Explained: नवयान बुद्धिज्म क्या है, जिसे अंबेडकर और उनके परिवार ने माना?

डॉ अंबेडकर ने अपने समर्थकों से नागपुर आकर पुराना धर्म छोड़, नए धर्म में शामिल होने की अपील की- सांकेतिक फोटो (pixabay)

डॉ अंबेडकर ने अपने समर्थकों से नागपुर आकर पुराना धर्म छोड़, नए धर्म में शामिल होने की अपील की- सांकेतिक फोटो (pixabay)

डॉ भीमराव अंबेडकर (Dr Bhimrao Ambedkar) ने अपने समर्थकों से नागपुर में इकट्ठा होकर पुराना धर्म छोड़, नए धर्म में शामिल होने की अपील की. ये अक्टूबर 1956 की बात है. इस दौरान हजारों लोग एक जगह जमा हुए और नव-बौद्ध (Neo-Buddhism) बने. इसे नवबौद्ध क्रांति भी कहा गया.

  • News18Hindi
  • Last Updated: April 16, 2021, 9:49 AM IST
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नवयान का अर्थ है, वो रास्ता जो नया हो. ये बौद्ध धर्म का नया संप्रदाय है, जिसे डॉ भीमराव अंबेडकर ने शुरू किया था. यही कारण है कि इसे उनके नाम पर भीमयान भी कहते हैं. इस संप्रदाय के मानने वाले खुद को नव-बौद्ध कहते हैं और उन सारे नियमों और प्रतिज्ञा को मानते हैं, जो नव-बौद्धों (Neo-Buddhist) के लिए शुरुआत में तय हुई थीं.

महाराष्ट्र से हुई शुरुआत

बुद्धिज्म की इस शाखा को भारतीय सामाजिक इतिहास में एक क्रांति की तरह देखा जाता है. इस दौरान डॉ अंबेडकर के कहने पर एक ही झटके में महाराष्ट्र समेत लगभग देशभर का दलित समुदाय अपने पुराने धर्मों को छोड़कर नए धर्म को मानने वाला बन गया. ये 14 अक्तूबर 1956 की बात है. बाबा साहब ने दीक्षा के लिए लोगों का आह्वान किया और हजारों की संख्या में लोग नवबौद्ध बनने को नागपुर में जमा हुए थे. इस रोज डॉ अंबेडकर ने अपनी पत्नी के साथ मिलकर एक खास समारोह में बौद्ध धर्म स्वीकार किया और अपने अनुयायियों को भी ऐसा कहा था. इसे नवबौद्ध क्रांति भी कहा जाने लगा.

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डॉ अंबेडकर ने बौद्ध धर्म के इस नए समुदाय को आगे लाने के लिए 22 प्रतिज्ञाएं तैयार कीं (Photo- news18 English via Getty)

करवाईं 22 प्रतिज्ञाएं

इस दौरान डॉ अंबेडकर ने बौद्ध धर्म के इस नए समुदाय को आगे लाने के लिए 22 प्रतिज्ञाएं तैयार कीं. ये शपथ कुछ इस तरह से बनी थीं कि दलित अपने पुराने धर्म से बंधनों और रूढ़ियों से आजाद होकर आगे बढ़ सकें. इसके तहत कई ऐसी प्रतिज्ञाएं थीं, जो खुद उस धर्म के नए-नए मानने वालों की आस्था को डराती थीं लेकिन जल्द ही लोग इस ओर बढ़ने लगे.

क्या था इन प्रतिज्ञाओं में 



इन 22 प्रतिज्ञाओं में से एक प्रतिज्ञा हिंदू धर्म के देवी-देवताओं की पूजा न करना थी. साथ ही भगवान के अवतार को भी न मानना ऐसी ही एक प्रतिज्ञा थी. साथ ही मूल बौद्ध धर्म, जिसमें भगवान बुद्ध को विष्णु का अवतार माना गया, इससे इनकार की भी प्रतिज्ञा लेनी थी. कुल मिलाकर सारी शपथ इस तरह की थीं कि पुराने बंधनों से मुक्त होकर लोग केवल और केवल अपने सामाजिक और आर्थिक उत्थान की ओर बढ़ सकें.

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बौद्ध धर्म की अहम शाखाएं क्या हैं 

बता दें कि बौद्ध परंपराओं को मानने वाले अलग-अलग संप्रदायों में बंटे हुए हैं. जैसे इनका सबसे बड़ा संप्रदाय महायान है. इसे मानने वालों की आबादी दुनिया में सबसे ज्यादा है. प्यू रिसर्च सेंटर की मानें तो दुनिया की लगभग 70% बौद्ध आबादी महायान है. इनमें चीन, हांगकांग, जापान, दक्षिण कोरिया, उत्तर कोरिया, ताइवान, मकाउ और वियतनाम जैसे देश शामिल हैं.

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बौद्ध धर्म में एक और संप्रदाय थेरवाद या हीनयान कहलाता है- सांकेतिक फोटो (pixabay)


हीनयान के मानने वाले 

बौद्ध धर्म में एक और संप्रदाय थेरवाद या हीनयान कहलाता है. ये वो लोग हैं, जो इस धर्म की प्राचीन परंपराओं को मानते हैं. इस धर्म को मानने वाले लोग ज्यादातर दक्षिण पूर्व एशिया में दिखते हैं. कंबोडिया, लाओस, म्यांमार के अलावा श्रीलंका में भी इसे मानने वाले काफी संख्या में है.

तंत्र-मंत्र भी है बौद्धों के एक संप्रदाय में

वज्रयान एक अलग ही संप्रदाय है, जिसे तांत्रिक बौद्ध धर्म या मंत्रयानवयान न भी कहते हैं. तिब्बती बौद्धों ने उत्तरी भारत के महायान में तंत्र विद्या को प्रवेश दिया जो लगभग सातवीं शताब्दी में प्रारम्भ हुआ. इसे ही वज्रयान कहा गया.

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नवयान इन सबके बाद आता है

ये सबसे नया है. डॉ अंबेडकर ने इस संप्रदाय की शुरुआत की. इसका मकसद हिंदू दलितों को बराबरी और समानता का अधिकार दिलाना था. ये संप्रदाय तेजी से फैला और आज देश में इसके मानने वालों की आबादी 5 से 7 करोड़ तक है. इंडिया स्पेंड की एक रिपोर्ट के अनुसार, धर्मांतरण कर बौद्ध बने लोगों के पढ़ाई-लिखाई और आर्थिक स्तर में सुधार आया. इस तरह से इस संप्रदाय की शुरुआत का एक मकसद कामयाब माना जा रहा है. हालांकि इसपर अलग-अलग जानकार अलग राय रखते हैं. माना तो ये भी जाने लगा है कि नवयान से जुड़े युवा अब मूर्तिपूजा और कई बातों पर यकीन करने लगे हैं.

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नवयान का मकसद हिंदू दलितों को बराबरी और समानता का अधिकार दिलाना था- सांकेतिक फोटो (pixabay)


कितने बौद्ध हैं दुनिया में

आंकड़ों में बात करें महायान के मानने वालों की जनसंख्या 150 करोड़ के आसपास है. इसके बाद थेरवाद या हीनयान का स्थान आता है, जो लगभग 24 करोड़ हैं. दूसरी ओर तांत्रिक बौद्ध धर्म के अनुयायियों की संख्या भी 5 करोड़ के आसपास मानी जाती है.

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ये 6 देश हैं बौद्ध-बहुल देश

वैसे बौद्ध धर्म के अलग-अलग संप्रदायों को मानने वालों की संख्या के बारे में ये डाटा अनुमानित ही है क्योंकि ये धर्म तेजी से बढ़ रहा है. इसके अलावा कई ऐसे भी देश हैं, जो आधिकारिक तौर पर बौद्ध देश माने जाते हैं. इनके यहां संविधान में ही बौद्ध धर्म को राष्ट्रधर्म का दर्जा मिला हुआ है. ये देश हैं कंबोडिया, लाओस, भूटान, म्यांमार, श्रीलंका और थाईलैंड.
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