जानें कितना खतरनाक है PFI, जिसे बैन करने की मांग कर रही है यूपी सरकार

जानें कितना खतरनाक है PFI, जिसे बैन करने की मांग कर रही है यूपी सरकार
सीएए और एनआरसी के खिलाफ यूपी के कई शहरों में हिंसा भड़क उठी थी. (फाइल फोटो)

पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI) के बारे में कहा जाता है कि ये एक कट्टर इस्लामिक संगठन है. इसको लेकर कुछ सनसनीखेज खुलासे हुए हैं...

  • News18Hindi
  • Last Updated: January 1, 2020, 4:41 PM IST
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उत्तर प्रदेश सरकार (UP Government) ने पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (Popular Front Of India) नाम के संगठन को बैन करने की मांग की है. इस बारे में यूपी सरकार ने केंद्रीय गृहमंत्रालय को पत्र लिखा है. नागरिकता संशोधन कानून (CAA) के विरोध में यूपी मे जिस तरह के हिंसक विरोध प्रदर्शन हुए, उसके पीछे पीएफआई (PFI) का हाथ बताया जा रहा है. यूपी के डीजीपी ओपी सिंह ने बताया है कि राज्य के कई इलाकों में दंगा और तोड़फोड़ करने के आरोप में पीएफआई के 25 सदस्यों को गिरफ्तार किया गया है. पीएफआई के बारे में कुछ सनसनीखेज खुलासे हुए हैं.

यूपी पुलिस ने पीएफआई के 3 सदस्यों को लखनऊ से गिरफ्तार किया, इन लोगों में संगठन का स्टेट हेड वसीम भी शामिल है. इसके अलावा शामली से 18 और मेरठ से 4 सदस्यों को गिरफ्तार किया गया. पुलिस के पास इस बात के पुख्ता सबूत हैं कि इन्होंने CAA और NRC के खिलाफ लोगों के भड़काने का काम किया और विरोध प्रदर्शनों में हिंसा की.

यूपी के डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्या ने इस संगठन के खिलाफ सख्त लहजे में कहा कि यूपी में तोड़फोड़ और हिंसा के पीछे पीएफआई का हाथ रहा है. ऐसे संगठन को यहां फलने-फूलने नहीं दिया जाएगा और इसे यहां बैन किया जाएगा.



पीएफआई के ISIS और सिमी से लिंक होने का दावा
पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया के बारे में कहा जाता है कि ये एक कट्टर इस्लामिक संगठन है. इसको लेकर कुछ सनसनीखेज खुलासे हुए हैं. नेशनल इनवेस्टिगेशन एजेंसी इस संगठन के ISIS और सिमी के साथ संपर्कों की तलाश में जुटा है. एजेंसियों को कुछ चौंकाने वाली जानकारी मिली है.

पीएफआई के बारे में कहा जाता है कि उसका केरल मॉड्यूल ISIS के लिए काम कर रहा था. वहां से इसके सदस्यों ने सीरिया और इराक में ISIS को जॉइन किया. इंडियन एक्सप्रेस ने एक रिपोर्ट में इस बात का खुलासा किया है.

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यूपी में हुई हिंसा के पीछे PFI का हाथ बताया जा रहा है


मई 2019 में भारतीय खुफिया एजेंसियों ने पीएफआई के कई ऑफिसों पर छापे मारे. खुफिया एजेंसी के अधिकारियों को शक था कि इसके सदस्यों ने 21 अप्रैल को ईस्टर के मौके पर श्रीलंका में हुए बम ब्लास्ट के मास्टरमाइंड का ब्रेन वॉश किया था. श्रीलंका के इस बम धमाके में 250 लोगों की मौत हुई थी.

PFI के ऊपर राज्य में राजनीतिक हत्याओं का आरोप
पीएफआई के ऊपर ISIS से लिंक होने के अलावा भी कई तरह के आरोप हैं. आरोप है कि इस संगठन का हाथ कई राजनीतिक हत्याओं और धर्म परिवर्तन के मामलों में है. द प्रिंट की एक रिपोर्ट के मुताबिक पीएफआई का नाम लव जिहाद के मामलों में भी आया है.

2017 में केरल की पुलिस ने एनआईए को लव जिहाद के 94 मामले सौंपे थे. बताया जाता है कि लव जिहाद के इन मामलों के पीछे पीएफआई के 4 सदस्यों का हाथ था. एनआईए को शक था कि 94 शादियों में से 23 पीएफआई ने अपनी निगरानी में करवाई थी.

पीएफआई के लिंक भारत में बैन स्टूडेंट इस्लामिक मूवमेंट ऑफ इंडिया यानी सिमी से भी रहे हैं. पीएफआई के कुछ सदस्य पहले सिमी के सक्रिय कार्यकर्ता रह चुके हैं. द प्रिंट के मुताबिक पीएफआई के राष्ट्रीय महासचिव अब्दुल रहमान पहले सिमी का राष्ट्रीय सचिव रह चुका है. जबकि पीएफआई का राज्य संगठन सचिव अब्दुल हमीद इसके पहले 2001 में सिमी में इसी पद पर था. बताया जाता है कि 2006 में सिमी को बैन कर दिए जाने के बाद इसके सदस्य पीएफआई में आ गए.

पीएफआई पर सनसनीखेज आरोप
2010 में पीएफआई पर आरोप लगा कि इसके सदस्यों ने एक मलयाली प्रोफेसर टी जे जोसेफ का दाहिना हाथ काट डाला था. क्योंकि प्रोफेसर ने पैगंबर पर सवाल उठाए थे. 2012 में केरल की सरकार ने हाईकोर्ट में एक एफिडेविट दी थी. इसमें आरोप लगाया गया था कि पीएफआई के सदस्यों का सीपीआई(एम) और आरएसएस से जुड़े 27 राजनीतिक हत्याओं में हाथ था. सरकार ने कहा कि ज्यादातर हत्याएं सांप्रदायिक रंग देकर की गई थी. इसके अलावा भी इनकी 86 इसी तरह की हत्याएं करने की योजना थी. ये एफिडेविट कन्नूर में एक एबीवीपी से जुड़े छात्र सचिन गोपाल की हत्या के बाद दी गई थी.

2016 में कर्नाटक के एक स्थानीय आरएसएस नेता रुद्रेश की दो मोटरसाइकिल सवार लोगों ने हत्या कर दी थी. बेंगलुरु के शिवाजीनगर में हुए इस हत्या में पुलिस ने चार लोगों को गिरफ्तार किया था. ये चारों पीएफआई से जुड़े हुए थे.

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NIA के पास PFI के काले कारनामों की जानकारी है


द पायनियर की एक रिपोर्ट के मुताबिक 2013 में पीएफआई पर उत्तरी कन्नूर में एक ट्रेनिंग कैंप चलाने का आरोप लगा. कन्नूर पुलिस ने कहा कि कैंप से उन्हें तलवार, बम, आदमी की तरह दिखने वाले लकड़ी के पुतले, देसी पिस्तौल और आईईडी ब्लास्ट में काम आने वाली चीजें मिलीं. कैंप से कुछ बैनर पोस्टर भी बरामद हुए, जो आतंकी गतिविधि में हिस्सा लेने के लिए प्रेरित करने वाली थी.

2012 में इस ग्रुप का नाम असम के कोकराझार में आया. कहा गया कि पीएफआई के सदस्यों ने जानबूझकर इलाके में अफवाह फैलाकर दंगा फैलाया.

कैसे बनी पीएफआई
पीएफआई केरल से संचालित होने वाला एक कट्टर इस्लामिक संगठन है. पीएफआई की स्थापना 1993 में बने नेशनल डेमोक्रेटिक फ्रंट से निकलकर हुई है. 1992 में बाबरी मस्जिद ढहने के बाद नेशनल डेमोक्रेटिक फ्रंट नाम से एक संगठन बना था.

एनआईए के मुताबिक 92 में बाबरी मस्जिद ढहने के बाद केरल कट्टर इस्लामिक संगठनों का पनाहगाह बन गया. इसी दौर में वहां नेशनल डेमोक्रेटिक फ्रंट बनी थी. 2006 में नेशनल डेमोक्रेटिक फ्रंट का पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया में विलय हो गया. केरल में पीएफआई की मजबूत स्थिति है. हालांकि वो पूरे देश में फैले हुए हैं. एनआईए के मुताबिक देश के 23 राज्यों में पीएफआई की पैठ है. केरल और कर्नाटक में इन्होंने अपने राजनीतिक संपर्क भी बना लिए हैं.

पीएफआई का दावा है कि वो मुस्लिम समुदाय की भलाई के लिए काम करती है. इनका कहना है कि ये मुसलमानों के हक और अधिकार की आवाज को बुलंद करती है. हालांकि असलियत इसके ठीक उलट है.

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