क्या है रूटोग काउंटी, पैंगोग से वापस लौट जहां बेस बना रही है चीनी सेना

चीनी सेना सेना कुछ ही पीछे जाकर रूटोग काउंटी में ठहरी हुई है (Photo- news18 via REUTERS)

चीनी सेना सेना कुछ ही पीछे जाकर रूटोग काउंटी में ठहरी हुई है (Photo- news18 via REUTERS)

चीन ने फरवरी में अपनी सेना को पीछे लौटने का आदेश तो दे दिया, लेकिन सेना कुछ ही पीछे जाकर रूटोग काउंटी (Rutog County) में ठहरी हुई है. सैटेलाइट तस्वीरों में वहां चीनी सैनिक और हथियारों का जखीरा दिख रहा है.

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फरवरी में भारत-चीन के बीच लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल (एलएसी) को लेकर समझौता हुआ. इसके तहत चीन ने पूर्वी लद्दाख की सीमा से सेना समेत अपने हथियार पीछे हटा लिए. पहली नजर में लगता है कि चीन का रुख नरम पड़ा है लेकिन असल में ऐसा है नहीं. सैटेलाइट इमेज में कुछ ऐसी तस्वीरें दिखी हैं जो बताती हैं कि चीन लौटने की तैयारी में नहीं, बल्कि रूटोग काउंटी में रुक गया है. वहां चीन से सैनिकों और भारी मात्रा में हथियार भी तस्वीरों में दिख रहे हैं.

पैंगोग झील के तट से हटने के बाद चीन लौटा तो लेकिन वहां से रूटोग काउंटी में जम गया. इस बेस पर चीनी सैनिकों का भारी जमावड़ा हो चुका है. झील से रुटोग काउंटी की दूरी महज 100 किलोमीटर है. ऐसे में अगर तनाव बढ़ता है तो चीनी सैनिकों को सीमा तक लौटने में काफी कम समय लगेगा. इससे साफ जाहिर है कि चीन के इरादे खास अच्छे नहीं. बता दें कि साल 1962 में भारत-चीन की लड़ाई से पहले भी चीन ने इसी तरह से धोखा दिया था और पीछे लौटकर नरम रवैये के धोखे में रखते हुए एकदम से हमला बोला था.

पैंगोग झील के तट से हटने के बाद चीन लौटा तो लेकिन वहां से रूटोग काउंटी में जम गया




अब चीन झील से हटते हुए रूटोग काउंटी में रुक गया है. ये चीन के कब्जे वाले तिब्बत का हिस्सा है, जो भारत की सीमा से लगता है. रूटोग तिब्बती भाषा का शब्द है, जिसका अर्थ है पहाड़ के पैर. रूटोग काउंटी की स्थापना साल 1961 में हुई थी, यानी भारत-चीन युद्ध से सालभर पहले ही.
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वैसे साल 1961 में जब ये प्रांत बना था, तब ये शिनजियांग प्रांत का हिस्सा था. ये वही प्रांत है, जहां चीन के उइगर मुस्लिम रहते हैं, जिनपर हिंसा की खबरें अब इंटरनेशनल सुर्खियां बनी हुई हैं. अब ये प्रांत तिब्बत ऑटोनॉमस क्षेत्र का हिस्सा कहलाता है. वैसे तो इस दुर्गम इलाके में कुछ खास है नहीं, लेकिन चीन के लिए ये क्षेत्र काफी महत्व का है. इसकी वजह है काउंटी की भौगोलिक स्थिति, जिसके कारण वो भारत की गतिविधियों पर नजर रख सकता है और जल्द से जल्द लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल तक अपने सैनिक और हथियार पहुंचा सकता है. चूंकि ये इलाका चीन का अपना क्षेत्र है इसलिए उसे यहां से हटने को कहा भी नहीं जा सकता.

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यहां पर चीनी सैनिकों के ढेर सारे नए कैंप दिख रहे हैं. साथ ही ऐसे स्ट्रक्चर दिख रहे हैं, जो चीनी अफसरों के रहने के लिए बनाए जाते हैं. माना जा रहा है कि LAC से लौटे सैनिकों को चीन सेना ने यहीं रोका है और वो यहां मौजूद हैं. वैसे भी डोकलाम विवाद के बाद से इस बेस को चीन ने काफी विकसित किया और लगातार यहां बना हुआ है.

china army
रूटोग काउंटी बीच में एकाध बार सुर्खियों में था, जब वहां पर हिमस्खलन की दुर्घटना हुई थी


रूटोग काउंटी बीच में एकाध बार सुर्खियों में था, जब वहां पर हिमस्खलन की दुर्घटना हुई थी. जुलाई 2016 में प्रांत में ग्लेशियर का 250 किलोमीटर टुकड़ा टूटकर गिरा था, जिससे 9 चरवाहे, 350 भेड़ें और 110 याक दबकर मारे गए थे. इस हिमस्खलन की घटना को नासा ने इतिहास के सबसे बड़े हिमस्खलनों में से एक माना था. इसके बाद भी ग्लेशियर पिघलने की कई घटनाएं लगातार होती रही हैं.

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दुर्गम इलाका होने के कारण इस प्रांत में बहुत कम आबादी बसी हुई है. एक अनुमान के मुताबिक यहां 10000 के आसपास लोग रहते हैं, जिनका बाहरी दुनिया से नहीं के बराबर संपर्क रहता है. यहां रहने वाले लोग अपने लिए खुद ही अनाज उगाते और पशुपालन करते हैं. इसके अलावा भेड़ें और याक से भी यहां ऊन तैयार करने का काम होता है. साल में इक्का-दुक्का बार यहां से कोई जाकर अपने उत्पाद बाहर बेच आता है.

बाहरी लोगों से कम संपर्क होने के कारण यहां जंगली वनस्पतियां और जंगली पशु भी बहुतायत में होते हैं. प्रांत पर बीते दशकभर में चीन का ज्यादा ध्यान गया. यहां के ऊन की नर्म और ज्यादा बेहतर होने के कारण काफी मांग है. यही कारण है कि साल 2006 से 2011 के बीच ही यहां से 72 टन ऊन बेचा गया, जिसकी कीमत 2.5 मिलियन डॉलर रही.
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