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क्यों भारत के मालाबार नेवल ड्रिल पर सारी दुनिया की निगाह है?

क्यों भारत के मालाबार नेवल ड्रिल पर सारी दुनिया की निगाह है?

क्वाड देशों के समूह का मालाबार अभ्यास भी अगले मंगलवार से शुरू हो रहा है.

क्वाड देशों के समूह का मालाबार अभ्यास भी अगले मंगलवार से शुरू हो रहा है.

इस बार मालाबार नौसेना अभ्यास (Malabar naval exercise) के सहारे ड्रैगन को समुद्र में घेरने की पूरी तैयारी हो चुकी है. इसमें अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया भी भारत का साथ दे रहे हैं.

    चीन (China) की दादागिरी रोकने के लिए भारत के साथ मिलकर तीन ताकतवर देशों की सेनाएं समुद्र में सैन्य अभ्यास करने जा रही हैं. इसे मालाबार नौसैनिक अभ्यास (Malabar naval drill) कहा जाता है, जिसमें इस बार भारत के अलावा अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया (America, Japan and Austrlia) भी शामिल होंगे. बता दें कि विस्तारवाद का भूखा चीन समुद्री रास्ते से भी खुद को मजबूत करने की कोशिश कर रहा है. यही देखते हुए इस बार की मालाबार ड्रिल काफी अहम मानी जा रही है.

    आखिर क्या है मालाबार ड्रिल
    इसकी शुरुआत आज से लगभग 25 साल पहले 1992 में हुई थी. शुरू में ये द्विपक्षीय ड्रिल थी, जिसमें भारत और अमेरिका के नौसैनिक हिस्सा लेते थे. साल 2015 में जापान भी इसका हिस्सा बन गया. समुद्र में नेवी के इस अभ्यास के जरिए इंडो-एशिया पैसिफिक में आने वाले देश खुद को मजबूत करने की कोशिश करते हैं. ये ड्रिल इसलिए होती है कि अगर समुद्री मार्ग से किसी दुश्मन देश का हमला हो तो बचा जा सके.

    ऑस्ट्रेलिया पिछले कई सालों से इस युद्धाभ्यास में शामिल होने को लेकर रुचि दिखा रहा था- सांकेतिक फोटो


    पहली बार जुड़ेगा ऑस्ट्रेलिया
    ऑस्ट्रेलिया पिछले कई सालों से इस युद्धाभ्यास में शामिल होने को लेकर रुचि दिखा रहा था. इस बार चीन की हरकतों को लेकर वो और आक्रामक हुआ. यही देखते हुए उसे भी इसमें शामिल होने का औपचारिक निमंत्रण दिया जा चुका है. इसपर जवाब में ऑस्ट्रेलिया के रक्षा मंत्री लिंडा रेनॉल्ड्स ने भारत के मालाबार युद्धाभ्यास में उसे शामिल करने के फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि मालाबार जैसे उच्च सैन्य अभ्यास से ऑस्ट्रेलियाई नौसेना की क्षमता को बढ़ाने में काफी मदद मिलेगी.

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    चीन को लगता रहा है डर 
    बंगाल की खाड़ी में होने वाला ये अभ्यास लगभग 10 दिनों तक चलता है. इसमें शामिल होने वाले सारे ही देश अपनी पनडुब्बियों और एयरक्राफ्ट समेत ड्रिल करते हैं. हिंद-प्रशांत क्षेत्र में हिस्सा लेने वाले ये चारों ही देश काफी ताकतवर माने जाते हैं और चीन को हमेशा से इस युद्धाभ्यास से डर लगता रहा है. महासागरों पर कब्जा करने के शौकीन चीन को लगता है कि इस तरह की ड्रिल उसके विस्तारवाद के आड़े आ सकती है. साल 2017 में उसने इस ड्रिल का खासा विरोध किया था.

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    क्या होगा इसका फायदा
    अगर ऐसे हालात बनें कि चीन समुद्री रास्ते से किसी देश के व्यापार में रोड़ा अटकाने की कोशिश करे तो मालाबार ड्रिल कर रहे देश आपस में लॉजिस्टिक्‍स सपोर्ट एग्रीमेंट करेंगे. इसके तहत चारों ही देश एक-दूसरे के बंदरगाहों और नौसेना का इस्तेमाल कर सकेंगे. इस तरह से हो रहे समझौतों को अनौपचारिक भाषा में एंटी-चाइना पैक्ट के तौर पर देखा जा रहा है.

    मालाबार ड्रिल कर रहे देश आपस में लॉजिस्टिक्‍स सपोर्ट एग्रीमेंट कर सकेंगे- सांकेतिक फोटो (flickr)


    जापान भी बना भारत का समुद्री सहयोगी
    भारत और जापान में भी साल के मध्य में इसी तरह का एक समझौता हुआ, जिसे म्यूचुअल लॉजिस्टिक सपोर्ट अरेंजमेंट (MLSA) कहा जा रहा है. इसके तहत भारतीय सेनाओं को जापानी सेनाएं अपने अड्डों पर जरूरी सामग्री की आपूर्ति कर सकेंगी. साथ ही भारतीय सेनाओं के रक्षा साजो सामान की सर्विसिंग भी देंगी. यह सुविधा भारतीय सैन्य अड्डों पर जापानी सेनाओं को भी मिलेंगी. युद्ध की स्थिति में ये सेवाएं बेहद अहम मानी जाती हैं.

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    चाइनीज एंगल है इस साल 
    इस बार मालाबार ड्रिल पर पूरी दुनिया की निगाहें लगी हुई हैं. इस ड्रिल का एक चाइनीज एंगल भी है. दरअसल ये समुद्री क्षेत्र में चीन की लगातार बढ़ी मौजूदगी को रोकने का काम कर सकेगा, ऐसा माना जा रहा है. चीन इधर लगातार साउथ चाइना सी के बड़े हिस्से पर अपना दावा कर रहा है ताकि समुद्री रास्ते से व्यापार में वो और आगे हो जाए. यहां तक कि समुद्र पर उसने आर्टिफिशियल द्वीप तक बना डाले. अब वो इसी तरह से हिंद महासागर में भी आगे बढ़ने की कोशिश में है. ये भारत के अलावा उससे व्यापार में जुड़े पड़ोसी और दूसरे देशों के लिए भी खतरा हो सकता है.

    भारत के लिए इस बार की ड्रिल और जरूरी है क्योंकि पूर्वी लद्दाख में चीन लगातार आक्रामक रवैया रखे है


    क्यों है भारत के लिए अहम 
    खुद भारत के नेवल डॉक्ट्रिन के मुताबिक हिंद महासागर के रास्ते से पूरी दुनिया के तेल व्यापार का दो-तिहाई हिस्सा जाता है. इसी रास्ते से एक-तिहाई कार्गो ट्रैफिक का आवागमन होता है. इस तरह से ये हिस्सा काफी अहम है. ऐसे में अगर चीन इसे भी हथियाने की कोशिश करने लगे, तो ये काफी भारी पड़ सकता है. साथ ही साथ हिंद महासागर सामरिक नजरिए से भी काफी महत्वपूर्ण है. यही वजह है कि भारत के साथ अमेरिका, जापान और अब ऑस्ट्रेलिया भी इसे सुरक्षित रखने की कवायद में है.

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    देश के लिए इस बार की ड्रिल और जरूरी है क्योंकि पूर्वी लद्दाख में चीन लगातार आक्रामक रवैया रखे हुए है. माना जा रहा है कि गलवान तनाव लंबे समय तक कम नहीं हो सकेगा. ऐसे में अगर युद्ध टालना हो तो भी भारत को जलमार्ग पर भी खुद को मजबूत करना होगा ताकि चीन पर दबाव बढ़े. चीन चूंकि अपने कच्चे तेल का आयात और दूसरी चीजों का व्यापार इसी रूट से ही करता है इसलिए अगर भारत अपनी ताकत बढ़ाता है कि तो कभी भी चीन को इस मोर्चे पर घेरा जा सकेगा.undefined

    Tags: India China Border Tension, India china face off at border, Indian Army latest news, Indian navy

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