क्या होता है पाई डे, जो गणित प्रेमियों ने एक दिन पहले दुनियाभर में मनाया

पूरी दुनिया में गणित के क्षेत्र से जुड़े लोगों ने पाई डे मनाया.

पूरी दुनिया में 14मार्च को पाई दिवस मनाया गया. अब ये दुनियाभर में गणित के अंतरराष्ट्रीय दिवस के तौर पर मनाया जाता है. पाई का महत्व हमारे लिए इसलिए ज्यादा है, क्योंकि इसका ताल्लुक प्राचीन भारत और तब के गणितज्ञों से भी है.

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    हर साल 14 मार्च को दुनियाभर में गणित यानि मैथमेटिक्स के प्रेमी और उससे जुड़े लोग पाई डे मनाते हैं. पाई मैथ मैटिक्स में बहुत मायने रखता है. बहुत सी गणनाओं में इसका इस्तेमाल होता है. दुनियाभर में पाई डे मनाने वाले लोगों में कुछ उत्साही लोगों ने तो पाई आकार की खाद्य वस्तुएं भी इस मौके पर खाईं.

    दरअसल पाई डे मनाने की शुरुआत 1988 से हुई. भौतिक विज्ञानी लैरी शॉ ने इसे बड़े पैमाने पर अमेरिका के सान फ्रांसिस्को में आयोजित किया. 2019 में यूनेस्को की 40वीं महासभा में पाई को अंतरराष्ट्रीय मैथ मेटिक्स डे के तौर पर मनाने का फैसला किया गया.

    भारतीय वैज्ञानिक ने किया आविष्कार 

    ये भी कहा जाता है कि π का अविष्कार भारतीय वैज्ञानिक आर्यभट ने किया था, उन्होंने देखा जब भी किसी व्रत की परिधि और उसका व्यास का अनुपात निकला जाता हैं उसका मान हमेशा सामान आता हैं जो है 22/7.

    ये 14 मार्च को ही क्यों

    हर साल ये दिन 14 मार्च को ही मनाया जाता है. ये 14 मार्च को ही इसलिए मनाया जाता है, क्योंकि ये दिन पाई की कीमत को जाहिर करता है. इस दिन पूरी दुनिया में मैथ से जुड़े बहुत से इवेंट आयोजित किए जाते हैं. यह एक अपरिमेय राशि है. इसकी वैल्यू 22/7 ही होती है.

    गीजा का पिरामिड बनाने वाले ज्ञान रखते थे
    2589–2566 ई. पूर्व बने गीजा की महान पिरामिड का परिमाप 1760 क्यूबिक और ऊंचाई 280 क्यूबिक थी; जिसका अनुपात 1760/280 ≈ 6.2857 पाई के मान का लगभग दोगुना है. इस अनुपात के आधार पर, कुछ मिस्रविद्य मानते हैं कि पिरामिड बनाने वाले π का ज्ञान रखते थे. वृत के गुणधर्मों को निगमित करने वाले पिरामिड जान - बूझकर बनाए गए

    भारतीय गणित में पाई
    भारत में ई. पूर्व 600 में शुल्ब सूत्रों (संस्कृत ग्रन्थ जो गणितिय गणनाओं में बहुत पहुँचे हुए हैं।) में π को (9785/5568)2 ≈ 3.088 लिखा गया. ई. पूर्व 159 अथवा शायद इससे भी पहले में भारतीय स्रोत π को 3.1622 लिखते थे.

    आर्यभट ने क्या श्लोक पाई का दिया

    आर्यभट ने निम्नलिखित श्लोक में पाई का मान दिया है-
    "चतुराधिकं शतमष्टगुणं द्वाषष्टिस्तथा सहस्त्राणाम्।
    अयुतद्वयस्य विष्कम्भस्य आसन्नौ वृत्तपरिणाहः॥"

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