Explained: क्या है क्वाड, जो समुद्र में चीन की बढ़ती ताकत पर लगाम लगा सकता है?

क्वाड का पहला शिखर सम्मेलन आज 12 मार्च से शुरू हो रहा है

क्वाड का पहला शिखर सम्मेलन आज 12 मार्च से शुरू हो रहा है

क्वाड (Quad) को लेकर चीन के माथे पर जब-तब सिलवटें दिख जाती हैं. भारत समेत जापान, अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया का हिंद-प्रशांत महासागर में ये गठबंधन शक्ति-संतुलन के एजेंडा की तरह देखा जा रहा है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: March 12, 2021, 7:38 AM IST
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क्वाड का पहला शिखर सम्मेलन आज 12 मार्च से शुरू हो रहा है. इसमें भारत समेत अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया के टॉप लीडर शामिल होंगे. वैसे तो ये संगठन हिंद-प्रशांत क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने को लेकर तैयार हुआ लेकिन चीन इससे खासा परेशान रहता है. इसकी वजह ये है कि संगठन दूसरे मुद्दों के साथ समुद्र में चीन की बढ़ती दादागिरी पर भी लगाम कसने की तैयारी में है.

क्वाड आखिर है क्या?

क्वाड का अर्थ क्वाड्रीलेटरल सिक्योरिटी डायलॉग है, जो जापान, ऑस्ट्रेलिया, भारत और अमेरिका के बीच एक बहुपक्षीय समझौता है. मूल तौर पर ये इंडो-पैसिफिक स्तर पर काम कर रहा है, ताकि समुद्री रास्तों से व्यापार आसान हो सके लेकिन अब ये व्यापार के साथ-साथ सैनिक बेस को मजबूती देने पर ज्यादा ध्यान दे रहा है ताकि शक्ति संतुलन बनाए रखा जा सके.

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साल 2007 में एशिया-प्रशांत महासागर में चीन ने अपना वर्चस्व बढ़ाना शुरू कर दिया था. वो पड़ोसी देशों को धमकाने लगा था और समुद्र में सैन्य बेस लगातार बढ़ा रहा था. ये देखते हुए जापान के तत्कालीन प्रधानमंत्री शिंजो अबे ने एक ऐसे संगठन का प्रस्ताव दिया, जिसमें इस सामुद्रिक क्षेत्र में आने वाले ताकतवर देश शामिल हो सकें. आखिरकार संगठन बना, जिसकी पहली मीटिंग साल 2019 में हुई थी. इसके बाद कोरोना के कारण साल 2020 में नेताओं की मुलाकात बाधित हुई. अब वर्चुअल स्तर पर ही शिखर सम्मेलन होने जा रहा है.

south china sea and quad
क्वाड व्यापार के साथ-साथ सैनिक बेस को मजबूती देने पर ज्यादा ध्यान दे रहा है


क्वाड के तहत प्रशांत महासागर, अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया में फैले विशाल नेटवर्क को जापान और भारत के साथ जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है. खुद जापान के तत्कालीन पीएम शिंजो अबे ने इसे दो समुद्रों का मेल कहा था, लेकिन चीन इससे बौखलाया हुआ है. उसे डर है कि इन ताकतवर देशों के पास आने से समुद्र में उसके अस्तित्व को खतरा हो सकता है.



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बता दें कि चीन बीते दो दशक में लगातार समुद्र में अपना सैन्य बेस से लेकर व्यापार भी तेजी से बढ़ा रहा है. चीन ये समझ चुका है कि आने वाले समय में समुद्र पर राज करने वाला देश ही दुनिया पर राज करेगा. यही कारण है कि साउथ चाइना सी पर भी कब्जे के लिए उसने मुहिम छेड़ रखी है. साथ ही साथ वो समुद्र में नकली द्वीप बनाकर वहां अपने सैनिक तैनात कर रहा है. यानी ये पूरी तैयारी है कि भविष्य में समुद्र पर उसका कब्जा हो जाए.

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इसी खतरे को भांपते हुए क्वाड ने अपनी रणनीति में क्वाड देशों को सामुद्रिक सहायता देने के अलावा समुद्र में शांति और शक्ति संतुलन बनाए रखने को प्राथमिकता दी. चीन इस बात पर बौखलाया हुआ है और लगातार क्वाड देशों के खिलाफ कुछ न कुछ कह रहा है. क्वाड की वजह से चीन के माथे पर सिलवटें रहती हैं. दरअसल चीन को लगता है कि क्वाड में शामिल भारत, अमेरिका और जापान, जैसे शक्तिशाली देश उसके खिलाफ मिलकर किसी रणनीतिक साजिश को रच रहे हैं. चीन को ये भी लगता है कि क्वाड समुद्र में चीन के आसपास अपने वर्चस्व को बढ़ाना चाहता है और भविष्य में उसे टारगेट का जा सकता है.

south china sea and quad
चीन को लगता है कि क्वाड समुद्र में चीन के आसपास अपने वर्चस्व को बढ़ाना चाहता है


इस बीच क्वाड में शामिल दो देशों, भारत और जापान के बीच समुद्र में सहायता को लेकर एक और अहम समझौता हुआ. इसके तहत वे एक-दूसरे को सैनिक सहायता देंगे और इसका एक कॉमन मकसद चीन के खतरे को कम करना होगा. इसे विशेषज्ञ एंटी-चाइना समझौता भी कह रहे हैं. वैसे इस समझौते का नाम म्यूचुअल लॉजिस्टिक सपोर्ट अरेंजमेंट (MLSA) है.

इसके तहत भारतीय सेनाओं को जापानी सेनाएं अपने अड्डों पर जरूरी सामग्री की आपूर्ति कर सकेंगी. साथ ही भारतीय सेनाओं के रक्षा साजो सामान की सर्विसिंग भी देंगी. यह सुविधा भारतीय सैन्य अड्डों पर जापानी सेनाओं को भी मिलेंगी. युद्ध की स्थिति में ये सेवाएं बेहद अहम मानी जाती हैं. माना जा रहा है कि समुद्री क्षेत्र में चीन की लगातार बढ़ी मौजूदगी जब आतंक में बदली, तब से ही इस समझौते पर बात हो रही थी. अब इस पैक्ट को एक तरह से एंटी-चाइना पैक्ट की तरह देखा जा रहा है जो हिंद महासागर में चीन को कमजोर बनाएगा.
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