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क्या होती है हेटस्पीच, भारत में क्या हैं इसके खिलाफ कानून

Bhavesh Saxena | News18Hindi
Updated: February 27, 2020, 4:06 PM IST
क्या होती है हेटस्पीच, भारत में क्या हैं इसके खिलाफ कानून
इन दिनों हेटस्पीच शब्द खासी चर्चाओं में है. दिल्ली दंगों के संदर्भ में इसका बार-बार इस्तेमाल हो रहा है. जानिए कि भारतीय संविधान के आर्टिकल 19 सहित आईपीसी और सीआरपीसी में हेट स्पीच को लेकर क्या व्यवस्थाएं हैं.

इन दिनों हेटस्पीच शब्द खासी चर्चाओं में है. दिल्ली दंगों के संदर्भ में इसका बार-बार इस्तेमाल हो रहा है. जानिए कि भारतीय संविधान के आर्टिकल 19 सहित आईपीसी और सीआरपीसी में हेट स्पीच को लेकर क्या व्यवस्थाएं हैं.

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  • Last Updated: February 27, 2020, 4:06 PM IST
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दिल्ली के उत्तर पूर्वी इलाके में इस हफ्ते भड़की हिंसा के कारणों में शुमार हेट स्पीच को लेकर अदालतें और कानून के जानकार सख़्त रुख दिखा रहे हैं. कुछ नेताओं द्वारा दिए गए उन भाषणों का ज़िक्र हो रहा है, जिन्हें उकसाऊ या भड़काऊ करार दिया जा रहा है. ऐसे में हेट स्पीच और भारत में इसके लिए कानूनी व्यवस्था जानना चाहिए.

पहला सवाल यह है कि आखिर हेट स्पीच होती क्या है. खबरों में मौके बेमौके आप यह शब्द पढ़ते हैं लेकिन क्या आप इसका अर्थ जानते हैं? ऑक्सफोर्ड डिक्शनरी में हेट स्पीच का मतलब इस प्रकार दिया गया है :

''नस्ल, धर्म, लिंग जैसे किसी भेदभाव के चलते किसी समूह विशेष के खिलाफ पूर्वाग्रह व्यक्त करने वाला कोई भी निंदात्मक या आक्रामक बयान.''

क्या है कानूनी व्याख्या?



हेट स्पीच को लेकर अलग से कोई कानूनी व्याख्या नहीं है बल्कि अभिव्यक्ति की आज़ादी के अधिकार पर कुछ लगाम कसते हुए एक तरह से हेट स्पीच को परिभाषित किया गया है. संविधान के आर्टिकल 19 के मुताबिक अभिव्यक्ति की आज़ादी के अधिकार पर 8 किस्म के प्रतिबंध हैं.

राज्य की सुरक्षा, विदेशी राज्यों के साथ दोस्ताना संबंध, लोक व्यवस्था, शालीनता या नैतिकता, कोर्ट की अवहेलना, मानहानि, हिंसा भड़काऊ, भारत की अखंडता व संप्रभुता... इनमें से किसी भी बिंदु के तहत अगर कोई बयान या लेख आपत्तिजनक पाया जाता है तो उसके खिलाफ सुनवाई और कार्रवाई के प्रावधान हैं.

अगर कोई बयान या लेख आपत्तिजनक पाया जाता है तो उसके खिलाफ सुनवाई और कार्रवाई के प्रावधान हैं.


क्या है सज़ा की व्यवस्था?
इंडिया कानून पोर्टल पर दिए विवरण के हिसाब से भारतीय दंड विधान यानी आईपीसी के सेक्शन 153(A) के तहत प्रावधान है कि अगर धर्म, नस्ल, जन्मस्थान, रिहाइश, भाषा, जाति या समुदाय या अन्य ऐसे किसी आधार पर भेदभावपूर्ण रवैये के चलते बोला या लिखा गया कोई भी शब्द अगर किसी भी समूह विशेष के खिलाफ नफरत, रंजिश की भावनाएं भड़काता है या सौहार्द्र का माहौल बिगाड़ता है, तो ऐसे मामले में दोषी को तीन साल तक की कैद की सज़ा या जुर्माना या दोनों हो सकते हैं.

सेक्शन 295(A) में भी तीन साल की ही सज़ा
आईपीसी के सेक्शन 295(A) के तहत भी तीन साल तक की कैद या जुर्माना या दोनों की सज़ा का प्रावधान है. यह सेक्शन पिछले से इसलिए अलग है क्योंकि इसमें देश के किसी भी समुदाय की केवल धार्मिक भावनाएं आहत करने को लेकर व्यवस्था है. धार्मिक भावनाओं के अलावा किसी और किस्म के भेदभाव का ज़िक्र इस सेक्शन में नहीं है.

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दिल्ली में दंगों के दौरान सियासी पार्टी के नेताओं द्वारा दी गई हेट स्पीच का जिक्र हुआ है.


सीआरपीसी के सेक्शन 95 को भी जानें
क्रिमिनल प्रोसीजर कोड का सेक्शन 95 राज्य को अधिकार देता है कि वह किसी प्रकाशन विशेष को प्रतिबंधित कर सके. इस सेक्शन के मुताबिक सेक्शन 124ए, सेक्शन 153ए या बी, सेक्शन 292 या 293 और सेक्शन 295ए के तहत अगर कोई प्रकाशन (अखबार, किताब या कोई भी दृश्यात्मक प्रकाशन) आपत्तिजनक करार दिया जाता है तो केंद्र या भारत का कोई राज्य उसे प्रतिबंधित कर सकता है.

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First published: February 27, 2020, 4:06 PM IST
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