दवाओं में धांधली पर QR कोड से कसेगी लगाम, जानें इस कोड के मायने

क्यूआर कोड का फुल फॉर्म है क्विक रिस्पॉन्स कोड. अपने नाम के ही मुताबिक ये तेजी से स्कैन करने का काम करता है. ये स्क्वायर आकार के कोड होते हैं जिनमें उत्पाद की कीमत से लेकर उसमें काफी सारी जानकारी होती है

News18Hindi
Updated: August 14, 2019, 6:47 PM IST
दवाओं में धांधली पर QR कोड से कसेगी लगाम, जानें इस कोड के मायने
क्या है वो QR कोड, जो दवाओं में धांधली रोकने जा रहा है (प्रतीकात्मक फोटो)
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Updated: August 14, 2019, 6:47 PM IST
केंद्र सरकार (Central government) ने दवाओं में इस्तेमाल होने वाले एक्टिव फार्मास्यूटिकल इंग्रीडिएंट्स (Active Pharmaceutical Ingredients) पर क्यूआर (QR) कोड लगाना अनिवार्य कर दिया है. बताया जा रहा है कि इससे असली और नकली दवाओं की पहचान में आसानी होगी. क्यूआर कोड सुनते हुए उलझन में न आएं. इसका इस्तेमाल आपने भी कहीं न कहीं जरूर किया होगा, खासकर मोबाइल वॉलेट से पेमेंट करते हुए. समझें, बार कोड की तरह दिखाई देने वाला क्यूआर कोड क्या है और कैसे काम करता है.

क्यूआर कोड का फुल फॉर्म है क्विक रिस्पॉन्स कोड. अपने नाम के ही मुताबिक ये तेजी से स्कैन करने का काम करता है. ये स्क्वायर आकार के कोड होते हैं जिनमें उत्पाद की कीमत से लेकर उसमें काफी सारी जानकारी होती है. ये 2-डी बारकोड होता है जो मोबाइल से स्कैन किया जा सकता है. इसमें तीन बड़े और काफी सारे छोटे स्क्वायर होते हैं. ये एक तरह की मशीनी भाषा है जो मशीन रीड करती और उत्पाद की जानकारी देती है. 1994 में जापान की कार निर्माता कंपनी टोयोटा के एक सहायक डेन्सो वेव ने इसका ईजाद और इस्तेमाल किया था .



किसलिए पड़ी जरूरत

पुराने बारकोड की जगह क्यूआर कोड के रूप में नई तकनीक ईजाद की गई. बारकोड में काली-सफेद खड़ी लाइनें होती हैं और इसमें भी उत्पाद की जानकारी होती है, हालांकि बारकोड की सीमाएं हैं. इसमें ज्यादा जानकारी नहीं आ सकती और कट-फट जाने पर इसे पढ़ा भी नहीं जा सकता. वहीं एक बार क्यूआर कोड स्टोर हो जाने के बाद उसके साथ ऐसी कोई परेशानी नहीं होती है. बारकोड वन-डाइमेंशनल होता है और स्कैनर सही कोण पर न हो तो ये कोड स्कैन नहीं हो सकता, जबकि क्यूआर टू-डाइमेंशन होता है और 360 डिग्री पर किसी भी कोण से स्कैन हो सकता है.

कहां होता है उपयोग
पैसों के सुरक्षित लेन-देन के लिए ई-वॉलेट में इसका उपयोग होता है. इसमें कोड स्कैन करने के बाद पैसों का ट्रांजेक्शन होता है इसलिए ऑनलाइन खरीद-फरोख्त में इसका धड़ल्ले से उपयोग हो रहा है. किसी उत्पाद, फिर चाहे वो किताबें हों या अखबार या फिर वेबसाइट सबका एक क्यूआर कोड होता है. यहां तक कि मोबाइल से कंप्यूटर को कनेक्ट कर व्हाट्सएप के उपयोग के लिए भी यही कोड काम में आता है.
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इसके घरेलू इस्तेमाल भी हैं
मेहमानों को आपका वाई-फाई इस्तेमाल करना है और आप पासवर्ड शेयर नहीं करना चाहते तो सीधे-सीधे क्यूआर कोड से जोड़ सकते हैं. अपने बिजनेस को बढ़ाने के लिए अपने विजिटिंग कार्ड में भी ये कोड रख सकते हैं, इससे ग्राहकों का डाटाबेस भी तैयार हो सकता है. विजिटिंग कार्ड में ये कोड देने पर नाम, फोन नंबर और ईमेल एड्रेस मोबाइल में स्टोर हो जाते हैं. सोशल नेटवर्किंग के लिए भी क्यूआर कोड काम का है. इसमें आपके फेसबुक पेज की लिंक होगी, जब भी इसे स्कैन किया जाएगा, पढ़ने वाला सीधा आपके फेसबुक पेज पर पहुंच जाएगा.

कई नुकसान भी हैं इसके
हालांकि इस कोड के कई नुकसान भी हैं. जैसे इससे मोबाइल हैक किया जा सकता है. यही वजह है कि कोड का इस्तेमाल किसी साइबर कैफे में बैठकर न करें, बल्कि सुरक्षित और विश्वसनीय सोर्स का ही इस्तेमाल करें. आजकल हर स्मार्टफोन पर इस कोड को पढ़ने की सुविधा होती है. अगर आपके फोन पर ऐसा नहीं हो पा रहा हो तो एप स्टोर में जाकर कोड रीडर डाउनलोड कर लें. इसके बाद जब भी आप कोई क्यूआर कोड स्कैन करेंगे, तुरंत उस उत्पाद या वेबसाइट की सारी जानकारी आप एक्सेस कर सकेंगे.

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First published: August 14, 2019, 5:38 PM IST
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