जानिए, क्या हैं क्यूएनन और प्राउड बॉयज, जो कैपिटल हिल उत्पात में शामिल थे

(Photo- news18 English via REUTERS)

अमेरिकी संसद (American parliament) पर हमला करने वालों में एक खास सोच के लोग शामिल थे. वे मानते हैं कि डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) बच्चों के यौन शोषण (Child sexual abuse) के खिलाफ चुनिंदा लोगों का राज जान चुके हैं और अपनी पोल खुलने से डरे हुए ये लोग ही ट्रंप को सत्ता से हटा रहे हैं.

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    अमेरिका में कैपिटल हिल में डोनाल्ड ट्रंप समर्थकों ने भारी उत्पात (violence by Donald Trump supporters) किया, जिसमें 4 की मौत हो चुकी है. शांति बहाल करने के लिए वॉशिंगटन में 15 दिनों की इमरजेंसी का एलान हुआ. इस बीच सामने आया है कि ट्रंप समर्थकों में भी दो समूह खास थे. प्राउड बॉयज और क्यूएनन (Qanon and Proud Boys) नाम के ये समूह मूलतः एक खास सोच वाले लोगों के समूह हैं, जो ट्रंप का कई कारणों से सपोर्ट करते हैं.

    सबसे पहले तो जानते हैं क्या है क्यूएनन
    ये एक अंब्रेला टर्म है, जिसमें कई तरह के लोग शामिल हैं. साल 2020 में लॉकडाउन के दौरान ये नाम इंटरनेट पर काफी पढ़ा-सुना गया. इस समूह में ऐसे लोग आते हैं, जो अलग ही सोच रखते हैं. वे इंटरनेट पर इस तरह की बातें चला रहे हैं कि दुनिया बच्चों का यौन शोषण करने वाले कुछ लोगों के हाथ में आ चुकी है. और यही लोग चाइल्ड-ट्रैफिकिंग को सुचारू ढंग से चलाते रहने के लिए ट्रंप जैसे लोगों को निशाना बना रहे हैं. यानी इनकी नजरों से देखा जाए तो ट्रंप ट्रैफिकिंग के खिलाफ हैं इसलिए अमेरिका की बहुतेरी ताकतें ट्रंप के खिलाफ जा चुकी हैं.

    capital hill trump
    ट्रंप ट्रैफिकिंग के खिलाफ हैं इसलिए अमेरिका की बहुतेरी ताकतें ट्रंप के खिलाफ जा चुकी हैं


    अपनी इस अजीबोगरीब थ्योरी में ट्रंप के खिलाफ खड़े लोगों की पूरी लिस्ट बन चुकी है. इसमें हिलेरी क्लिंटन, बराक ओबामा से लेकर मनोरंजन की दुनिया के लोग जैसे ओपरा विनफ्रे और धार्मिक नेता जैसे पोप फ्रांसिस और दलाई लामा भी शामिल हैं. क्यूएनन ग्रुप के लोगों को यकीन है कि ये और इन जैसी बड़ी हस्तियां बच्चों का यौन शोषण करती हैं और इसके बाद उन्हें मारकर उनका खून भी पी लेती हैं.

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    क्यूएनन के मुताबिक ट्रंप को साल 2016 में अमेरिका के टॉप मिलिट्री जनरल्स ने चुना था ताकि वे बच्चों के शोषण और हत्या के खिलाफ देश को बचा सकें. इतना ही नहीं, क्यूएनन के लोग और भी कई तरह की बातें फैला रहे हैं और मजे की बात है कि बहुत से लोग इन बातों पर पूरी तरह से यकीन भी करते हैं. इंटरनेट पर वे लिख रहे हैं. तस्वीरें डाल रहे हैं और पॉडकास्ट भी चला रहे हैं. Calls QAnon नाम से इस पॉडकास्ट में वे रोज नई-नई बातें डाल देते हैं.

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    इस सोच वाले लोगों का आना हाल ही में हुआ. साल 2017 के अक्टूबर में अचानक इंटरनेट पर सनसनी बन गई, जिसमें एक अज्ञात अकाउंट से खुद को “Q Clearance Patriot” बताते हुए पोस्ट किया गया. इसमें यही सब बातें लिखी थीं कि ट्रंप बच्चों के यौन शोषण के खिलाफ ग्लोबल साजिश खत्म करने की कोशिश में हैं. साथ ही ये भी लिखा था कि जब वे लोगों की पोल खोलेंगे तो बड़ा तूफान आएगा.

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    क्यूएनन विचारधारा के तहत लोग और भी कई तरह की बातें फैला रहे हैं (Photo- news18 English via REUTERS)


    ये कौन लोग हैं, जो इस तरह की अजीब और खौफनाक थ्योरी पर यकीन करते हैं, ये अब तक सामने नहीं आ सका है. कभी लगता है कि ये कोई एक ही शख्स है तो कभी लगता है कई लोग मिलकर ये थ्योरी इंटरनेट पर चला रहे हैं. फिलहाल तक अमेरिकी खुफिया एजेंसियां भी इस थ्योरी के पीछे का दिमाग खोजने में नाकाम रही हैं.

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    अब बात करते हैं प्राउड बॉयज की
    ये टर्म अपेक्षाकृत जानी-पहचानी है. ये भी ट्रंप समर्थक लोग हैं. प्राउड बॉयज एक चरमपंथी मान्यता वाला समूह है, जो रंग के आधार पर खुद को बेहतर मानता है. इस निओ-फासिस्ट ग्रुप का गठन कुछ साल पहले ही हुआ. लोकप्रिय अमेरिकन कनाडियन मीडिया समूह Vice Media के को-फाउंडर ग्रेविन मेकेन्स ने इसकी शुरुआत की थी. समूह को मुख्य तौर पर मुस्लिम-विरोधी विचारों और तौर-तरीकों के लिए जाना जाता है. यहां तक कि खुद अमेरिकी खुफिया विभाग FBI ने इसे चरमपंथी समूह करार दिया है.

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    प्राउड बॉयज में, जैसा कि नाम से साफ है, केवल पुरुष सदस्य ही होते हैं (Photo-youtube)


    सिर्फ पुरुष मेंबर होते हैं
    प्राउड बॉयज में, जैसा कि नाम से साफ है, केवल पुरुष सदस्य ही होते हैं. ये न केवल गोरे रंग के आधार पर भेदभाव करते हैं, बल्कि इनकी नफरत का शिकार महिलाएं, मुस्लिम, और ट्रांसजेंडर भी हैं. कुल मिलाकर प्राउड बॉयज वो समूह है, जो अपने से अलग दिखने या होने वाले हर इंसान या समुदाय को स्वीकार नहीं करता.

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    क्या करता है ये समूह
    प्राउड बॉयज के सदस्य अक्सर ऐसी रैलियों का हिस्सा बनते देखे गए हैं, जो वाइट सुप्रिमेसी के हक में हो. यहां तक कि वे अक्सर अमेरिका और कनाडा में अश्वेतों और मुस्लिमों पर हिंसा करते भी दिखते हैं. खुद को अलग दिखाने के लिए समूह का एक ड्रेस कोड भी है. वे लाल रंग की टोपी लगाए होते हैं, जिसपर लिखा होता है- Make America Great Again. बता दें कि ये साल 2016 में ट्रंप की पहली चुनावी रैली का चर्चित स्लोगन था.

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