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किस तरह गिरती है बिजली, क्या किया जा सकता है इससे बचने के लिए

किस तरह गिरती है बिजली, क्या किया जा सकता है इससे बचने के लिए

बिजली गिरने से कई बार जानमाल का नुकसान बहुत होता है. (प्रतीकात्मक तस्वीर)

बिजली गिरने से कई बार जानमाल का नुकसान बहुत होता है. (प्रतीकात्मक तस्वीर)

बादलों में आवेशों (Charges) के बनकर अलग होने के कारण ही बिजली गिरने (Lightening) की प्रक्रिया शुरू होती है.

नई दिल्ली: हमारे देश में हर साल मानसून (Mansoon) और उसके आसपास बिजली गिरने (Lightening) की कई घटनाएं होती रही है. इस साल भी कई इलाकों में इस बिजली का कहर टूटा है और कई मौतें भी हुई हैं. बादलों के छाने के बाद बिजली कड़कने और उसके गिरने की प्रक्रिया क्या होती है और किन वजहों से यह होता है इस बारे में आम लोगों को पता नहीं होता है.

पता नहीं चलता कब और कहां गिरेगी बिजली
बादलों की गड़गड़ाहट या फिर तेज चमक के साथ यह जानलेवा बिजली कहीं भी गिर सकती है. इसके बारे में न तो पूर्वानुमान लगाया जा सकता है और न ही यह बताया जा सकता है कि यह बिजली कब गिरेगी. हां लेकिन यह गिरती है और कहर ढा देती है. इनसे बचने के उपाय बहुत मुश्किल नहीं हैं.

क्या इससे बचा जा सकता है
हां यह नामुमकिन तो नहीं है. इसके लिए कुछ बातों का ध्यान रखना पड़ता है. इसके बारिश के मौसम घर से बाहर निकलने से बचना चाहिए और बारिश के दौरान किसी पेड़ के नीचे खड़े होने से बचना चाहिए खास तौर पर लंबे पेड़ों के नीचे तो बिलकुल नहीं. वैसे तो शहरों में लगे ऊंचे टावरों के शीर्ष पर ऐसी छड़नुमा वस्तु लगाई जाती है जो आकाश के आवेशों को खींच कर धरती में पहुंचा देती है, लेकिन अगर शहर से बाहर घर होते अपने घर के सबसे ऊंचाई वाले हिस्से में एक छड़ को तार से जमीन में जोड़ने से भी इससे बचा सकता है.

 

Mansoon
भारत में इस तरह की घटनाएं मानसून में ज्यादा होती है.


किन हालातों में पैदा होती है यह बिजली
यहां विद्युतस्थिकी (Electrostatics) के सिद्धांत लगते हैं. वायुमंडल में अलग-अलग जगह धनात्मक और ऋणात्मक आवेश (Charge) बनते हैं जो एक बहुत ही सघन इलेक्ट्रिक फील्ड बनाते हैं. यहीं बिजली चमकने की पूरी प्रक्रिया होती है. वायुमंडल में आवेशों का आना हवा में मौजूद अणुओं के आयनीकरण से होते है जो अंतरिक्ष से आने वाली किरणों के कारण होता है.

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आवेशों का अलग अलग होना है जरूरी
बादलों में पानी की बूंदों और बर्फ के महीन टुकड़ों के ऊपर नीचे होने के कारण ये आवेश अलग-अलग जमा हो जाते हैं. ऋणात्मक आवेश बादलों के नीचे और धनात्मक आवेश बदलों के ऊपर के हिस्से में जमा होते हैं.

Lightning
इस पूरी प्रक्रिया में पानी वाले बादलों की भूमिका अहम होती है.


तो फिर कैसे आना होता है जमीन पर
बादलों के नीचे के हिस्से के कारण उसके नीचे की जमीन पर भी धनात्मक आवेश जमा होने लगते हैं. जब दोनों के बीच का विभवांतर या वोल्टेज एक स्तर पर पहुंच जाता है. बीच की हवा सुचालक के तौर पर काम करती है और सबसे पहले एक सीढ़ीनुमा छड़ बनती है. जिसमें इलेक्ट्रॉन बीच-बीच में रुक-रुक कर जमीन की ओर आते हैं. यह प्रक्रिया दिखाई नहीं देती, लेकिन जब इलेक्ट्रॉन जमीन पर पहुंचते हैं तो धनात्कम आवेश तेजी से ऊपर जाते हैं और बिजली चकमती हुई दिखाई देती है.

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कई बार यह पूरी प्रक्रिया बहुत ही जल्दी यानि कि कम समय (करीब 200 मिली सेकंड के अंदर ही) में तीन-चार बार हो जाती है. इस प्रक्रिया में होता यह कि जो जमीन पर मौजूद वस्तु होती है जिसकी कुछ ऊंचाई हो जैसे कि पेड़ वगैरह, यह बिजली की इस प्रक्रिया के निचले हिस्से बन जाते हैं और तेज बिजली का झटका तक ला देते हैं और जिसमें बहुत बड़ी मात्रा में ऊर्जा होती है और वह पेड़ जल जाता है और साथ ही उसके आसपास की चीजें भी. इसी में जानमाल का नुकसान होता है जिसकी वह से लोग और जानवर तक मारे जाते हैं.

Tags: Monsoon, Research, Science

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