ब्लैकहोल पदार्थ को कैसे खींच कर उसे फेंकता है बाहर, शोध ने बताया

ब्लैकहोल पदार्थ को कैसे खींच कर उसे फेंकता है बाहर, शोध ने बताया
ऐसी घटना गैलेक्सी (Galaxy) के केंद्र स्थित ब्लैकहोल (Black hole) में ही होती हैं. (तस्वीर: Pixabay)

ब्लैकहोल (Black Hole) के बारे में अब तक माना जाता था कि उसके पदार्थ (Matter) को खींचने (Capture) और उस बाहर फेंकने (Expel) की क्रियाएं अलग हैं, लेकिन शोध में पाया गया कि ऐसा नहीं हैं.

  • News18Hindi
  • Last Updated: September 5, 2020, 6:00 PM IST
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ब्लैकहोल (Black Hole) के बारे में हमें सीधे तौर पर कोई जानकारी नहीं मिलती. फिर भी इसके बारे में बहुत कुछ पता लगाया जा सकता है. जैसे इसका आकार, इसका भार, इसके घूमने की गति आदि. आमतौर पर इससे प्रकाश (Light) तक बाहर नहीं निकल पाता, लेकिन यह जितना पदार्थ खींच (capture) सकता है उससे कई गुना पदार्थ फेंक (expel) सकता है.वैज्ञानिकों ने इसके पदार्थ खींचने और फेंकने के दो अलग प्रक्रियाओं को एक ही प्रक्रिया का हिस्सा बताया है.

एक्रीशन डिस्क की प्रमुख भूमिका
ब्लैकहोल में पदार्थ को खींचे जाने और उत्सर्जित करने की प्रक्रिया को नियंत्रित उसके पास स्थित एक्रीशन डिस्क करती है. यह डिस्क एक विशाल गैस और धूल से बनी होती है जो बहुत तेजी से ब्लैकहोल के पास उसका चक्कर लागती है. यह गर्म डिस्क चमकीले प्रकाश से साथ अन्य इलेक्ट्रोमैग्नेटिक विकरण फेंकती है.

दो अलग हिस्से
इस डिस्क का एक हिस्सा इवेंट होराइजन के पार जाकर ब्लैक होल के अंदर चला जाता है. इवेंट होराइजन वह सीमारेखा होती है जिसके आगे से प्रकाश सहित कोई भी पदार्थ ब्लैकहोल से बाहर नहीं जा पाता. वही दूसरी ओर बहुत सारा हिस्सा इवेंट होराइजन के इस पार डिस्क के विकिरण उत्सर्जन से ब्लैकहोल से दूर जाता है.



गैलेक्सी के केंद्र की गतिविधि
हर गैलेक्सी के केंद्र में एक ब्लैकहोल होता है लेकिन एक्रीशन डिस्क केवल सक्रिय गैलेक्सियों के केंद्र के ब्लैकहोल के बाहर ही होती हैं. अभी तक वैज्ञानिकों के बनाए ब्लैक होल के मॉडल्स  पदार्थ को लेकर दो चरणों की अलग अलग व्याख्या करते हैं. एक चरण में गैलेक्सी के केंद्र से तेज गति से आयनीकृत गैस निकलती है और दूसरे दूसरे चरणों में अणु धीरे धीरे केंद्र में समा जाते हैं.

Black Hole, Galaxy,
ब्लैकहोल (Black Hole) के बारे में कभी भी कोई सीधी जानकारी नहीं मिलती. (तस्वीर: NASA_JPL-Caltec)


दोनों हिस्से एक ही प्रक्रिया का हिस्सा?
इस नए मॉडल ने दोनों ही चरणों को एक ही में बताया है. ब्राजील में साओ पाओलो यूनिवर्सिटी के इंस्टीट्यूट ऑफ एस्ट्रोनॉमी, जियोफिजिक्स एंड एटमॉस्फियरिक साइंसेस के शोधकर्ता डेनियल मे ने दोनों ही चरणों एक मॉडल में एकीकृत किया है.

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कैसे होता है ये
मे ने कहा, “ हमने पाया की अणुओं (Molecules) का चरण है, जो आयनीकृत (Ionized) चरणों से बहुत ही अलग होता है, वह भी उत्सर्जन का हिस्सा है. इसका मतलब यह है कि ब्लैकहोल के केंद्र से बहुत ज्याद पदार्थ फेंका जा रहा है. और गैलेक्सी का सक्रिय केंद्र गैलेक्सी की संरचना में भूमिका निभाता है.

कैसे किया अध्ययन
मे और उनके साथियों का यह शोध मंथली नोटिसेस ऑफ द रॉयल एस्ट्रोनॉमीकल सोसाइटी में प्रकाशित हुआ है. मे ने गैलेक्सियों के इस बर्ताव को दो सक्रिय गैलेक्सियों के अध्ययन कर अवलोकित किया. एक NGC 1068 जिसका मे ने 2017 में अध्ययन किया और दूसरी NGC 4151 जिसका मे ने साल 2020 में अध्ययन किया.

एक्रीशन डिस्क से शुरुआत
मे ने इन गैलेक्सियों में एक तरह का बर्ताव पाया. शोध के मुताबिक शुरू में गैलेक्सी के केंद्र में अणु गैसों का बादल मिल जाता है और एक्रीशन डिस्क को बनाकर उसके केंद्र को सक्रिय करता है. इससे लाखों डिग्री गर्म फोटोन उत्सर्जित होते हैं और बहुत सी गैस को बाहर की ओर धकेल देते हैं. जबकि उसमें से गैसों का एक छोटा हिस्सा ब्लैकहोल के अंदर चला जाता है. जब बादल ब्लैकहोल में समाता है, तभी दोनों प्रक्रिया शुरू होती हैं.

फिर होता है आउटफ्लो
एक हिस्से का आयनीकरण होता है तो वहीं दूसरे हिस्से में अणुओं पर विकिरण का कोई असर नहीं होता है. हमने पाया कि अणुओं का हिस्सा आयनीकृत हिस्से से जुड़ा हुआ था जिसे आउटफ्लो कहते हैं. हमने पाया कि ये दोनों हिस्से जुड़े होते हैं जो पहले पूरी तरह से अलग अलग माने जाते थे. जबकि आयनीकृत गैस इसी आणविक गैस के टुकड़ों से ही बनती है.”

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मे ने पाया कि उन्होंने जिन गैलेक्सियों का अध्ययन किया उनमें यह प्रक्रियाएं सूदूर गैलेक्सियों की तुलना में बहुत हल्की थी. सुदूर गैलेक्सियों के सक्रिय केंद्र में यह प्रक्रिया बहुत ज्यादा होती है और ऐसे ब्लैकहोल को क्वासर (Quasars) माना जाता है.
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