US President Election 2020: इस हथियारबंद समूह के कारण अमेरिकी चुनाव में खूनखराबे की आशंका

चुनावी नतीजे अलग होने पर मिलिशा नामक हथियारबंद समूह हिंसा फैला सकता है- सांकेतिक फोटो (pxhere)
चुनावी नतीजे अलग होने पर मिलिशा नामक हथियारबंद समूह हिंसा फैला सकता है- सांकेतिक फोटो (pxhere)

US Election 2020: अमेरिका (America) में बंदूकों की खरीद में बेतहाशा तेजी से राजनीतिक विशेषज्ञ चिंतित हैं. उन्हें डर है कि चुनावी नतीजे अलग होने पर ट्रंप समर्थक हथियारबंद समूह (Militia) हिंसा फैला सकते हैं.

  • News18Hindi
  • Last Updated: November 3, 2020, 7:16 AM IST
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मंगलवार को अमेरिका में राष्ट्रपति चुनाव (presidential election in America) है. कोरोना से सबसे ज्यादा प्रभावित होने के बाद भी अर्ली वोटिंग में वहां जमकर मतदान की खबरें आईं. इस बीच हथियारों की बिक्री में भी काफी तेजी देखी गई. आशंका है कि चुनाव के नतीजे आने के बाद अमेरिका में हिंसा हो सकती है. इसमें कुछ मिलिशा समूह (Militia) का नाम बार-बार आ रहा है, जो मौजूदा राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) का समर्थक है.

संविधान में नहीं है उतनी स्पष्टता
अमेरिका में चुनाव खासे अजीब दौर से गुजर रहा है. वहां के संविधान में कई बातों की स्पष्टता न होने के कारण भी असमंजस के हालात हैं. जैसे कई इंटरव्यूज में राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार ट्रंप ने सत्ता के शांतिपूर्ण हस्तांतरण के सवाल को टाल दिया. चूंकि संविधान में इस हालात के बारे में कोई विचार ही नहीं किया गया है तो राजनैतिक विश्लेषक को डर है कि इस हालात का फायदा भी लिया जा सकता है. बता दें कि अमेरिका में ऐसे हालात भी आए, जब चुनाव के लिए सुप्रीम कोर्ट को दखल देना पड़ा.

अमेरिका में चुनाव खासे अजीब दौर से गुजर रहा है- सांकेतिक फोटो (Pixabay)

ट्रंप के सपोर्टर हैं तैयार


बाइडेन समर्थक भी अपने उम्मीदवार को लेकर काफी आक्रामक हैं. वहीं इसके जवाब में ट्रंप के समर्थन में भी एक खेमा तैयार है. ये समूह मिलिशा के माफिक पुलिस के समानांतर ही अपना संगठन चला रहा है. ये समूह आमतौर पर श्वेत लोगों और उनके अधिकारों की रक्षा की बात करता है. इसके लिए उसे अश्वेतों पर हमले से भी परहेज नहीं.

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कौन हैं ये लोग
इस समूह में 9 अलग-अलग सब-ग्रुप हैं, जो समान सोच रखते हैं. ये समूह हैं- प्राउड ब्‍वायज, पैट्रियट प्रेयर, ओथ कीपर्स, लाइट फुट म‍िल‍िश‍ा, सिविल‍ियन डिफेंस फोर्स, अमेरिकन कंटीजेंसी, बोगालू बोइस और कू क्लक्स क्लान. ये सारे समूह हथियारबंद हैं और खुलकर रिपब्लिकन्स का सपोर्ट करते हैं. ट्रंप का भी ये समर्थन कर चुके हैं. यहां तक कि ट्रंप ने भी एकाध बार इनमें से एक समूह प्राउड बॉयज का जिक्र किया था. वैसे बाद में खुलासा करने को कहने पर वे ऐसे किसी समूह को जानने से भी मुकर गए.

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क्या खासियत है इस समूह की
वैसे मिलिशा किसी ऐसे हथियारबंद संगठन को कहते हैं, जिसमें आम लोग का समूह होता है. ये समान विचारधारा पर काम करते हैं और ऑनलाइन या दूसरे तरीकों से एक-दूसरे से जुड़ते हैं. वैसे मिलिशा किसी देश में युद्ध के दौरान सैनिकों की कमी होने पर भर्ती होने वाले लोगों को भी कहते हैं, जो वैसे तो गैर-पेशेवर होते हैं लेकिन जिन्हें हथियारों और शारीरिक श्रम से परहेज नहीं होता.

डोनाल्ड ट्रंप और उनके प्रतिद्वंदी जो बिडेन दोनों ही अपनी जीत के दावे कर रहे हैं- फोटो (cnbc)


नब्बे के आखिर तक फैल गया अमेरिका में 
मिलिशा की शुरुआत का जिक्र वैसे तो 18वीं सदी से मिलता है लेकिन साल 1980 में अमेरिका में ये काफी दिखने लगा और नब्बे के अंत तक अमेरिका के सारे 50 राज्यों में ये संगठन फैल गया. ये समूह हथियार रखता है और अपने विरोधियों को हिंसा से हराने पर यकीन करता है.

आतंक के लग रहे कयास
यही वजह है कि अमेरिका में बंदूकों की भारी बिक्री से ये अंदाजा लगाया जा रहा है कि मिलिशा या दूसरे चरमपंथी समूह अपने मुताबिक नतीजे न आने पर अमेरिका की गलियों में आतंक मचा सकते हैं. ये एक बड़ी वजह है कि सर्वे में ट्रंप की लोकप्रियता बिडेन से लगभग 8 प्रतिशत कम दिखने पर भी कोई मीडिया हाउस भी खुलकर चुनावी नतीजों पर कोई पक्की बात नहीं कर रहा.

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ये है ट्रंप का पसंदीदा समूह
अब जाते हुए मिलिशा के तहत आने वाले उस ग्रुप के बारे में भी जानते चलें, जो ट्रंप का फेवरेट है. ये है प्राउड बॉयज, जो जो रंग के आधार पर खुद को बेहतर मानता है. इस निओ-फासिस्ट ग्रुप का गठन कुछ साल पहले ही हुआ. लोकप्रिय अमेरिकन कनाडियन मीडिया समूह Vice Media के को-फाउंडर ग्रेविन मेकेन्स ने इसकी शुरुआत की थी. समूह को मुख्य तौर पर मुस्लिम-विरोधी विचारों और तौर-तरीकों के लिए जाना जाता है. खुद अमेरिकी खुफिया विभाग FBI ने इसे चरमपंथी समूह करार दिया है.

ट्रंप के खिलाफ भी एक समूह है, जिसे एंटीफा के नाम से जानते हैं- सांकेतिक फोटो


पहले दौर में भी खुलकर किया ट्रंप का सपोर्ट 
इसमें केवल पुरुष सदस्य ही होते हैं. ये न केवल गोरे रंग के आधार पर भेदभाव करते हैं, बल्कि इनकी नफरत का शिकार महिलाएं, मुस्लिम, और ट्रांसजेंडर भी हैं. कुल मिलाकर प्राउड बॉयज वो समूह है, जो अपने से अलग दिखने या होने वाले हर इंसान या समुदाय को स्वीकार नहीं करता. इस समूह के ट्रंप से जुड़ाव का पहला सार्वजनिक किस्सा तब सामने आया, जब समूह के सदस्यों ने अपने ड्रेस कोड में ट्रंप के पहले दौर के चुनाव का स्लोगन- मेक अमेरिका ग्रेट अगेन- को शामिल कर लिया.

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ये समूह है ट्रंप के खिलाफ 
ट्रंप के खिलाफ भी एक समूह है, जिसे एंटीफा के नाम से जानते हैं. ये खुद को फासीवाद का विरोधी (anti-fascists) बताते हैं. अलग-अलग पृष्ठभूमि से आए इसके सदस्य ज्यादातर सरकार के विरोध में खड़े रहते हैं. कई बार विरोध के दौरान ये हिंसक भी हो जाते हैं. मेरिका में एंटीफा के सदस्य मुंह पर कपड़ा बांधकर या हेलमेट पहनकर प्रदर्शन करते हैं ताकि पुलिस की पकड़ाई में न आएं. आधिकारिक तौर पर इनका कोई नेता नहीं है, जिससे पुलिस बात कर सके, इसलिए इन्हें ज्यादा खतरनाक माना जा रहा है. अनुमान है कि ये समूह ट्रंप के खिलाफ यानी बिडेन के पक्ष में सक्रिय हो सकता है.
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