किल द बिल : वो कानून, जिससे खतरा है ​कहीं रूस जैसा सामंतवादी न हो ब्रिटेन!

ब्रिटेन में नए पुलिस विधेयक के खिलाफ लोग सड़कों पर उतरकर भारी विरोध दर्ज करवा रहे हैं.

ब्रिटेन में नए पुलिस विधेयक के खिलाफ लोग सड़कों पर उतरकर भारी विरोध दर्ज करवा रहे हैं.

ब्रिटेन में हज़ारों लोग सड़कों पर उतरकर विरोध प्रदर्शन (People Protest in Britain) कर रहे हैं क्योंकि एक कानून कथित तौर पर उनके विरोध करने के अधिकार को ही छीनने के इरादे से लाया जा रहा है. जानिए क्यों लाया गया यह विधेयक (New Bill) और क्या हैं अंदेशे.

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ब्रिटिश संसद (British Parliament) में एक नये कानून का प्रस्ताव 'पुलिस, क्राइम, सेंटेंसिंग एंड कोर्ट्स बिल 2021' के तौर पर पेश किए जाने के बाद से ही सड़कों पर ​भारी विरोध प्रदर्शन शुरू हो चुके हैं. जानकार कह रहे हैं कि इस तरह के कानूनों (Authoritarian Laws) से ब्रिटेन का लोकतंत्र (British Democracy) खतरे में पड़ेगा और सामंतवादी व्यवस्था के हालात बनेंगे. इस विधेयक के खिलाफ ब्रिटेन के शहर ब्रिस्टल में तो हिंसक प्रदर्शनों (Bristol Protests) तक की खबरें आ चुकी हैं. आखिर इस विधेयक में ऐसा क्या है कि इसका इतना भारी विरोध झेलना पड़ रहा है?

पुलिस के अधिकारों को बेलगाम कर देने और नागरिकों के अधिकारों को छीन लेने का आरोप इस बिल पर लगा है. प्रदर्शनकारी 'किल द बिल' नारे के तहत इसका विरोध कर रहे हैं. इस बिल को लाने की वजहों के बारे में भी आपको बताएंगे, पहले जानिए कि यह बिल अस्ल में क्या बला है?

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आखिर क्या है विवादास्पद बिल?
अगर लोग किसी किस्म के विरोध प्रदर्शन के लिए सड़कों पर आते हैं, मार्च करते हैं तो पुलिस के पास इसे कुचलने के लिए शक्तियां बढ़ाने वाले इस बिल के मुताबिक पुलिस के पास अधिकार होंगे कि वह प्रदर्शनों को सीमित कर सके, नारेबाज़ी तकरीबन बंद करवा सके यानी इस बिल के दम पर पुलिस काफी हद तक विरोध प्रदर्शनों को बंद करवाने का अधिकार पा लेगी.

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लंदन और ब्रिस्टल के साथ ही ​यूके के कई शहरों में नये पुलिस बिल के खिलाफ विरोध प्रदर्शन होने की खबरें हैं.


यही नहीं, इस बिल में इस तरह के भी प्रावधान हैं जो इस बारे में स्पष्ट रूप से उल्लेख करते हैं कि विरोध प्रदर्शन के दौरान नागरिक कितना शोर कर सकेंगे, किस तरह का बर्ताव और एक्टिविटी कर सकेंगे. यह भी कि किस तरह के व्यवहार और नारेबाज़ी को अपराध की श्रेणी में माना जाएगा.



क्यों लाया गया यह बिल?

वास्तव में, पिछले साल अमेरिका में अश्वेत जॉर्ज फ्लॉयड की हत्या के बाद नस्लवाद के खिलाफ जो जन आंदोलन भड़का, वह यूरोप में भी खासा फैला. इस उग्र विरोध को देखते हुए प्रदर्शन रोकने संबंधी मौजूदा कानूनों को कुछ कमज़ोर पाया गया. अब तक ब्रिटेन में 1986 का पब्लिक ऑर्डर एक्ट लागू रहा, जिसे नये समय में नये ढंग से किए जाने वाले विरोध प्रदर्शनों के मामले में फिट नहीं पाया जा रहा.

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नीति के तौर पर ब्रिटेन के गृह मंत्रालय ने यह दावा करते हुए 2019 के अप्रैल अपराइज़िंग आंदोलन का हवाला भी दिया. कहा कि इस आंदोलन के चक्कर में पुलिस को 1.6 करोड़ यूरो का खर्च करना पड़ा. दूसरी तरफ, इस आंदोलन के पर्यावरण एक्टिविस्ट संगठनों का कहना है कि उन्होंने सविनय अवज्ञा के सिद्धांत पर आंदोलन किया. कुल मिलाकर यह बहस एक नये विधेयक के तौर पर सामने आई है, जिसे भी विरोध का सामना करना पड़ रहा है.

क्या हैं बिल को लेकर अंदेशे?

लोगों से लेकर विशेषज्ञों तक बहुत बड़ी आबादी इस बिल के खिलाफ नज़र आ रही है. अपराध व न्याय पर दुनिया भर के मामलों में वॉचडॉग की हैसियत रखने वाली संस्था 'फेयर ट्रायल्स' का कहना है कि इस बिल से 'न्याय प्रणाली में लोगों के विश्वास को ठेस पहुंचती है और समानता व फेयर ट्रायल के अधिकार पर सवाल खड़े होते हैं.'

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ब्रिटेन के लिसेस्टर में महात्मा गांधी की प्रतिमा.


ब्रिटेन की लेबर पार्टी ने भी इस कानून का विरोध करते हुए कहा कि 'उग्र विरोध प्रदर्शन' करने या फिर व्यवस्था को 'गंभीर रुकावट' पहुंचाने की सज़ा इस बिल में दस साल तक की है, जो कि जस्टिफाइड नहीं है. साथ ही, कुछ आलोचकों ने इस बिल को लेकर गृह सचिव पर जल्दबाज़ी करने का भी आरोप लगाया है.

तो क्या रूस बन जाएगा ब्रिटेन?

साल 2001 से 2004 तक ब्रिटेन के गृह सचिव रहे डेविड ब्लंकेट ने लिखा है कि असंतोष और विरोध को लेकर सहिष्णुता ब्रिटेन की वैल्यू रही है. 'जहां गांधी और मंडेला जैसे महान लोगों के स्टैचू हैं, इस तरह के कानून से उस पार्लियामेंट स्क्वायर पर जमा होने वाले प्रदर्शनकारियों के साथ हिंसा होगी?' ब्लंकेट का साफ कहना है कि इस तरह के कानून ब्रिटेन के लोकतंत्र की परंपरा और छवि के लिए घातक होंगे.

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अपने लेख में ब्लंकेट ने यह चेतावनी भी दी कि अगर यह विधेयक बगैर संशोधन के पास होकर कानून बनता है तो ​यूके पुतिन के सामंतवादी नेतृत्व वाला रूस बनने की तरफ बढ़ जाएगा. ऐसा हुआ तो 'प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन अपनी ज़हरीली परंपरा के लिए ही याद किए जाएंगे.' ब्लंकेट को यह डर भी है कि इस तरह के कानून के बाद पुलिस और लोगों के बीच हिंसा और ज़्यादा घातक हो जाएगी.
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