Explained: क्या है स्मॉग, जो हर ठंड में दिल्ली-एनसीआर को जकड़ लेता है?

मौसम बदलने के साथ ही दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण का स्तर बढ़ता दिख रहा है
मौसम बदलने के साथ ही दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण का स्तर बढ़ता दिख रहा है

स्मॉग (smog) काफी खतरनाक है, जो न केवल सेहत पर असर डालता है, बल्कि इसके कारण दुर्घटनाएं भी बढ़ जाती हैं. जानिए, ये स्मॉग आखिर है क्या बला और अपने साथ क्या परेशानियां लाता है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: October 12, 2020, 12:45 PM IST
  • Share this:
मौसम बदलने के साथ ही दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण का स्तर बढ़ता दिख रहा है. रविवार के बाद सोमवार की सुबह भी धुंध के साथ हुई. ये धुंध सर्दियों के कारण होने वाली प्राकृतिक धुंध यानी कोहरा नहीं, बल्कि स्मॉग है. हर साल ठंड आते ही स्मॉग शब्द से हमारा सामना होता है. जानिए, आखिर ये स्मॉग है क्या बला.

'स्मॉग' है क्या
स्मॉग शब्द का इस्तेमाल 20वीं सदी की शुरुआत से हो रहा है. यह शब्द अंग्रेजी के दो शब्दों 'स्मोक' और 'फॉग' से मिलकर बना है. आमतौर पर जब ठंडी हवा किसी भीड़भाड़ वाली जगह पर पहुंचती है तब स्मॉग बनता है. ठंडी हवा भारी होती है इसलिए वह रिहायशी इलाके की गर्म हवा के नीचे एक परत बना लेती है. तब ऐसा लगता है जैसे ठंडी हवा ने पूरे शहर को एक कंबल की तरह लपेट लिया है.

ये भी पढ़ें: क्या है वो ब्लू फ्लैग, जो पहली बार भारत के 8 समुद्र तटों को मिला है
स्मॉग बनने का दूसरा बड़ा कारण है प्रदूषण. आजकल हर बड़ा शहर वायु प्रदूषण से जूझ ही रहा है. कहीं उद्योग, धंधों और गाड़ियों से निकलने वाला धुंआ तो कहीं चिमनियां, सब मिलकर हवा में बहुत सारा धुआं छोड़ रहे हैं.



समझिए कि स्मॉग अपने साथ क्या परेशानियां लाता है- news18 graphic


कैसे बनता है स्मॉग
ये प्रदूषित गर्म हवा हमेशा ऊपर की ओर उठने की कोशिश करती है और थोड़ी ही देर में वह किसी ढक्कन की तरह हो जाती है जिससे कुछ ही समय में हवा की इन दोनों गर्म और ठंडी परतों के बीच हरकतें रुक जाती हैं. इसी खास 'उथल पुथल' के कारण स्मॉग बनता है. यही कारण है कि गर्मियों के मुकाबले जाड़ों के मौसम में स्मॉग ज्यादा आसानी से बनता है.

ये भी पढ़ें: Explained: क्या होगा अगर China दुनिया का सबसे ताकतवर देश बन जाए? 

पराली भी है एक वजह
पंजाब में हर साल इस समय एक करोड़ 80 लाख टन भूसा खेतों में जला दिया जाता है, लेकिन ये कानूनन जुर्म है. पंजाब सरकार ने इस तरह भूसा जलाने वाले किसानों के लिए सजा तय कर रखी है. पंजाब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के मुताबिक हर साल किसानों को इसके लिए जागरूक किया जाता है लेकिन उसका खास असर नहीं होता. नासा की रिपोर्ट के अनुसार, पंजाब, उत्तर प्रदेश, राजस्थान और हरियाणा में हर साल जलाई जाने वाली पराली की वजह से और हवा की गति में गिरावट से एयर लॉक के हालात हो जाते हैं. यानी इससे होने वाला प्रदूषण स्मॉग में बदल जाता है

कोहरा धुंध से घना होता है और अपेक्षाकृत ज्यादा वक्त तक रह सकता है


फॉग और स्मॉग में क्या है अंतर
कोहरा यानी फॉग और धुंध यानी स्मॉग/मिस्ट में अंतर है. कोहरे के धुएं के साथ मिलने पर धुंध यानी स्मॉग बनता है. साल 1905 में स्मॉग शब्द चलन में आया जो अंग्रेजी से फॉग और स्मोक से मिलकर बना है. डॉ हेनरी एंटोनी वोयेक्स ने अपने पेपर में इसका जिक्र किया, जिसके बाद से ये टर्म कहा-सुना जाने लगा.

क्यों कोहरा धुंध से ज्यादा घना होता है 
कोहरा धुंध से घना होता है और अपेक्षाकृत ज्यादा वक्त तक रह सकता है क्योंकि इसमें पानी के कण धुंध से ज्यादा होते हैं. कोहरे में देख सकने की क्षमता हजार मीटर से कम हो जाती है, इसमें हवाई जहाज तो चल सकते हैं लेकिन सड़क पर गाड़ियां चलने के लिए ये आदर्श स्थिति नहीं. 50 मीटर से कम दृश्यता होते ही सड़क पर दुर्घटनाएं होने लगती हैं.

स्मॉग बनने का बड़ा कारण है प्रदूषण- सांकेतिक फोटो (Pixabay)


स्मॉग ला रहा आफत
धुंध की वजह से भी दुर्घटनाएं पिछले सालों में लगातार बढ़ी हैं. रोड ट्रांसपोर्टेशन मिनिस्ट्री के अनुसार 2014 में 16 लोगों की कोहरे की वजह से सड़क दुर्घटना में मौत हुई तो 2015 में ये 21, जबकि 2016 में बढ़कर 25 से ज्यादा हो गया. दिल्ली, यूपी, पश्चिम बंगाल और हरियाणा में ही आधे से ज्यादा दुर्घटनाएं और मौतें हुईं. ये सभी रिपोर्टेड मामले हैं यानी वही मामले हैं, जिनपर कोई पुलिस कार्रवाई हुई. मौतों के अलावा गंभीर दुर्घटनाएं इन आंकड़ों में शामिल नहीं हैं.

ये भी पढ़ें: जानिए, क्यों जापान में लड़कियां खून के धब्बों से सने कपड़े पहन रही हैं  

सेहत के लिए भी है खतरनाक
स्मॉग में पानी की बूंदों के साथ धूल और हवा में मौजूद जहरीले तत्व जैसे नाइट्रोजन ऑक्साइड और ऑर्गेनिक कंपाउंड मिलकर नीचे की तरफ ओजोन की गहरी परत बना लेते हैं. अब आप सोचेंगे कि ओजोन तो हमें अल्ट्रावायलेट किरणों से बचाने वाली अच्छी परत है तो यह जान लें कि ओजोन तभी तक ठीक है जब वातावरण में ऊपर की ओर हो, जैसे ही यह ग्राउंड-लेवल पर आती है, सेहत के लिए बेहद खतरनाक हो जाती है.

स्मॉग से होने वाले बड़े नुकसान

  • खांसी, सांस लेने में तकलीफ

  • आंखों में जलन

  • ब्रॉन्काइटिस

  • दिल की बीमारी

  • त्वचा संबंधी बीमारियां

  • बालों का झड़ना

  • नाक, कान, गला, फेफड़े में इंफेक्शन

  • ब्लड प्रेशर के रोगियों को ब्रेन स्ट्रोक की समस्या

  • दमा के रोगियों को अटैक का खतरा

अगली ख़बर

फोटो

टॉप स्टोरीज