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क्या है लाल और काली किताब...क्यों रहती है चर्चा में!

News18Hindi
Updated: July 3, 2018, 12:58 PM IST
क्या है लाल और काली किताब...क्यों रहती है चर्चा में!
प्रतीकात्मक तस्वीर

इन दोनों किताबों के बारे में दावा किया जाता है कि ये प्राचीन किताबें हैं लेकिन इन्हें लेकर हमेशा विवाद रहा है. इनके तौरतरीकों में लेकर हमेशा से लोगों को शक भी रहा है

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देश के ज्योतिष जगत में लाल किताब अक्सर चर्चा में रहती है. ज्योतिषियों का एक वर्ग जहां इसे बहुत महत्व देता है तो एक वर्ग इसे टोने और टोटके की किताब मानकर पूरी तरह से खारिज कर देता है. ये हमेशा से एक विवादित किताब रही है. इसके बारे में कहा जाता है कि रावण ने कहीं से विद्या हासिल करके इस ग्रंथ लिखा था. वहीं एक काली किताब भी है, जो इसी तरह टोटकों पर आधारित है.

लंकाधिपति रावण ने सूर्य के सारथी अरुण से यह विद्या हासिल की थी. रावण के बाद माना जाता है कि ये ग्रंथ गायब हो गया. ये किसी तरह आद नाम की जगह पर पहुंच गया. वहां इसका अनुवाद अरबी और फारसी भाषा में किया गया. इसका प्राचीन उर्दू अनुवाद आजकल पाकिस्तान की लाइब्रेरी में सुरक्षित है. परन्तु इसका कुछ अंश गायब हैं.

बताया जाता है एक बार लाहौर में जमीन खोदने का कार्य चल रहा था, उसमें से तांबे की पट्टिकाएं मिलीं. जिन पर उर्दू एवं अरबी भाषा में लाल किताब लिखी मिली. सन 1936 में अरबी भाषा में लाहौर में प्रकाशित की गई. ये प्रसिद्ध हो गई. इसके बाद पंजाब के फरवाला (जिला जालंधर) निवासी पंडित रूप चंद जोशी जी ने 1939 से 1952 के बीच पांच खंडों में इसकी रचना की.

आम ज्योतिष से भिन्न

देश के कई ज्योतिष आमतौर पर इसी के जरिए अपने पास आने वालों को समस्या निवारण के उपाय सुझाते हैं. बाजार में इसके कई रुपांतर हिन्दी में उपलब्ध हैं. लाल किताब को अरुण संहिता भी कहा जाता है.



टोटकों का सहारा
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लाल किताब सैद्धान्तिक अथवा प्रायोगिक फलित ज्योतिष-ग्रन्थों से हटकर हैं. इसकी सबसे बड़ी विशेषता ग्रहों के दुष्प्रभावों से बचने के लिए 'टोटकों' का सहारा लेने का संदेश देना है. इसके टोटके काफी सरल माने जाते हैं. लेकिन कुछ लोग इन्हें अजीब भी मानते हैं. इसके समर्थक मानते हैं कि ये धर्म के बेहतर आचरण पर जोर देती है. इसके आधार पर उपाय बताने वालों का कहना है कि लाल किताब किसी को नुकसान नहीं पहुंचाती. दावा किया गया है कि हमारे जीवन के हर पहलू का निवारण इस किताब में है.

पहले खास इलाकों तक था इसका प्रभाव
पहले लाल किताब हिमाचल और उत्तरांचल के पहाड़ी इलाकों में फैली विद्या थी, इसके बाद पंजाब और अफगानिस्तान तक फैल गई. यह विद्या अपने पांव पसारती गई. कहा जाता है कि यह विद्या एक परिवार के पास संरक्षित है. आज भी उस परिवार के लोग पीढ़ी-दर-पीढ़ी इसे आगे बढ़ाते हैं. यह विद्या उस परिवार तक कैसे पहुंची, इसके पीछे भी रहस्यमय कहानी है. जाने माने ज्योतिष अनिल कत्यान कहते हैं कि हो सकता है कि कभी लाल किताब की खासियत रही हो लेकिन अब तो इसका कोई फायदा देखने को नहीं मिलता.

वो ये भी कहते हैं कि लाल किताब की सही जानकारी भी किसी के पास नहीं है. जिस तरह ज्योतिष संबंधी मूल ग्रंथों का लोप हो गया, उसी तरह इसकी मूल कॉपी भी अब नहीं मिलती. लिहाजा ये कहना कठिन है कि ये किताब कितनी सही या गलत है.



वशीकरण के उपाय
इस किताब में वशीकरण के तमाम उपाय भी सुझाए गए हैं. जो आमतौर पर विवादित हैं. इसमें तरह तरह के तरीकों से लोगों को वश में करने की बात बताई गई है. इसमें बाल से लेकर लौंग के इस्तेमाल करके वशीकरण का दावा किया गया है.

इसे अरबी विद्या क्यों मानते हैं
शुरुआती समय में इस किताब में 383 पृष्ठ थे, यह वो दौर था जब पंजाब में उर्दू भाषा का ही चलन था इसलिए इस किताब को भी उर्दू, अरबी और फारसी के मिश्रण के साथ लिखा गया था. इसके अरबी में लिखे होने की वजह से लाल किताब को भी अरबी विद्या मान लिया गया. बाद में इसके जो संस्करण प्रकाशित हुए,उसमें इसके पेज कम-ज्यादा होते रहे.



क्या ये किताब केवल कोई जानकार ही समझ सकता है
अामतौर पर कुछ लोग बाजार से किताब खरीदकर उसमें लिखे टोटकों पर अमल शुरू कर देते हैं. ऐसा नहीं करना चाहिए. एक ज्योतिषी का कहना है कि लाल किताब में मौजूद सूत्रों का फलादेश आम ज्योतिष की तरह सहज और आसानी से समझा जाने वाला फलादेश नहीं है. सामान्य ज्योतिष से जुड़ी धारणाएं भी लाल किताब से मेल नहीं खातीं इसलिए इसके फलादेशों को समझना हर किसी के बस में नहीं है, इसके लिए एक सही जानकार की आवश्यकता होती है.

मेरठ में आध्यात्मिक और ज्योतिष क्षेत्र के जाने माने नाम महर्षि नरेश का कहना है कि लाल किताब मुस्लिमों की ईजाद की हुई किताब है. मेरा व्यक्तिगत मानना है कि इसे पढ़कर ज्योतिष नहीं करना चाहिए, क्योंकि तब आप ज्योतिष के मूल सिद्धांतों से भटक जाते हैं.

क्या है काली किताब
काली किताब आमतौर पर तंत्र-मंत्र और जादू –टोटके की किताब है. हालांकि इस किताब के समर्थक ये दावा करते हैं कि इसमें जीवन से जुड़ी तमाम परेशानियों के उपायों का दावा किया जाता है.



लाल और काली किताब के ऐप
दोनों ही किताबों के एप भी गूगल प्लेस्टोर पर उपलब्ध हैं. गूगल प्ले स्टोर पर काली किताब टाइप करते ही ढेर सारे ऐप सामने आ जाते हैं.

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First published: July 3, 2018, 12:09 PM IST
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