Lok Sabha Election 2019: EVM पर तस्वीरों और VVPAT के साथ इन चुनावों में पहली बार होंगे ये काम

प्रतीकात्मक तस्वीर

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इन चुनावों में EVM और VVPAT मशीनों को ले जाने वाली गाड़ियों में GPS का इस्तेमाल भी किया जाएगा ताकि उन्हें ट्रैक किया जा सके.

  • News18Hindi
  • Last Updated: March 11, 2019, 1:25 PM IST
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2019 के आम चुनावों में बहुत सी बातें पहली बार होने वाली हैं. चुनाव आयोग के अधिकारियों ने कहा है कि बिहार, उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल के चुनाव सात चरण में चुनाव होंगे. ऐसा हिंसा आदि की घटनाओं के चलते किया गया है. वहीं सबसे ज्यादा सुरक्षा के बीच जम्मू और कश्मीर के चुनाव पांच चरणों में कराए जाएंगे. इन चुनावों में देखने को मिलेंगे ये बड़े बदलाव -

# 2019 के लोकसभा इलेक्शन में वोटर पहली बार इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVMs) पर पहली बार पार्टी के चुनाव चिन्ह के साथ उम्मीदवारों की तस्वीरें भी होंगीं. यह बात निर्वाचन आयोग ने रविवार को चुनाव घोषणा के साथ ही बताई. ऐसा मतदाताओं के कंफ्यूजन को दूर करने के लिए किया जा रहा है.

# चुनावों में पारदर्शिता बढ़ाने के लिए निर्वाचन आयोग ने 2019 आम चुनावों से पहली बार इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVMs) के साथ ही वोटर वैरीफाईएबल पेपर ऑडिट ट्रेल (VVPAT) के इस्तेमाल को भी मंजूरी दी है. यह सारे ही पोलिंग बूथ पर मौजूद होंगीं.



# वोट डालने के बाद मतदाता को 6 सेकेंड तक VVPAT मशीन में एक पर्ची दिखेगी जिसे देखकर वोटर जान सकेंगे कि वोट सही उम्मीदवार को गया है या नहीं. 6 सेकेंड बाद यह पर्ची एक सील कंटेनर में गिर जाएगी. सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद इन मशीनों का इस्तेमाल चुनावों में ज्यादा पारदर्शिता लाने के लिए किया जा रहा है. हालांकि विपक्षी दलों ने इन VVPAT पर्चियों के 50 फीसदी को गिनकर ही चुनावी नतीज़ों की घोषणा की बात की थी, लेकिन चुनाव आयोग इस मांग पर खामोश रहा.
# हालांकि VVPAT का इस्तेमाल पहले राज्यों के विधानसभा चुनावों और उपचुनावों के लिए किया जा चुका है लेकिन यह पहली बार होगा जब उन्हें आम चुनावों में प्रयोग किया जाएगा.

# पिछले दिनों विधानसभा चुनावों के वक्त VVPAT और EVM के इस्तेमाल कोर लेकर हुए विवादों के बाद चुनाव आयोग ने इन मशीनों को ले जाने वाली गाड़ियों में GPS लगाने का फैसला किया है. ऐसा इन वाहनों की गतिविधियों पर नज़र रखने के लिए किया जाएगा.

# इन चुनावों में 2014 के आम चुनावों के मुकाबले साढ़े आठ करोड़ ज्यादा वोटर हिस्सा लेंगे. जिनके लिए देश भर में 10 लाख पोलिंग बूथ बनाए जाएंगे.

# उम्मीदवारों को न सिर्फ अपने पिछले पांच साल के इनकम-टैक्स रिटर्न, विदेशों में संपत्ति और पैन की जा नकारी देनी होगी बल्कि अपने पार्टनर और परिवार की संपत्ति की जानकारी भी देनी होगी.

# निर्वाचन आयोग की एक नई नोटिफिकेशन के अनुसार कैंडिडेट्स को विदेशों में अपनी संपत्ति के साथ कर्ज की जानकारी भी देनी होगी.

# केवल फोटो वोटर स्लिप को वोट डालने के पहचान पत्र के तौर पर नहीं माना जाएगा. चुनाव आयोग ने 11 ऐसे डॉक्यूमेंट्स की लिस्ट जारी की है, जिसे वोट डालने के लिए पहचान-पत्र के तौर पर स्वीकार किया जाएगा. इसमें- पासपोर्ट, ड्राइविंग लाइसेंस, सरकारी नौकरी का पहचान पत्र, फोटो लगी पासबुक, पैन कार्ड, रजिस्ट्रार जनरल ऑफ इंडिया का जारी किया स्मार्ट कार्ड, मनरेगा कार्ड, हेल्थ इंश्योरेंस स्मार्ट कार्ड, पेंशन के कागजात, एमपी/ एमएलए को जारी होने वाली आईडी और आधार कार्ड शामिल होंगे. इन सारे ही डॉक्यूमेंट्स पर फोटो का होना बहुत जरूरी है.

# चुनाव आयोग ने चुनावी खर्चों का हिसाब रखने के लिए भी कई सारे कदम उठाने का फैसला लिया है. इसमें 3 सदस्यीय कमेटी का गठन भी है जो फ्लाइंग स्क्वायड और सर्विलांस टीम द्वारा छापेमारी के वक्त नागरिकों को होने वाली असुविधाओं पर नज़र रखेगी. कमेटी हर जब्ती के केस पर नज़र रखेगी और अगर सीज किए गए पैसे का किसी राजनीतिक दल से कोई कनेक्शन नहीं पाया जाता तो उसे संबंधित व्यक्ति को वापस लौटा दिया जाएगा.

# चुनावी खर्चों पर लगाम लगाने के लिए चुनाव आयोग, चुनाव में गाड़ियों पर खर्च, कैंडिडेट के बूथ पर होने वाले खर्च और अख़बारों में छपने वाले विज्ञापनों के आदि के खर्च को पार्टी का खर्च न मानकर कैंडिडेट का खर्च मानेगा.

# अरुणाचल प्रदेश, गोवा और सिक्किम को छोड़कर पूरे देश में उम्मीदवारों के खर्च की सीमा 70 लाख तय की गई है. जहां बाकि सारे राज्यों में खर्च की सीमा 54 लाख तय है.

# इन चुनावों में चुनाव आयोग जमीनी चुनाव प्रचार के साथ सोशल मीडिया पर भी चुनावी आचार संहिता का पालन किए जाने पर जोर देगा. इसके लिए उसने कई सोशल मीडिया प्लेटफ़र्म से बात भी की है.

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