चीनी युवा क्यों काम-धंधा छोड़कर आराम फरमा रहे हैं?

ज्यादा से ज्यादा चीनी युवा काम में चूहा दौड़ से इनकार कर रहे हैं- सांकेतिक फोटो (pixabay)

अलीबाबा के संस्थापक जैक मा (Alibaba founder Jack Ma) ने हफ्ते में 72 घंटे काम की वकालत की थी. यानी लगातार 6 दिनों तक 12 घंटे. अब चीन में 20 से 30 साल के युवा इसके खिलाफ अभियान चला रहे हैं, जिसे लाइंग फ्लैट (lying flat campaign in China) कहा जा रहा है.

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    चीन में कंपनियां अपने मुताबिक काम के घंटे तय करती हैं और फिर बढ़ाती चली जाती हैं. कर्मचारियों पर काम के ज्यादा दबाव की खबरें कई बार आती हैं. इसके अलावा वहां खाने से लेकर घरों की कीमतें बढ़ती जा रही हैं, जबकि तनख्वाह कम है. इस हालत से गुस्साए चीनी युवाओं (campaign by Chinese youth) ने नया ही तरीका खोजा. वे कम से कम काम कर रहे हैं. ये कैंपेन का रूप ले चुका, जिसे ‘lying flat’ कहा जा रहा है. अब चीन की सरकार युवाओं से घबराई हुई है.

    युवा काम में चूहा दौड़ से इनकार कर रहे हैं
    इसमें 20 से 30 की उम्र के लोग हैं, जो दिन में 12 घंटे काम का खुला विरोध कर रहे हैं. साथ ही वे हफ्ते में 6 दिन काम के भी खिलाफ हैं. मिलेनियल ने इसे अभियान बना दिया, जिसमें वे काम बढ़ने पर बिस्तर पर या जहां जगह मिले, आराम से लेट जाते हैं.

    एक फोटो ने मचाया था तहलका 
    कुछ समय पहले चीनी सोशल मीडिया विबो पर एक फोटो वायरल हुई थी. इसमें तीन चीनी युवा साइकिल से कहीं जा रहे थे, जिनमें से एक ने साइकिल पर एक हाथ से लैपटॉप खोला हुआ था और काम करते हुए ही साइकिल चला रहा था. पड़ताल पर पता चला कि युवा शिंन्गुआ यूनिवर्सिटी से थे और पढ़ाई से जुड़ा काम कर रहे थे. इसके बाद ही चीनी युवाओं पर कंपीटिशन और नौकरी के बोझ की चर्चा ने जोर पकड़ा.

    lying flat China
    चीन की सरकार युवाओं से घबराई हुई है- सांकेतिक फोटो (pixabay)


    एक मिनट भी आराम समय की बर्बादी की तरह देखा जा रहा 
    चीन में बढ़ती प्रतियोगिता पर वैसे कई सालों से बात हो रही है. इसके लिए एक टर्म भी है, जिसे वहां के युवा नइजुआन (Neijuan) कहते हैं. इसका अर्थ है वो लाइफस्टाइल, जिसमें काम के अलावा किसी भी चीज या मनोरंजन को जगह न मिल सके. साइकिल चलाते हुए पढ़ाई करते युवा की तस्वीर इसी वर्ग की हकीकत बताती है. चीनी न्यूज एजेंसी CGTN ने ये फोटो दिखाते हुए साफ किया कि चीनी युवा इतने दबाव में हैं कि उन्हें कुछ देर के लिए साइकिल चलाते हुए घर या कहीं भी पहुंचना समय की बर्बादी लगता है और वे उसके साथ ही पढ़ाई या काम करते चलते हैं.

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    क्या है 9-9-6 कल्चर 
    काम के प्रेशर को युवाओं ने "9-9-6" कल्चर भी कहा. इसमें लोग हफ्ते के 6 दिन सुबह 9 से रात 9 तक काम करने को मजबूर हैं. अगर ऐसा न किया तो या तो उनकी नौकरी चली जाएगी या फिर कम पैसों के कारण खाने-रहने के पैसे तक नहीं होंगे.

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    ओवरवर्क के इस कल्चर में सबसे आगे अलीबाबा के फाउंडर 
    इनसाइडर की एक रिपोर्ट में जिक्र है कि जैक मा ने साल 2019 में हफ्ते में 72 घंटे काम की वकालत करते हुए इसे वरदान कहा था. हालांकि चीन की लेबर पॉलिसी आधिकारिक तौर पर दिन में 8 घंटे काम की बात करती है लेकिन ये केवल कागजों तक है. वाकई में हाल ऐसा है कि वहां कर्मचारी से लेकर अनस्किल्ड लेबर रोज 12 से 16 घंटों के काम को मजबूर है.

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    काम के बढ़े घंटों के कारण कर्मचारी समय पर घर नहीं जा पाते- सांकेतिक फोटो (pixabay)


    तनाव के चलते हो रही मौत
    काम के बढ़े घंटों के कारण कर्मचारी समय पर घर नहीं जा पाते. रिश्ते में दूरियां आने लगी हैं. इन सब कारणों से अवसाद और तनाव जैसी समस्याएं बढ़ीं. इसी साल वहां की मुख्य ई-कॉमर्स कंपनी Pinduoduo में काम के बहुत दबाव के कारण दो कर्मचारियों की मौत हो गई. रात में डेढ़ बजे तक काम के बाद एक कर्मचारी एकाएक गिर गया और वहीं उसकी मौत हो गई थी. इसपर हल्ला मचने से पहले से दबा दिया गया.

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    युवाओं ने शुरू कर दिया है विरोध 
    अब 12 घंटे, सप्ताह में 6 दिन काम के इसी कल्चर को खत्म करने के लिए चीनी युवा विद्रोह पर उतर आए. वे काम छोड़ घर बैठने लगे हैं. अप्रैल में चीनी सोशल मीडिया ताइबा (Tieba) पर पहली बार लाइंग फ्लैट टर्म कैंपेन शुरू हुआ. चीन में फेसबुक के विकल्प के तौर पर काम करते मीडिया Douban पर ऐसे ग्रुप बन गए हैं, सोए हुए अपनी तस्वीरें डाल रहे हैं.

    सरकार कर रही खबरों को सेंसर 
    लेकिन चीन की सरकार युवाओं के इस अभियान से डरने लगी है. वॉशिंगटन पोस्ट की एक रिपोर्ट के मुताबिक लगभग 9,000 युवाओं को जोड़ने वाले इस ग्रुप की पोस्ट्स को सोशल मीडिया से हटा दिया गया. वहां की सरकार को डर है कि इससे देश की इकनॉमी पर बुरा असर होगा और वो पीछे हो जाएंगे.

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