कौन चलाता है 'सनातन संस्था', जिसे ATS ने बताया आतंकी संगठन

हिंदू धर्म और हिंदू राष्ट्र की रक्षा के लिए 20 साल पहले गोवा में बनी संस्था अब अतिवादी संगठन के रूप में सुर्खियां हासिल कर रही है.

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Updated: December 6, 2018, 12:02 PM IST
कौन चलाता है 'सनातन संस्था', जिसे ATS ने बताया आतंकी संगठन
सनातन संस्था के संस्थापक डॉक्टर जयंत बालाजी अठावले (फाइल फोटो)
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Updated: December 6, 2018, 12:02 PM IST
आतंकवाद निरोधक दस्ते (एटीएस) ने पहली बार ये कहा है कि हिंदू संगठन सनातन संस्था मुंबई और पुणे समेत कई जगहों पर आतंकी हमले कराने की साजिश रच रही थी. ये संस्था पिछले कुछ समय से लगातार सुर्खियों में है. खासकर दाभोलकर, पंसारे, कलबुर्गी और गौरी लंकेश की हत्याओं में लगातार इस संस्था का नाम लिया जाता रहा है. इसके संस्थापक जयंत अठावले हैं, जो लंदन में मनोचिकित्सा का काम कर चुके हैं.

सनातन संस्था को ऐसा उग्र हिंदूवादी संगठन माना जा रहा है, जिसे अपने कार्यकलापों में हिंसा से कोई गुरेज नहीं. महाराष्ट्र की एटीएस एजेंसी पहले भी अपनी रिपोर्ट में इसे आतंकवादी संगठन मानते हुए उसके खिलाफ प्रतिबंध की जरूरत पर बल दिया था.

कब बनी ये संस्था
सनातन संस्था की वेबसाइट के मुताबिक़, डॉक्टर जयंत अठावले ने एक अगस्त 1991 में 'सनातन भारतीय संस्कृति' की स्थापना की थी.

इसके बाद 23 मार्च 1999 को उन्होंने सनातन संस्था की स्थापना की. कुल मिलाकर ये एक कट्टर हिंदू संगठन है. भक्तराज महाराज के साथ मिलकर 1999 में जयंत बालाजी अठावले ने इसकी स्थापना की थी. ये संस्थान अब ना केवल देश के विभिन्न भागों में फैल चुका है बल्कि विदेश में भी इसकी शाखाएं हैं. सनातन संस्था का मुख्यालय गोवा में है. लेकिन मुख्य गतिविधियों का केंद्र फिलहाल पुणे है.

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कौन है इसका संस्थापक
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डॉक्टर जयंत बालाजी अठावले, सनातन संस्था के संस्थापक हैं. वह एक मनोवैज्ञानिक हैं. सनातन संस्था की वेबसाइट के मुताबिक़, भारत आने से पहले डॉक्टर बालाजी ब्रिटेन में सात साल तक मेडिकल प्रैक्टिस कर चुके हैं. इंदौर के भक्त महाराज उनके गुरु थे.

- डॉक्टर जयंत अठावले हिपनोसिस के एक्सपर्ट हैं. उनके खिलाफ ये आरोप लगते रहे हैं कि वो लोगों को सम्मोहित करके अपना शिष्य बनाते रहे हैं. कुछ समय पहले अठावले की 75वीं सालगिरह धूमधाम से गोवा के रामनाथी आश्रम में मनाई गई. उनके बारे में कई बातें बढ़ा चढ़ाकर पेश की जाती रही हैं.

सनातन संस्था के संस्थापक डॉ जयंत अठावले


क्या है संस्था का उद्देश्य और दावा
- सनातन संस्था दावा करती रही है कि वो देश और हिंदू धर्म की रक्षा के लिए बनाई गई है. हाल के बरसों में उसकी गतिविधियों पर सवाल उठते रहे हैं. अब इसके खिलाफ प्रतिबंध लगाने की मांग हो रही है. महाराष्ट्र की एटीएस ने इसे आतंकवादी संगठन बताते हुए इसके खिलाफ प्रतिबंध की मांग की थी.

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- परातपरा गुरु डॉक्टर अठावले यांचे विचारधन: द्वितीय खंड' नाम की किताब में लिखा है, "1998 में डॉक्टर अठावले ने पहली बार 2023 तक भारत में राम राज्य या हिंदू राष्ट्र की स्थापना का विचार रखा था. सावरकर, संस्थापक सरसंघचालक डॉक्टर हेडगेवार, गोलवलकर गुरुजी जैसी महान हस्तियों ने भी ज़ोर-शोर से हिंदू राष्ट्र की स्थापना की बात उठाई थी. लेकिन अफ़सोस है कि आज़ादी के बाद हिंदू भारत धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र बन गया और हिंदू राष्ट्र की शानदार विचारधारा ओझल हो गई."

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- सनातन संस्था के तमाम प्रकाशित लेखों पर गौर करें, तो लगता है कि उन्हें लोकतंत्र पर भरोसा नहीं है. सनातन संस्था के एक लेख में लिखा है, "जनप्रतिनिधि या राजनेता नहीं, बल्कि केवल संत ही हिंदू राष्ट्र की स्थापना करने में सक्षम हैं. हिंदू राष्ट्र में कोई चुनाव नहीं होगा." इसी लेख में आगे अपने समर्थकों से कहा गया है, "शैतानी ताक़तों के ख़िलाफ़ क़दम उठाने होंगे."

कैसा है इसका ढांचा
- महाराष्ट्र के गृह विभाग का कहना है कि सनातन संस्था 20 से अधिक संस्थाओं में बंटी हुई है. बल्कि इसने अलग अलग शहरों में जो अलग अलग आश्रम बनाए हैं, वो भी अलग संस्थाओं के रूप में रजिस्टर्ड हैं.

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- ये कई संस्थाओं में बंटकर फैली हुई है. हिंदू जनजागृति समिति या हिंदू युवा सेना इसकी ही इकाइयां हैं. ये लगातार हिंदू त्योहार, वर्कशाप्स का आयोजन करती रहती है.
- कानूनी तौर पर इस पर प्रतिबंध कठिन. सनातन संस्था ने खुद को कई इकाइयों में बांटकर फैलाया हुआ है. अलग अलग इकाइयां अलग नामों से पंजीकृत हैं.

संस्था पर आरोप और कार्यकलाप
- 2008 में पनवेल में सनातन इसके सदस्य उस थिएटर के बाहर बम रखने के आरोप में गिरफ्तार किए गए, जहां जोधा अकबर की स्क्रीनिंग हो रही थी.
- 2009 में थाणे में भी एक थिएटर के बाहर बम रखने की साजिश संस्था ने बनाई. थिएटर में अम्ही सतपुते नाटक खेला जा रहा था. इस मामले में सनातन संस्था के दो सदस्यों को गिरफ्तार किया गया. उन्हें दस साल की सजा मिली.
- गोवा पुलिस ने अक्टूबर 2009 में सनातन संस्था के छह सदस्यों को मडगांव, गोवा में बम धमाकों के संबंध में गिरफ्तार किया था. पुलिस का कहना था कि सनातन संस्था के दो समर्थक मलगोंडा पाटिल और योगेश नाइक अपने स्कूटर में बम ले जा रहे थे, जिनके जरिए मडगाव के करीब नरकासूर में धमाके करना चाहते थे. लेकिन बम पहले ही फट जाने से दोनों की मौत हो गई.

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- नेशनल इनवेस्टिगेटिव एजेंसी (एनआईए) ने इस मामले की जांच का काम अपने हाथों में लिया. जांचकर्ताओं का मानना था कि सनातन संस्था के इंजीनियर छात्र सदस्य ने विस्फोटक डिवाइस बनाने में खास भूमिका अदा की. वो डेटोनेटर्स और टाइमर डिवाइस को धमाकों के लिए लेकर जा रहा था. इस मामले में जिन छह लोगों को आरोपी माना गया, उसमें सनातन संस्था के कई सदस्य अब तक फरार हैं.

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- डॉ. नरेंद्र दाभोलकर, कन्नड़ लेखक एमएम कलबुर्गी और गोविंद पंसारे की हत्या का आरोप
- बेंगलुरु में भी पत्रकार गौरी लंकेश की हत्या के लिए भी सनातन संस्था को जिम्मेदार ठहराया गया.

बरसों से फलती फूलती रही है ये संस्था
- आम आरोप है कि राज्य और केंद्र सरकार की अनदेखी से ये संस्था फलती फूलती रही. उसने संगठन का फैलाव किया. अब एटीएस खुद इसे एक बड़ा खतरा मान रही है.
- महाराष्ट्र एंटी टेरेरिस्ट स्क्वॉड (एटीएस), पुलिस, महाराष्ट्र और गोवा की राज्य सरकारों के साथ केंद्र ने कभी इसके संस्थापक के खिलाफ कोई कदम नहीं उठाया. पहली बार स्पेशल इनवेस्टिगेटिव टीम (एसआईटी) ने पत्रकार और एक्टिविस्ट गौरी लंकेश के मर्डर की जांच के दौरान सनातन संस्था का नाम लिया, उसका कहना था ,"ना केवल लंकेश बल्कि डॉक्टर नरेंद्र दाभोलकर, गोविंद पंसारे और एमएम कलबुर्गी की जिन लोगों ने हत्या की, उसके पीछे इसी संस्था का दिमाग था." एसआईटी ने तब व्यापक तौर पर सनातन संस्था और इसकी इकाइयों की बड़ी साजिश की ओर भी ध्यान खींचा.
- सितंबर 2016 में जब एसआईटी पनसेर की हत्या के मामले में जांच कर रहा था तो उसे सनातन संस्था के पनवेल स्थित आश्रम से 20 बक्सों में प्रतिबंधित नींद की दवाएं और अन्य दवाएं मिलीं. एसआईटी के अधिकारी का कहना है कि ये संदेश है कि आश्रम में लोगों के दिमाग पर काबू पाने के लिए ड्रग्स का इस्तेमाल किया जाता है.

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संस्था ने दी शार्पशूटिंग की ट्रेनिंग
हिंदुस्तान टाइम्स में प्रकाशित खबर में पुलिस सूत्रों के अनुसार कहा गया है कि इस संस्था ने कम से कम 50 शार्पशूटर्स को ट्रेनिंग दी है और 36 खास सदस्यों को हत्या का जिम्मा दिया हुआ है.

इस संस्था पर प्रतिबंध लगाने का एक प्रस्ताव पुलिस ने पूर्व महाराष्ट्र सरकार के पास भेजा हुआ था लेकिन इस पर कोई कार्यवाही नहीं हुई. प्रस्ताव में कहा गया कि ये संस्था आतंकवादी गतिविधियों में संलिप्त रही है, इसकी कुछ घटनाएं 2008 और 2009 में सामने आने लगी थीं. लेकिन इसकी गतिविधियों पर कभी रोक नहीं लगाई गई.

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क्यों हालिया चर्चा में है ये
- 10 अगस्त को एटीएस ने सनातन संस्था से हमदर्दी रखने वाले और हिंदू गोवंश रक्षा समिति के सदस्य वैभव राउत को गिरफ्तार किया. जब उसके घर पर छापा मारा गया तो कम से कम आठ देसी बम और अन्य विस्फोटकों के अलावा सनातन संस्था का साहित्य मिला. इसके बाद एटीएस ने शरद कालस्कर और सुधन्वा जोगलेकर को गिरफ्तार किया, जिनके पास विस्फोटक और कई हथियार मिले, वो महाराष्ट्र के कई इलाकों में धमाकों की साजिश रच रहे थे. एटीएम ने साबित किया कि ये तीनों सनातन संस्था से जुड़े हुए हैं.

- इन गिरफ्तारियों और एटीएस व एसआईटी के खुलासे के बाद महाराष्ट्र, कर्नाटक और गोवा की सिविल सोसायटीज ने इन आतंकवादी संगठनों पर प्रतिबंध लगाने की मांग की है. आरएसएस और महाराष्ट्र सरकार ने इस संस्था से दूरी बनाए रखी है.

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एटीएस की रिपोर्ट पर क्या हुआ
एटीएस की रिपोर्ट पर केंद्र सरकार आश्वस्त नहीं थी कि सनातन संस्था को आतंकवादी संस्था माना जाए. वर्ष 2015 में दाभोलकर, पंसारे और कलबुर्गी की हत्या के बाद एटीएस ने फिर अपनी जांच रिपोर्ट पेश करते हुए इस संस्ता पर प्रतिबंध की मांग की .

सनातन संस्था के प्रकाशन
- अठावले सनातन संस्था के लिए 65 लाख से ज्यादा किताबें हिंदी, मराठी, कन्नड, गुजराती, अंग्रेजी के साथ अन्य भारतीय भाषाओं में प्रकाशित करा चुके हैं. ये दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और मासिक पत्र पत्रिकाएं भी प्रकाशित करता है.
- संस्थान एक आध्यात्मिक चैनल श्रीशंकरा भी है, जो सप्ताह में पांच दिन टेलीकास्ट करता है.
- वो हिंदू भावनाओं को ठेस पहुंचाने वालों के खिलाफ कोर्ट में अपील भी करता है.

कौन कौन प्रतिबंध की मांग कर चुका है
- गोवा बीजेपी विधायक विष्णु वाग ने सितंबर 2015 में सनातन संस्था पर प्रतिबंध की मांग की थी. उनका कहना था कि ये बात के सबूत हैं कि ये संस्था पनसेर और कलबुर्गी की हत्या में शामिल थी. उन्होंने इसकी तुलना सिमी से भी की थी लेकिन अगले ही दिन गोवा के मुख्यमंत्री लक्ष्मीकांत पारसेकर ने सनातन संस्था पर प्रतिबंध से इनकार कर दिया.

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- आम आदमी पार्टी सनातक संस्था पर प्रतिबंध की मांग कर चुकी है
- एनसीपी ने महाराष्ट्र में कांग्रेस से साथ मिलकर इस पर प्रतिबंध की मांग की है. एनसीपी के नेता नवाब मलिक का कहना है कि सनातन संस्था आतंकवादी संगठन है.
- महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण ने सनातन संस्था को खतरनाक संगठन बताते हुए उस पर प्रतिबंध की मांग की थी. उन्होंने कहा कि ये संस्था आतंकी संस्था है, इससे देश को खतरा है.
- सीपीआई और सीपीएम भी सनातन संस्था पर प्रतिबंध लगाने की मांग कर चुकी हैं.
- अप्रैल 2011 में महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण ने केंद्र सरकार के सामने एक प्रस्ताव भेजा था लेकिन पर्याप्त सबूत नहीं होने से केंद्र सरकार ने उसके खिलाफ बैन नहीं लगाया था.
- वर्ष 2017 महाराष्ट्र की भाजपा-शिवसेना सरकार ने केंद्र सरकार को सनातन संस्था पर प्रतिबंध संबंधी एक प्रस्ताव भेजा था.

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