गांधीजी नहीं बल्कि उनके इस रिश्तेदार की दिमाग की उपज थी सत्याग्रह

News18Hindi
Updated: September 11, 2019, 2:59 PM IST
गांधीजी नहीं बल्कि उनके इस रिश्तेदार की दिमाग की उपज थी सत्याग्रह
गांधीजी का दांडी मार्च

जब गांधीजी ने दक्षिण अफ्रीका में अपने साथियों से सत्याग्रह के आधार पर आंदोलन करने को कहा तो इसका उन्हीं के कुछ सहयोगियों ने मजाक उड़ाया था लेकिन बाद में इसकी ताकत का अंदाज खुद उन्हें भी बखूबी हो गया

  • News18Hindi
  • Last Updated: September 11, 2019, 2:59 PM IST
  • Share this:
महात्मा गांधी ने 11 सितंबर 1906 को सत्याग्रह शब्द का पहली बार इस्तेमाल किया था. इसका इस्तेमाल उन्होंने दक्षिण अफ्रीका में रंगभेद के खिलाफ किया. उनका इस नए शब्द का प्रयोग इतना सफल रहा कि बाद में ना केवल पूरी दुनिया ने इसे सीखा बल्कि इसकी धाक भी जम गई. बल्कि बाद में दुनियाभर में तमाम ऐसे आंदोलन हुए, जो गांधीजी के सत्याग्रह के प्रेरित रहे.

सत्याग्रह का मतलब है सत्य का आग्रह करना या सत्य पर अटल रहना. दक्षिण अफ्रीका में रंगभेद के खिलाफ अपने अभियान के लिए गांधीजी एक नया शब्द चाहते थे. उन्होंने इसके लिए एक प्रतियोगिता का आयोजन किया, जिससे सत्याग्रह शब्द सामने आया. गांधी के लिए सत्याग्रह अहिंसा या निष्क्रिय प्रतिरोध से कहीं ज्यादा था.

इस शख्स ने सुझाया ये शब्द 
मगनलाल गांधी ने उन्हें ये शब्द सुझाया. मगनलाल ने गांधी जी से कहा कि आंदोलन के लिए ये शब्द "सदाग्रह' होना चाहिए. गांधीजी तुरंत इस शब्द पर सहमत हो गए. बस उन्होंने इसमें थोड़ा बदलाव किया. उन्होंने सदाग्रह को सत्य से जोड़कर इसे सत्याग्रह कर दिया.

दरअसल इस अवधारणा के बारे में पहली बार अमेरिका के दार्शनिक थोरो ने जिस सिविल डिसओबिडियेन्स (सविनय अवज्ञा) की तकनीक का वर्णन किया, "सत्याग्रह' शब्द उससे मिलता जुलता था.

ये भी पढ़ें - इसरो के ऑफिस में कैसा है काम करने का माहौल और कितनी है सैलरी

कौन थे मगनलाल
Loading...

मगनलाल खुशालचंद गांधी दरअसल महात्मा के एक चाचा के पोते थे. वो उनके अनुयायी थे. वो पहले गांधीजी के साथ दक्षिण अफ्रीका में रहे. फिर उनके साथ भारत भी आए. पटना में 23 अप्रैल 1928 को टायफायड से उनका निधन हो गया.

मगनलाल गांधी-जो गांधीजी के विश्वस्त लोगों में थे


हालांकि वो 1903 में धन कमाने की इच्छा लेकर दक्षिण अफ्रीका गए थे लेकिन फिर जब गांधी जी के संपर्क में आए तो उनके दर्शन में ही रह गए. बाद में उन्होंने गांधीजी के फोनिक्स आश्रम में रहना शुरू कर दिया था. गांधी जी ने कई बार उनका जिक्र अपने विश्वस्त सहयोगी के रूप में किया है.

बाद में जब गांधीजी ने साबरमती आश्रम की स्थापना की तो उन्होंने खुद कहा कि इस आश्रम का तन मन  से ख्याल रखने वाले शख्स थे मगनलाल. हालांकि वो काफी कड़े और अनुशासनप्रिय थे. बाद में उन्होंने साबरमती आश्रम में दलितों के प्रवेश का विरोध भी किया था. लेकिन वो ऐसे शख्स थे, जिन पर गांधीजी वाकई भरोसा करते थे.

ये भी पढ़ें - 9/11 के बाद अमेरिका में क्यों ज्यादा पैदा होने लगे थे बच्चे?

शुरू में सत्याग्रह का मजाक भी उड़ा था
जब 1906 में गांधीजी ने दक्षिण अफ्रीका में इसका इस्तेमाल शुरू किया, तो शुरू में तो इसका खासा मजाक उड़ा. उनके कुछ साथी इससे असहमत भी रहे. लेकिन बाद में उन्हें इसकी ताकत का बखूबी अहसास हुआ. गांधीजी ने सत्याग्रह की बदौलत दक्षिण अफ्रीका में कई आंदोलनों का सफलतापूर्वक संचालन किया और वहां की रंगभेदी सरकार को झुकाने में भी सफल रहे.

जब गांधीजी ने 11 सितंबर 10906 में पहली बार दक्षिण अफ्रीका में सत्याग्रह शुरू किया तो उनके कुछ सहयोगी इस तरीके से कतई सहमत नहीं थे


इसके पीछे गांधीजी की सोची-समझी रणनीति थी. उनका मानना था कि यदि विरोधी की ताकत ज्यादा है तो सशस्त्र विरोध का कोई मतलब नहीं रह जाता. इसलिए हमेशा मजबूत विरोधी को नि:शस्त्र विरोध से असर डाला जा सकता है.

गांधी जी का मानना था कि सत्य का अर्थ प्रेम है और आग्रह वह ताकत है जो इस सत्य और प्रेम यानी अहिंसा से पैदा होती है. गांधी ने फिर निष्क्रिय प्रतिरोध का इस्तेमाल खत्म कर दिया. फिर अंग्रेजी में भी सत्याग्रह शब्द का इस्तेमाल होने लगा.

सत्याग्रह का मतलब है अन्याय के खिलाफ आवाज उठाना, बिना अपराधी पर हाथ उठाए. सत्याग्रह में आप खुद मुश्किलों का सामना करते हैं. किसी भी सत्याग्रही का मकसद है कि वो उसे दुख पहुंचाने वाले को अहिंसा के जरिए अपनी सोच बदलने पर मजबूर करे.

बाद में गांधीजी जब भी सत्याग्रह के बारे में पूछा गया तो उनका जवाब होता था-ऐसा आंदोलन, जो पूरी तरह सच्चाई पर कायम है और हिंसा के उपायों के एवज में चलाया जा रहा है.


गांधीजी के अनुसार क्या था सत्याग्रह
गांधी जी ने लार्ड इंटर के सामने सत्याग्रह की संक्षिप्त व्याख्या इस प्रकार की थी-"यह ऐसा आंदोलन है जो पूरी तरह सच्चाई पर कायम है. हिंसा के उपायों के एवज में चलाया जा रहा.' अहिंसा सत्याग्रह दर्शन का सबसे महत्वपूर्ण तत्व है, क्योंकि सत्य तक पहुँचने और उन पर टिके रहने का एकमात्र उपाय अहिंसा ही है. आजादी के लिए गांधीजी ने देशभर में जितने आंदोलन किये, वो सभी अहिंसा और सत्याग्रह पर टिका था.

दुनियाभर में अब गांधीजी से प्रेरणा लेकर होते हैं आंदोलन
आज दुनियाभर में सत्याग्रह एवं अहिंसक प्रतिकार के प्रयोग से आंदोलन हो रहे हैं. हांगकांग में पिछले एक महीने से लाखों लोग सड़कों पर उतरकर आंदोलन कर रहे हैं. उनका ये आंदोलन पूरी तरह अहिंसक है.
द्वितीय महायुद्ध में हजारों युद्धविरोधी पैसेफिग्ट' सेना में भरती होने की बजाय जेलों में गए. बट्रेड रसेल जैसे दार्शनिक युद्धविरोधी सत्याग्रहों के कारण जेल गए. मार्टिन लूथर किंग और नेल्सन मंडेला ने पूरी तरह गांधीजी के सत्याग्रह का ही अनुसरण किया.

ये भी पढ़ें - हजारों रुपए के मोटे चालान से बचना है तो ये कागजात जरूर रखें

News18 Hindi पर सबसे पहले Hindi News पढ़ने के लिए हमें यूट्यूब, फेसबुक और ट्विटर पर फॉलो करें. देखिए नॉलेज से जुड़ी लेटेस्ट खबरें.

First published: September 11, 2019, 12:56 PM IST
Loading...
पूरी ख़बर पढ़ें अगली ख़बर
Loading...