Explained: वो रहस्यमयी बीमारी, जिसमें US के राजदूतों को सुनाई देने लगीं अजीबोगरीब आवाजें

क्यूबा की राजधानी हवाना में तैनात राजदूतों को अजीबोगरीब आवाजें सुनाई पड़ने लगी थीं- सांकेतिक फोटो (pxhere)

क्यूबा में तैनात अमेरिकी राजदूतों (US diplomats) ने अजीब आवाजें सुनने के बाद बीमार होने की शिकायत की. कई अफसरों की सुनने-समझने की क्षमता तक चली गई. इस रहस्यमयी बीमारी को हवाना सिंड्रोम (Havana syndrome) कहा गया.

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    लगभग चार साल बाद उस रहस्यमयी बीमारी का जिक्र दोबारा हो रहा है, जिसमें क्यूबा की राजधानी हवाना में तैनात राजदूतों को अजीबोगरीब आवाजें सुनाई पड़ने लगी थीं. खास बात ये थी कि बीमारी केवल राजदूतों और उनके परिजनों पर असर डाल रही थी. बीमारी को हवाना सिंड्रोम कहा गया. अब इसपर एक नई रिपोर्ट आई है, जो कई राज खोलने की कोशिश कर रही है.

    साल 2016 की बात है, जब हवाना में रह रहे अमेरिकी राजदूतों ने अजीब आवाज सुनने की शिकायत की. इसके बाद वे तेजी से बीमार होने लगे. राजूदतों के अलावा अमेरिकी खुफिया विभाग के क्यूबा, चीन और दूसरे कई देशों में रह रहे लोग भी अजीबोगरीब बीमारी की गिरफ्त में आने लगे.

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    इसमें वे कोई ऐसी आवाज सुनते थे, जो कभी नहीं सुनी गई. इसके बाद शरीर में बदलाव आने लगे. वे तेज सिरदर्द, उबकाई आने, उल्टियों से परेशान हो गए. साथ ही साथ उनके बोलने और सुनने की क्षमता भी घटने लगी. यानी ये कोई ऐसी बीमारी थी, जो सीधे तंत्रिका तंत्र पर असर डालती थी. हालांकि पड़ताल पर बीमारी की ऐसी कोई वजह सामने नहीं आई, जो केवल अमेरिकी राजदूतों और खुफिया लोगों को ही टारगेट करे.

    हवाना सिंड्रोम में सीधे तंत्रिका तंत्र पर असर होता था- सांकेतिक फोटो (Pixabay)


    इस बारे में लगातार जांच-पड़ताल हो रही थी. अब नेशनल एकेडमिक्स ऑफ साइंसेज (NAS) की ताजा स्टडी इस बारे में नया खुलासा लेकर आई है. इसके मुताबिक ये माइक्रोवेव रेडिएशन थी, जो शायद जानबूझकर अमेरिकी अधिकारियों को बीमार करने के लिए छोड़ी जा रही थी. बता दें कि रूस (तत्कालीन सोवियत संघ) भी माइक्रोवेव रेडिएशन पर काफी प्रयोग कर चुका है. ऐसे में शक की सुई उनकी तरफ घूमी, हालांकि रूस का कहना है कि उसने ऐसा कोई अटैक नहीं किया.

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    अब समझते हैं कि ये माइक्रोवेव वेपन क्या है, जो इतनी बुरी तरह से बीमारी करता है. ये एक तरह का डायरेक्ट एनर्जी वेपन है, जो किसी तरह की विकिरण, जैसे लेजर, सोनिक या माइक्रोवेव के फॉर्म में होता है. इसकी तेज विकिरण से कानों में अजीब आवाजें सुनाई देने लगती हैं. ये ऐसी आवाज होती है कि लगता है मानो सीधे सिर के भीतर कुछ हो रहा हो. इसका बेहद खतरनाक और लंबे समय तक टिकने वाला असर हो सकता है. इसमें बोलने-सुनने और समझने की क्षमता जाने के अलावा कई तरह के शारीरिक बदलाव भी शामिल हैं.

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    साल 2016 में जब अमेरिकी अधिकारियों के साथ ऐसा होने लगा तो अमेरिकी ने क्यूबा से बात की. क्यूबा ने ऐसे किसी भी हमले से इनकार किया. तब क्यूबा और चीन में लगभग दो दर्जन अमेरिकी राजदूत और उनके परिवार थे. उन सभी के साथ ऐसा होने लगा. कुछ लोग बाहर लाने पर बेहतर होने लगे, जबकि कईयों की हालत इतनी बिगड़ गई कि वे अपने रुटीन कामों के लिए भी दूसरों पर निर्भर हो गए.

    रूस ने अमेरिका पर किसी रेडियोएक्टिव हमले से इनकार कर दिया- सांकेतिक फोटो (Pixabay)


    NAS इसे क्यूबा या रूस या किसी दुश्मन देश का सोनिक हमला मानते हुए लगातार इसकी जांच की कोशिश में लगा था. अबकी बार जो स्टडी की हुई, उसमें चिकित्सा और विज्ञान के 19 एक्सपर्ट शामिल थे. समझने के लिए टीम ने ऐसे 40 सरकारी अफसरों की जांच की. इस दौरान पाया गया कि ये किसी विकिरण का ही नतीजा है. ये भी पाया गया कि वे विकिरण उसी कमरे या जगह पर हमला करती थी, जहां अफसर रहता हो.

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    इंडियन एक्सप्रेस की खबर के मुताबिक जांच टीम ने आशंका जताई कि अगर ये हमला है तो अभी खत्म नहीं हुआ, बल्कि हो सकता है कि कुछ समय के भीतर ऐसा दोबारा होने लगे. चूंकि किसी को हमले का असल स्त्रोत नहीं पता तो ऐसे में विदेशों में तैनात अमेरिकी अफसरों की सुरक्षा खतरे में आ सकती है. टीम ने ये भी कहा कि हो सकता है आगे होने वाली घटनाएं और ज्यादा खतरनाक ढंग से असर करें.

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    अब अमेरिकी खुफिया टीम इसे लेकर सतर्क हो गई है और समझने की कोशिश कर रही है कि क्या ये वाकई में किसी देश का अमेरिका पर हमला था. साथ ही साथ उस समय बीमार हुए और आज तक ठीक न हो सके अमेरिकी राजदूतों की देखभाल के लिए केयर-बेनिफिट का बिल लाया जा सकता है. इसे विदेशों में तैनात सभी अफसरों के लिए भी लागू किया जा सकता है.

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