क्या है अराकान आर्मी, जो चीन की शह पर भारत के काम में अड़ंगा डाल रही है?

चीन दूसरे देशों में चल रही भारतीय परियोजनाओं में रोड़ा डाल रहा है- सांकेतिक फोटो (Pixabay)
चीन दूसरे देशों में चल रही भारतीय परियोजनाओं में रोड़ा डाल रहा है- सांकेतिक फोटो (Pixabay)

लद्दाख सीमा (Ladakh border) पर महीनों से झख मार रहा चीन (China) अब दूसरे देशों में चल रही भारतीय परियोजनाओं में रोड़ा डाल रहा है. इसके लिए वो उग्रवादी संगठनों को बढ़ावा दे रहा है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: November 22, 2020, 6:44 AM IST
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भारत के पूर्वी लद्दाख पर महीनों से चल रहे सीमा विवाद के बीच चीन अपनी हरकतों से बाज नहीं आ रहा. वो लगातार नॉर्थईस्ट सीमा पर उग्रवादी संगठनों (insurgent groups) को उकसा रहा है. हाल ही में म्यांमार में भारत समर्थित कलादान प्रोजेक्ट (Kaladan project) के पास भी उग्रवादी हमला हुआ, जिसमें चीन के होने की अटकलें लग रही हैं. हमलावर संगठन को अराकान आर्मी (Arakan Army ) के तौर पर पहचाना गया, जो प्रोजेक्ट में लगातार रुकावट डाल रही है.

सबसे पहले तो कलादान प्रोजेक्ट को समझते हैं. ये भारत और आसियान देशों के बीच समुद्री संपर्क स्थापित करने के लिए भारत-म्यांमार की काफी महत्वाकांक्षी योजना है. इसके तहत कोलकाता को म्यांमार के सितवे पोर्ट से जोड़ दिया जाएगा. साथ ही मिजोरम भी सड़क और नदी से जुड़ा होगा. आसियान के साथ संपर्क बढ़ाने से भारत का व्यापार और भी मजबूत होगा, साथ ही इससे म्यांमार को भी बड़ा आर्थिक लाभ होने के अनुमान लगाए गए.

kaladan project
कलादान प्रोजेक्ट भारत-म्यांमार की काफी महत्वाकांक्षी परियोजना है- सांकेतिक फोटो




क्या कर रही है अराकान आर्मी
चीन के साथ तनाव बढ़ने के साथ ही म्यांमार स्थित उग्रवादी संगठन लगातार इस प्रोजेक्ट में बाधा डालने की कोशिश कर रहा है. इसके तहत निर्माण स्थल पर सामान न पहुंचाने देना, कर्मचारियों और सैनिकों पर हमला जैसी हरकतें अराकान आर्मी कर रही है. एक इंटरव्यू के दौरान म्यांमार के सेना प्रमुख जनरल मिन आंग ह्लाइंग ने खुद कहा कि उनके देश में जो आतंकी समूह हैं, उनके साथ मजबूत ताकतें काम कर रही हैं. इस ताकत का मतलब चीन से जोड़ा जा रहा है. जनरल ने आतंक के खात्मे के लिए इंटरनेशनल मदद भी मांगी. सेना प्रमुख मुख्य तौर पर देश में अराकान आर्मी (एए) का जिक्र कर रहे थे.

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चीन का इससे क्या फायदा है
चीन खुद भी म्यांमार में अपने कई प्रोजेक्ट चलाना चाहता है, जो उसके लिए वन बेल्ट परियोजना का हिस्सा हैं. लेकिन म्यांमार सरकार इसके लिए मंजूरी नहीं दे रही. प्रोजेक्ट के सहारे देश में घुसकर कब्जा करने की चीनी नीति के चलते भी म्यांमार डरा हुआ है. ऐसे में चीन अलग-अलग तरीके से अपनी भड़ास निकाल रहा है.

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भारत-म्यांमार प्रोजेक्ट पर भी उसका गुस्सा उतर रहा है. इसमें सीधा दखल न देकर वो कथित तौर पर अराकान आर्मी को पैसों और हथियारों की मदद कर रहा है. चीन का एजेंडा है कि टेरर ग्रुप के जरिए वो म्यांमार के साथ भारत के हालात भी खराब कर सकेगा.

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आतंकी संगठन म्यांमार के चीन से सटे हुए हिस्से राखिन स्टेट में काम कर रहा है- सांकेतिक फोटो


इस तरह दे रहा चीन मदद
इंटरनेशनल क्राइसिस ग्रुप के मुताबिक अराकान आर्मी एक चरमपंथी संगठन है, जिसके नेता विदेशों और खासकर चीन में हथियार चलाने, लोगों को अपने साथ मिलाने और प्लानिंग की ट्रेनिंग लेते हैं. खुद म्यांमार के सैन्य प्रवक्ता ब्रिगेडियर जनरल जॉ मिन टुन के अनुसार साल 2019 से ये आतंकी चीन में बने हथियारों से लगातार म्यांमार आर्मी पर हमले कर रहे हैं.

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उसी साल एक छापे के दौरान आतंकियों के पास से लगभग 90 हजार डॉलर की कीमत के हथियार मिले, जो मेन इन चाइना थे. माना जाता रहा है कि चीन की कम्युनिस्ट पार्टी और पीपल्स लिबरेशन आर्मी के अराकान आर्मी से काफी गहरे संबंध हैं. चीन से लगातार हथियारों, पैसों की सप्लाई के अलावा हथियार चलाने की ट्रेनिंग भी इन्हें दी जाती है.

कैसे काम कर रहा है उग्रवादी संगठन
ये आतंकी संगठन म्यांमार के चीन से सटे हुए हिस्से राखिन स्टेट में काम कर रहा है. अप्रैल 2009 में बना ये ग्रुप देश का सबसे बड़ा सशस्त्र आतंकी समूह माना जाता है. इसे खुद देश की एंटी-टेररिज्म कमेटी ने देश की सुरक्षा के लिए खतरा बताया है. ये संगठन रोहिंग्या मुस्लिम अल्पसंख्यकों की रक्षा के लिए सशस्त्र संघर्ष कर रहा है और इसके अधिकतर सदस्य बांग्लादेश से आए अवैध शरणार्थी हैं.

संगठन पुलिस, सेना के अलावा आम लोगों पर भी लगातार हमले करने के लिए कुख्यात रहा है. हालांकि आतंकी संगठन का कहना है कि उसने आम लोगों पर हमला नहीं किया और वो सिर्फ बौद्ध बहुमत के दमन के खिलाफ हथियार उठाता है.
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