आतिशबाजी बिकती हैं, उनका निर्माण शिवकाशी में बड़े पैमाने पर होता है. रिपोर्ट्स के अनुसार, अब शिवकाशी में ज्यादातर ग्रीन पटाखे ही तैयार किए जा रहे हैं, जो इको - फ्रेंडली होंगे.
    इनसे नुकसानदायक रासायनिक उत्सर्जन भी कम होगा. आवाज भी कम होगी. ये पूरी तरह सुप्रीम कोर्ट के दिशानिर्देश के तहत ही बनाए जा रहे हैं. शिवकाशी में 1000 से ज्यादा मेनुफैक्चरिंग इकाइयां हैं, जो सालभर बड़े पैमाने पर ग्रीन पटाखों का निर्माण करती हैं. इनका कारोबार हजारों करोड़ का होता है.
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