• Home
  • »
  • News
  • »
  • knowledge
  • »
  • जब आप पासपोर्ट के लिए अप्लाई करते हैं, तो पुलिस क्या वेरिफाई करती है?

जब आप पासपोर्ट के लिए अप्लाई करते हैं, तो पुलिस क्या वेरिफाई करती है?

मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में पासपोर्ट की वेबसाइट पर फर्जी लिंक एक्टिव है. (सांकेतिक तस्वीर)

मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में पासपोर्ट की वेबसाइट पर फर्जी लिंक एक्टिव है. (सांकेतिक तस्वीर)

संविधान व कानून (Law of India) हर भारतीय को यात्रा करने का लोकतांत्रिक अधिकार (Democratic Right) देता है. इस अधिकार के तहत जब विदेश आना-जाना हो, तो पासपोर्ट अनिवार्य है. हालांकि यह पासपोर्ट जारी किए जाने से पहले लंबी जांच पड़ताल होती है.

  • Share this:

    बिहार और उत्तराखंड सरकारों (Bihar Government) ने पासपोर्ट के लिए होने वाले पुलिस वेरिफिकेशन में आवेदकों के राजनीतिक नज़रिये और गतिविधियों (Political Views) की निगरानी की भी बात कही. इसका मतलब इस चेतावनी के तौर पर समझिए कि अगर आप कानून व्यवस्था के खिलाफ यानी चक्का जाम जैसे किसी किस्म के उग्र विरोध प्रदर्शनों का हिस्सा रहे हैं तो वेरिफिकेशन में आपको क्लीन चिट मिलना मुश्किल हो जाएगा. वहीं उत्तराखंड सरकार सोशल मीडिया (Social Media) पर ‘एंटी नेशनल’ (Anti-National) और ‘एंटी सोशल’ पोस्ट का ब्योरा रखेगी और पासपोर्ट वेरिफिकेशन के मामलों में लोगों को इस कसौटी पर परखा जाएगा.

    अब इन आदेशों के लोकतंत्र के खिलाफ होने जैसे पहलुओं पर तो बहस जारी है ही, लेकिन जानकारी से जुड़ा एक अहम सवाल यह है कि पासपोर्ट के दौरान पुलिस क्या वेरिफिकेशन करती है? आप जानते हैं कि अंतर्राष्ट्रीय यात्राओं के लिए पासपोर्ट अनिवार्य होता है, लेकिन इसे जारी किए जाने से पहले आवेदक के पते, पहचान और क्रिमिनल रिकॉर्ड संबंधी चेकिंग होती है.

    ये भी पढ़ें:- बिहार में दुनिया की सबसे महंगी सब्ज़ी की खेती, जानें क्यों है चांदी से ज़्यादा कीमत?

    क्या होता है पुलिस वेरिफिकेशन?
    जब आप पासपोर्ट के लिए आवेदन करते हैं, तो आपकी दी गई सूचनाओं को जांचने के लिए पुलिस व्यक्तिगत तौर पर आवेदक के बताए पते पर पहुंचती है. बताए गए पते पर कबसे हैं, आपका क्रिमिनल रिकॉर्ड क्या रहा है, जैसी बातें पुलिस जांचती है कि ये आवेदन के साथ कितनी सही हैं. अगर आवेदक के खिलाफ कोई पुलिस या कोर्ट केस पेंडिंग हो तो पुलिस इसके बारे में पूरी जानकारी लेकर पासपोर्ट दफ्तर को पहुंचाती है.

    passport seva, passport office, passport status, passport renewal, पासपोर्ट अप्लाई, पासपोर्ट पुलिस वेरिफिकेशन, पासपोर्ट पुलिस वेरिफिकेशन टाइम, पासपोर्ट ऑफिस

    वेरिफिकेशन के बाद पुलिस पासपोर्ट दफ्तर को अपनी सलाह या सिफारिश भेजती है.

    आम तौर पर पुलिस जांच तीन तरह से रिपोर्ट होती है : क्लीयर, तथ्यपूर्ण या अनुशंसनीय नहीं. पहली रिपोर्ट में सब कुछ ओके होता है. दूसरी रिपोर्ट में पुलिस एक तरह से फैसला पासपोर्ट दफ्तर के विवेक पर छोड़ती है और तीसरी रिपोर्ट का मतलब होता है कि पेश किए गए दस्तावेज़ उचित नहीं थे इसलिए पुलिस पासपोर्ट न जारी करने की सिफारिश करती है. हालांकि पासपोर्ट दोबारा इशू किए जाने पर स्थितियां सामान्य हों, तो वेरिफिकेशन नहीं होता.

    ये भी पढ़ें:- म्यांमार या बर्मा : एक देश, दो अलग नाम, क्या है मतलब और कहानी?

    किस क्रिमिनल रिकॉर्ड को जांचती है पुलिस?
    पुलिस केवल उन्हीं मामलों को मद्देनज़र रखती है जिनमें एफआईआर या किसी तरह की कोर्ट कार्यवाही हो. बताया जाता है कि पासपोर्ट एक्ट 1967 या पासपोर्ट रूल्स 1980 में कहीं ऐसा दर्ज नहीं है कि पुलिस आवेदक के सामाजिक या राजनीतिक बर्ताव को जांचे और इसे वैधानिक चेतावनी के तौर पर दर्ज करे. ट्रैफिक सिगनल या अन्य ट्रैफिक नियम तोड़े जाने के मामले भी पासपोर्ट जांच में रोड़ा नहीं होते.

    क्या होता है, जब पुलिस निगेटिव रिपोर्ट दे?
    यह बात ध्यान देने की है कि पुलिस वेरिफिकेशन रिपोर्ट केवल सुझाव दे सकती है. पासपोर्ट जारी किए जाने संबंधी निर्णय लेने का अधिकार विदेश मंत्रालय के दफ्तर के पास ही सुरक्षित रहता है. एक पुलिस अफसर के हवाले से बताया गया कि पुलिस अगर असामाजिक या गैर कानूनी ग​तिविधियों के चलते किसी आवेदन पर ‘नॉट रिकमंडेड’ रिपोर्ट भी दे तो भी कोर्ट के आदेश से आवेदकों को पासपोर्ट जारी किए जा सकते हैं.

    passport seva, passport office, passport status, passport renewal, पासपोर्ट अप्लाई, पासपोर्ट पुलिस वेरिफिकेशन, पासपोर्ट पुलिस वेरिफिकेशन टाइम, पासपोर्ट ऑफिस

    पासपोर्ट जारी करने संबंधी निर्णय का अधिकार केंद्र के विभाग के पास ही होता है.

    क्यों कर सकती है पुलिस निगेटिव सिफारिश?
    पासपोर्ट एक्ट को देखें तो इन स्थितियों में किसी आवेदक का पासपोर्ट आवेदन खारिज किया जा सकता है :

    1. अगर वो वास्तव में भारत का नागरिक न हो; भारत की संप्रभुता व अखंडता को नुकसान पहुंचाने वाली गतिविधियों से जुड़ा हो; भारत की सुरक्षा के लिए उसका भारत से जाना खतरा हो; यदि आवेदक के विदेश जाने से उस देश के साथ भारत के संबंधों को लेकर जोखिम हो; या तो केंद्र सरकार की नज़र में आवेदक को पासपोर्ट जारी करना जनहित में न हो.

    ये भी पढ़ें:- मिग-29 और स्पेस फ्लाइट की ट्रेनिंग ले चुकी कश्मीरी महिला पायलट से मिलिए

    2. अगर आवेदक के खिलाफ समन, अरेस्ट वॉरंट या कोर्ट का आदेश जारी हो तो भी पासपोर्ट रोका या रद्द किया जा सकता है. यही नहीं, देश के किसी कोर्ट में आवेदक को अगर किसी मामले में दोषी ठहराया जाए और सज़ा दी जाए तो भी आवेदन के पांच साल के भीतर उसे रद्द किया जा सकता है.

    इन हालात में क्या कोई रास्ता है?
    कई अदालतें कई मौकों पर कह चुकी हैं कि सिर्फ एफआईआर या कोर्ट केस के आधार पर किसी को पासपोर्ट से तब तक वंचित नहीं किया जा सकता, जब तक कोर्ट इस तरह के निर्देश न दे. कोर्ट की इजाज़त लेकर ऐसा आवेदक भी विदेश यात्रा कर सकता है, जिसके खिलाफ कोई आपराधिक मामला हो.

    पढ़ें Hindi News ऑनलाइन और देखें Live TV News18 हिंदी की वेबसाइट पर. जानिए देश-विदेश और अपने प्रदेश, बॉलीवुड, खेल जगत, बिज़नेस से जुड़ी News in Hindi.

    हमें FacebookTwitter, Instagram और Telegram पर फॉलो करें.

    विज्ञापन
    विज्ञापन

    विज्ञापन

    टॉप स्टोरीज