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समझें, मानसून के बारे में सबकुछ, क्यों इसकी लेटलतीफी पड़ती है भारी?

समझें, मानसून के बारे में सबकुछ, क्यों इसकी लेटलतीफी पड़ती है भारी?

मानसून दक्षिण एशियाई देशों और खासकर भारत में जून से सितंबर तक आमतौर पर सक्रिय होता है- सांकेतिक फोटो (pixabay)

मानसून दक्षिण एशियाई देशों और खासकर भारत में जून से सितंबर तक आमतौर पर सक्रिय होता है- सांकेतिक फोटो (pixabay)

मानसून की कई श्रेणियां हैं, जो पूरे सालभर सक्रिय रहती हैं. भारत में वर्षा समर मानसून (summer monsoon in India) के कारण होती है. अगर इसमें देर हो तो इसका असर आम आदमी की जेब तक जाता है.

    इस साल मानसून ने दिल्लीवासियों (monsoon in Delhi) को काफी इंतजार कराया, वहीं देश के लगभग तमाम हिस्सों में ये हफ्तेभर पहले पहुंच चुका था. मानसून पहुंचने में देरी के बारे में भारतीय मौसम विज्ञान विभाग कई बातें बता रहा है. जैसे पश्चिमी हवाओं जैसी कुछ प्रतिकूल परिस्थितियों के चलते पश्चिमी राजस्थान, हरियाणा, दिल्ली और पंजाब के कुछ इलाकों में इसका बढ़ना थम गया था. वैसे मानसून, अंग्रेजी शब्द मॉनसून से बना है, जो असल में अरबी शब्द मॉवसिस से आया, जिसका अर्थ है मौसम. डच भाषा में भी इस शब्द का जिक्र मिलता है.

    क्या है मानसून 
    मानसून महासागरों की ओर से चलने वाली तेज हवाओं की दिशा में बदलाव को कहते हैं. इससे केवल बारिश ही नहीं होती, बल्कि अलग-अलग इलाकों में सूखा मौसम भी मानसून की ही देन है. वैसे मूलतः ये हिंद महासागर और अरब सागर की ओर से चलने वाली तेज हवाएं हैं. ये हवा भारत समेत बांग्लादेश और पाकिस्तान में भारी बारिश कराती है.

    भारत में इस दौरान सक्रिय
    मानसून दक्षिण एशियाई देशों और खासकर भारत में जून से सितंबर तक आमतौर पर सक्रिय होता है. ठंडे से गर्म इलाकों की ओर बढ़ने वाली ये मौसमी हवा समर और विंटर मानसून में बंटी होती है, जो दक्षिण एशिया के मौसम को बनाती है.

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    समर मानसून अगर देर से आए या फिर कम वर्षा हो तो काफी नुकसान होता है- सांकेतिक फोटो


    क्या है समर मानसून
    ये तेज हवाओं के साथ होने वाली बारिश है, जो अप्रैल से सितंबर के बीच होती है. ठंड के खत्म होने के साथ ही दक्षिण-पश्चिम हिंद महासागर से सूखी, नम हवा भारत, श्रीलंका, बांग्लादेश और म्यांमार जैसे देशों की ओर बहने लगती है. इससे मौसम में नमी आ जाती है और हल्की-फुल्की से लेकर तेज बारिश होती है.

    भारत की खेती-किसानी का मूल
    सिर्फ भारत की बात करें तो हिंद और अरब महासागर से बहने वाली हवाएं हिमालय से होती हुई भारत के दक्षिण-पश्चिम से टकराती हैं और बारिश होती है. यही बारिश भारत की खेती-किसानी का मूल है. चावल और चाय जैसे उत्पाद पूरी तरह से समर मानसून पर निर्भर होते हैं. इसके अलावा डेयरी फार्म में भी इसी मानसून से मदद मिलती है. ये मौसम गायों को भरपूर चारा उपलब्ध कराता है, जिससे वे स्वस्थ और दुधारू रहती हैं.

    मानसून न आए तो क्या नुकसान 
    कहना न होगा कि समर मानसून अगर देर से आए या फिर कम वर्षा हो तो काफी नुकसान होता है. संपन्न किसान ही खेती के लिए पानी जुटा पाते हैं. अन्न की पैदावार कम होने पर विदेशों से अनाज खरीदने की नौबत आ जाती है. पानी न होने के कारण बिजली पैदा होने में भी रुकावट आती है. इससे बिजली महंगी हो जाती है, जिसका असर देश के हर व्यावसाय से लेकर आम आदमी की जेब पर भी पड़ता है. यही कारण है कि कई बार समर मानसून को देश का असल वित्त मंत्री भी कहा जाता है.

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    नॉर्थ अमेरिकी मानसून को जंगलों की आग बुझाने वाला मौसम माना जाता है- सांकेतिक फोटो (pixabay)


    अब बात करते हैं विंटर मानसून की
    ये मौसम अक्टूबर से अप्रैल तक रहता है. उत्तर-पूर्वी मानसून को प्रायः विंटर मानसून कहते हैं. इसमें हवाएं मैदान से सागर की ओर चलती हैं, जो बंगाल की खाड़ी, हिंद महासागर और अरब सागर को पार करते हुए आती हैं. दक्षिणपूर्वी एशिया में विंटर मानसून कम ताकतवर होता है क्योंकि ये हवाएं हिमालय से टकारकर रुक जाती हैं और इनकी नमी भी वहीं घट जाती है. यही कारण है कि भारत समेत श्रीलंका में इस दौरान मौसम गर्म रहता है. कई बार विंटर मानसून के कारण कई इलाकों में सूखा पड़ने की नौबत भी आ जाती है.

    मानसून की दो श्रेणियों के अलावा और भी श्रेणियां हैं
    इनमें पश्चिमी अफ्रीका और एशियाई-ऑस्ट्रेलियाई मानसून शामिल हैं. एशियाई-ऑस्ट्रेलियाई मानसून ऑस्ट्रेलिया से रूस की ओर जाता है और आखिर में अफ्रीका तक पहुंचता है. इसके अलावा नॉर्थ अमेरिकी मानसून भी साल में एक बार आता है. ये एरिजोना, न्यू मैक्सिको और टेक्सास को कवर करता है.

    नॉर्थ अमेरिकी मानसून को जंगलों की आग बुझाने वाला मौसम माना जाता है
    गर्मियों के दौरान एरिजोना में तापमान काफी बढ़ जाता है, जिससे जंगलों में आग लगने के हादसे होते रहते हैं. ये आग इतनी भयंकर होती है कि अग्नशामक यंत्रों से इन्हें बुझाना काफी मुश्किल होता है. ऐसे में मानसून के कारण होने वाली बारिश से जंगलों की आग बुझती है.undefined

    Tags: Monsoon, Parliament Monsoon Session, Pre Monsoon Rain

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