जानिए क्या है NDRF जिसने विशाखापट्टनम में बचाई हजारों की जान

विशाखापट्टम में त्वरित कार्रवाई कर एनडीआएफ ने हजारों की संख्या में लोगों को मौत के मुंह से निकाल लिया है.
विशाखापट्टम में त्वरित कार्रवाई कर एनडीआएफ ने हजारों की संख्या में लोगों को मौत के मुंह से निकाल लिया है.

NDRF की टीम ने हजारों लोगों को रेस्क्यू कर उनकी जान बचाई और अस्पतालों तक पहुंचाया है. यह पहली बार नहीं है जब NDRF ने आपदा के समय में बड़े स्तर पर लोगों की जान बचाई है. बीते सालों में ऐसा कई बार हुआ है.

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आंध्र प्रदेश के विशाखापट्टनम में 7 मई का एक बुरी सुबह लेकर आया. विशाखापट्टनम के आरआर वेंकटपुरम (RR Venkatapuram) गांव में एलजी पॉलिमर इंडस्ट्री में रासायनिक गैस रिसाव की खबर आई. इसके बाद आंखों में जलन और सांस लेने में तकलीफ की शिकायत के बाद लोगों को अस्पताल पहुंचाया गया. अब तक इस गैस रिसाव की वजह से कम से कम 5000 से ज्यादा लोग बीमार हो गए हैं और 11 की मौत हो गई है. इस बीच राष्ट्रीय आपदा मोचन बल यानी NDRF ने एक बार फिर संकट मोचक की भूमिका निभाई है. NDRF की टीम ने हजारों लोगो रेस्क्यू कर उनकी जान बचाई और अस्पतालों तक पहुंचाया है. यह पहली बार नहीं है जब NDRF ने आपदा के समय में बड़े स्तर पर लोगों की जान बचाई है. बीते कुछ सालों में ऐसा कई बार हुआ है.

क्यों पड़ी NDRF की जरूरत
भारत में 90 के दशक के आखिर में एक ऐसी फोर्स की जरूरत महसूस होने लगी, जो तमाम तरह की आपदाओं में जाकर लोगों को बचा सके. यह फोर्स ऐसी हो जो इसके लिए खास तरह से तैयार की गई हो. दुनिया में इस तरह की कई फोर्स बहुत बढ़िया काम कर रहे थे. 1999 के ओडिशा के सुपर चक्रवात, 2001गुजरात भूकंप और 2004 में आई सूनामी के बाद भारत ने तय किया कि वो इस तरह की फोर्स बनाएगा, जो आपदा के दौरान लोगों को राहत पहुंचाने में एक्सपर्ट हो.

कब बनी एनडीआरएफ
26 दिसंबर 2005 को आपदा मोचन एक्ट के आधार पर नेशनल डिजास्टर मैनेजमेंट अथारिटी बनाई गई. जिसकी योजना, नीतियों और गाइडलाइंस के आधार पर नेशनल डिजास्टर रिस्पांस फोर्स (एनडीआरएफ) का गठन किया गया. जो प्राकृतिक और मानव निर्मित आपदाओं से एक्सपर्ट के रूप में तुरंत रिस्पांस दे सकें. वर्ष 2006 में आठ बटालियनों के साथ एनडीआरएफ को गठित किया गया.



विशाखापट्टन में NDRF की टीम ने लोगों को घरों से निकाल-निकाल कर अस्पताल पहुंचाया है.


क्या है क्षमता
फिलहाल एनडीआरएफ की क्षमता 12 बटालियनों की है. हर बटालियन में 1149 जवान होते हैं. जो पूरी तरह से केवल आपदा संबंधी स्थितियों से निपटने के लिए तैनात किये जाते हैं. पहले इन्हें कभी कभार कानून और व्यवस्था की स्थिति को संभालने के लिए भी तैनात किया जाता था लेकिन बाद में एनडीआरएफ के नियमों में बदलाव किया गया. 14 फरवरी 2008 से वो केवल आपदा संबंधी दायित्वों के लिए निर्धारित कर दिये गए.

किस तरह होती है भर्ती
एनडीआरएफ में सीधी भर्ती नहीं होती. बल्कि एनडीआरएफ में अद्धसैन्य बलों से बटालियनों को डेपुटेशन के आधार पर तैनात किया जाता है. फिलहाल एनडीआरएफ में जो अर्द्धसैनिक बल की बटालियन तैनात हैं, वो इस तरह हैं
- सीमा सुरक्षा बल - तीन बटालियन
-केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल - तीन बटालियन
- केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल - दो बटालियन
- इंडो-तिब्बत सीमा पुलिस - दो बटालियन
- सशस्त्र सीमा बल - दो बटालियन

हर बटालियन में सर्च, बचाव और राहत के एक्सपर्ट होते हैं. इनमें साथ ही इंजीनियर्स, तकनीकविद, इलैक्ट्रिशियन, डॉग स्क्वॉड और मेडिकल के जानकार लोग होते हैं.

कितने हैं सेंटर
देशभर में एनडीआरएफ के 12 केंद्र हैं. जहां इनकी अलग अलग बटालियन तैनात रहती हैं. इन सभी जगहों पर उनकी ट्रेनिंग की खास व्यवस्था है. हालांकि इन केंद्रों में कुछ जगहों पर खास ट्रेनिंग भी होती है, जिसमें सभी बटालियनों के जवानों को भेजा जाता है. ये केंद्र इस तरह हैं, साथ ही वो किन राज्यों को आपदा की स्थिति में कवर करते हैं

1. पहली बटालियन - गुवाहाटी - असम (24 जिले), मेघालय, मिजोरम, त्रिपुरा
2. दूसरी बटालियन - हरिंघाटा (बंगाल) - सिक्किम, बंगाल
3. तीसरी बटालियन - मुंडाली (ओडिशा) - ओडिशा, छत्तीसगढ़
4. चौथी बटालियन - अर्कोनाम (तमिलनाडु) - अंडमान, केरल, पुडुचेरी,लक्षदीव,तमिलनाडु
5. पांचवीं बटालियन - पुणे - महाराष्ट्र, गोवा
6. छठी बटालियन - वडोदरा (गुजरात) - गुजरात, राजस्थान, दमन,दादर,नागर हवेली
7. सातवीं बटालियन - भटिंडा (पंजाब) - चंडीगढ़, हिमाचल, पंजाब, जम्मू-कश्मीर
8. आठवीं बटालियन - गाजियाबाद - दिल्ली, हरियाणा, उत्तराखंड, उप्र (दो जिले)
9. नौवीं बटालियन - पटना - बिहार, झारखंड
10 दसवीं बटालियन - विजयवाडा (आंध्र) - आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, कर्नाटक
11. ग्यारहवीं बटालियन - वाराणसी - मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश (73 जिले)
12. बारहवीं बटालियन - दोमुख (असम) - असम (नौ जिले), अरुणाचल, मणिपुर, नगालैंड

ट्रेनिंग
- पिछले कुछ बरसों में एनडीआरएफ का एक मोड्यूल और ट्रेनिंग तय कर दी गई है. एनडीआरएफ में रहने वाले हर जवान को इसमें दक्ष होना जरूरी है.

- ये ट्रेनिंग वाटर, नेचुरल डिजास्टर, एयर रेस्क्यू (हेली बोर्न), और अलग अलग आपदाओं को ध्यान में रखकर दी जाती है. ये काफी कड़ी ट्रेनिंग होती है. समय समय पर छांटे गए जवानों को विदेश में ट्रेनिंग के लिए भेजा जाता है. हजारों जवान ये ट्रेनिंग ले चुके हैं

- ये ट्रेनिंग इस तरह होती है कि एनडीआरएफ का हर जवान उच्च तरीके से दक्ष और रिलीफ आपरेशंस की क्षमता रखता हो. आप खुद देख रहे होंगे कि केरल में किस तरह हवा और पानी से ये जवान बाढ़ में फंसे लोगों को बचा रहे हैं.

एनडीआरएफ की टीम ने नेपाल में भूकंप के दौरान भी हजारों लोगों की जान बचाई थी.


अब तक कितने अभियान
अगर विशाखापट्टनम की घटना को छोड़ दें तो NDRF ने अब तक 74 से ज्यादा ऑपरेशन को अंजाम दे चुकी है. ये बाढ़, भूस्खलन, प्राकृतिक आपदा, भवन ढहने जैसी आपदाओं में दिए गए. हमेशा सभी ने एनडीआरएफ के काम और भूमिका की सराहना की है.

पहला बड़ा आपरेशन
एनडीआऱएफ का पहला बड़ा टेस्ट वर्ष 2008 में बिहार में कोसी नदी में आई बाढ़ के दौरान हुआ. टीम ने तुरंत वहां पहुंच कर युद्ध स्तर पर काम शुरू किया. देखते ही देखते हवा से 153 हाईस्पीड मोटरबोट उतारी गईं, जिससे 780 बाढ़ग्रस्त इलाकों में राहत और बचाव का काम किया गया. इसमें एनडीआरएफ के तीन बटालियन के बाढ़ एक्सपर्ट्स ने हिस्सा लिया. पांच जिलों में फैले इस आपरेशन में एक लाख से ज्यादा प्रभावित लोगों को बचाकर सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया.

मुख्य अभियान
- जनवरी 2010 में बेल्लारी में छह मंजिला गिर गई. टीम तुरंत वहां पहुंची और सात दिन लगातार राहत के काम करती रही. मलबे से 20 लोगों को जिंदा निकाला गया जबकि 29 शवों को बाहर निकाला.

- अप्रैल 2012 में पंजाब के जालंधर में बहुमंजिली फैक्ट्री बिल्डिंग गिर गई. एनडीआरएफ ने मलबे से 12 लोगों को जिंदा निकाला. 19 शव भी निकाले गए. ये काम बहुत कठिन था.

- 46 एनडीआरएफ जवानों को मार्च-अप्रैल 2011 में जापान में एक आपदा में भेजा गया, जहां उनके काम की खूब तारीफ की गई

- सितंबर 2014 में जब जम्मू-कश्मीर में भयंकर बाढ आई तब एनडीआरएफ ने बड़े पैमाने पर राहत और बचाव का अभियान चलाया. टीम श्रीनगर पहुंची. तब बाढ़ के चलते पुल टूट गए थे. सड़कें बह गईं थीं. लोगों के घर डूबे हुए थे.बड़े पैमाने पर नुकसान हुआ था. लाखों लोगों ने अपने घरों की छतों पर शरण ली हुई थी. सबसे खराब बात ये भी हुई थी कि संचार और बिजली आपूर्ति पूरी तरह ध्वस्त हो चुकी थी. इसमें एनडीआरएफ की 23 टीमों ने 150 नौकाओं की मदद से 50 हजार से कहीं ज्यादा लोगों को बचाया साथ ही 80 टन राहत का सामान वितरित किया.

- 25 अप्रैल 2015 को नेपाल में 7.8 तीव्रता के भूकंप ने वहां तबाही मचा दी थी, एनडीआरएफ की टीम वहां सबसे पहले पहुंची और बचाव का काम शुरू किया.

केरल में आई भीषण बाढ़ के दौरान 2018 में एनडीआरएफ की टीम ने बड़ा रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया था.


वालिंटियर ट्रेनिंग भी
एनडीआरएफ स्थानीय लोगों को भी बड़े पैमाने पर भी ट्रेनिंग देने का काम करती है ताकि वो आपदा के दौरान वालिंटियर के रूप में मदद कर सकें. एनडीआरएफ हर साल हजारों लोगों को इस काम के लिए ट्रेनिंग देती है. पिछले कुछ सालों में करीब 40 साल लोग वालिंटियर के तौर पर यहां के केंद्रों से आपदा के दौरान काम में मदद के लिए ट्रेनिंग ले चुके हैं.

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