Explained: क्या है प्रोनिंग, जिससे कोरोना मरीजों का ऑक्सीजन लेवल बढ़ सकता है?

पेट के बल लेटना ही प्रोनिंग कहलाता है- सांकेतिक फोटो ( news18 English via Shutterstock)

पेट के बल लेटना ही प्रोनिंग कहलाता है- सांकेतिक फोटो ( news18 English via Shutterstock)

कोरोना संक्रमितों के खून में ऑक्सीजन (what should be the Oxygen level for coronavirus patients) का स्तर 94 से कम होने लगे तो उसे तुरंत तकियों के सहारे पेट के बल लिटाना चाहिए. यही प्रोनिंग (Proning to improve blood Oxygen) है, जो ऑक्सीजन के गिरते स्तर को संभाल लेती है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: April 25, 2021, 3:37 PM IST
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कोरोना संक्रमण के बढ़ते ग्राफ के बीच देश के विभिन्न राज्यों में मेडिकल ऑक्सीजन की कमी की भी खबरें चिंता में डाल रही हैं. ऑक्सीजन की कमी के कारण गंभीर हालत में पहुंचे मरीजों की मौत की घटनाएं भी सामने आई हैं. ऐसे में केंद्र सरकार के स्वास्थ्य मंत्रालय ने कोरोना पीड़ितों के शरीर में ऑक्सीजन का स्तर बढ़ाने के लिए उन्हें लंबे घंटों तक पेट के बल लेटने की सलाह दी. सुनने में मामूली लगने वाली ये बात भारत समेत विदेशों में भी आजमाई गई और इसके फायदे भी निकलकर आए.

पेट के बल लेटना ही प्रोनिंग कहलाता है

ये मेडिकल जगत में काफी जाना-पहचाना टर्म है, जिससे शरीर में ऑक्सीजन लेने की प्रक्रिया में सुधार आता है. स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक अगर कोरोना के मरीज होम आइसोलेशन में हैं और उनमें ऑक्सीजन का स्तर 94 से कम होता है, तो उन्हें बगैर घबराए तुरंत पेट के बल लेट जाना चाहिए. स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक यह तकनीक लगभग 80 प्रतिशत तक कारगर है.


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किसलिए जरूरी है प्रोनिंग

अक्सर मरीज होम आइसोलेशन या फिर अस्पताल में भर्ती होने पर भी पीठ के बल लेटे होते हैं. इससे फेफड़े गुरुत्वाकर्षण से प्रभावित होते हैं. साथ ही दूसरे अंगों का भी दबाव उनपर पड़ता है. इससे उनतक ऑक्सीजन का प्रवाह सही तरीके से नहीं हो पाता. वहीं प्रोनिंग से वायुकोष्ठिका (alveoli) खुल जाती है और ऑक्सीजन का प्रवाह सही होने लगता है.



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प्रोनिंग से वायुकोष्ठिका (alveoli) खुल जाती है और ऑक्सीजन का प्रवाह सही होने लगता है (Photo- news18 English via Twitter video)


इस प्रक्रिया के दौरान किन चीजों की जरूरत पड़ती है

प्रोनिंग के लिए कुछ खास नहीं चाहिए. इस दौरान चार से पांच तकियों की जरूरत होती है. पेट के बल लेटते हुए एक तकिया गर्दन के नीचे रखना चाहिए. अब एक या दो तकिए सीने से नीचे और ऊपरी जांघ से ऊपर की ओर रखें. अब दो तकिए पिंडली के नीचे रखें. यही प्रोनिंग है. स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार ये प्रक्रिया पूरी तरह सुरक्षित और ऑक्सीजन का स्तर बढ़ाने वाली है.

कितनी देर रहें एक अवस्था में 

प्रोनिंग की पोजिशन के बारे में सरकारी गाइडलाइन में जो बताया गया है, उसके मुताबिक बीच-बीच में पोजिशन बदलती रहनी चाहिए और एक ही अवस्था में 30 मिनट से ज्यादा नहीं रहना चाहिए. यानी पहली पोजिशन तो वो हो गई, जिसमें मरीज को पेट के बल लेटना होता है. दूसरी पोजिशन में बाईं करवट लेकर हाथ को सिर के नीचे कुछ ऐसे रखना है कि वही तकिए की तरह बन जाए. इस दौरान तकिया नहीं लेना है. अब दोनों पैरों को सटाकर रखते हुए आधे घंटे लेटे रहना है. तीसरी पोजिशन में यही तरीका दाईं करवट लेकर अपनाएं.

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प्रोनिंग से पहले ऑक्सीमीटर से ऑक्सीजन का स्तर मापा जाना चाहिए (Photo- news18 English via Reuters)


ये है चौथी अवस्था

एक चौथी पोजिशन भी है, लेकिन कई मरीजों के लिए ये परेशानी-भरी होती है. इसमें सीधे बैठते हुए शरीर को पीछे की ओर झुकाते हुए लगभग 120 डिग्री तक रखें. इस दौरान दोनों पैर आपस में सटे होने चाहिए. हालांकि अगर मरीज को इस पोजिशन में रहने में तकलीफ हो रही हो तो जबर्दस्ती न करें और बाकी पोजिशन में ही आधे-आधे घंटे रखते हुए बदलाव करते रहें.

कौन न करें प्रोनिंग 

गाइडलाइन के अनुसार प्रोनिंग वैसे तो पूरी तरह से सुरक्षित और आजमाया हुआ तरीका है, लेकिन कुछ खास मरीजों के लिए ये पोजिशन खतरनाक हो सकती है. जैसे गर्भवती महिलाओं को प्रोनिंग नहीं करनी चाहिए. दिल की गंभीर बीमारी के शिकार से भी प्रोनिंग के लिए नहीं कहा जाना चाहिए वरना कोई इमरजेंसी आ सकती है. अगर कोरोना संक्रमित डीप वीनस थ्रोम्बोसिस से भी पीड़ित हो और पिछले 48 घंटों के भीतर कोई इलाज हुआ हो. इसके अलावा अगर मरीज में रीढ़ की हड्डी से जुड़ी कोई समस्या हो, पेल्विक फ्रैक्चर हो या फिर शरीर में दूसरी कोई समस्या हो, तो भी मरीज को प्रोनिंग के लिए बाध्य नहीं करना चाहिए, वरना एक मुश्किल ठीक करते हुए कोई दूसरी गंभीर समस्या आ सकती है.

proning coronavirus oximeter
बढ़ते संक्रमण के बीच कोरोना प्रोटोकॉल का पालन और जरूरी हो चुका है- सांकेतिक फोटो (pixabay)


इन बातों को न करें नजरअंदाज



  • भोजन के तुरंत बाद प्रोनिंग नहीं करना चाहिए. प्रोनिंग और खाने के बीच लगभग 1 घंटे का अंतराल जरूर लें.


  • तकिया लेते हुए ध्यान रखें कि वो ज्यादा सख्त न हो. इसके अलावा बहुत ज्यादा मोटा या बहुत पतला तकिया लेना भी टालें.


  • प्रोनिंग के लिए बार-बार कहा जाता है कि मरीज किसी भी पोजिशन में लगातार आधे घंटे से ज्यादा न रहे.

    मरीज अगर किसी पोजिशन में सहज नहीं हो या उसके शरीर में कोई दर्द उठे तो उसे प्रोनिंग की उस पर्टिकुलर पोजिशन में रहने के लिए नहीं कहना चाहिए.


  • वैसे तो 24 घंटे में अलग अलग पोजिशन में 16 घंटे तक प्रोनिंग कर सकते हैं लेकिन अगर मरीज को कोई असुविधा हो तो उतनी ही देर करे, जितने में सहज रह सके.


  • अगर आप एक बार में 16 घंटे नहीं लेट सकते तो इसे चार-चार घंटों में बांटा जा सकता है.




पश्चिम में सालों से की जा रही प्रोनिंग 

कोविड-19 के बहुत से मरीजों की मौत ARDS (acute respiratory distress syndrome) की वजह से होती है. यही सिंड्रोम उन रोगियों की मौत का कारण भी बनता है जिनमें इन्फ्लुएंजा या निमोनिया ज्यादा गंभीर हो जाता है. लगभग 8 साल पहले फ्रांसीसी डॉक्टरों ने New England Journal of Medicine में एक लेख लिखा था कि ARDS की वजह से जिन मरीजों को वेंटिलेटर लगाना पड़ा हो उन्हें पेट के बल लिटाना चाहिए. इससे उनकी मौत का खतरा कम हो जाता है. तब से ही पश्चिमी देशों में डॉक्टर वेंटिलेटर लगे हुए ARDS के मरीजों को पेट के बल लिटाकर जीवित बचाते रहे हैं. कोरोना के दौरान भी अमेरिका समेत यूरोपियन देशों से प्रोनिंग की खबरें आती रहीं.
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