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जानिए, क्या है स्विस बैंक और दूसरे बैंकों से किस तरह अलग हैं ये

News18Hindi
Updated: December 3, 2018, 6:42 PM IST
जानिए, क्या है स्विस बैंक और दूसरे बैंकों से किस तरह अलग हैं ये
प्रतीकात्मक फोटो

बिना नाम का अकाउंट खोलने के लिए स्विटजरलैंड जाना जरूरी होता है.

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  • Last Updated: December 3, 2018, 6:42 PM IST
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स्विट्जरलैंड सिर्फ अपनी खूबसूरत वादियों और चमचमाती इमारतों के लिए ही प्रसिद्ध नहीं है. एक अरसे से टैक्स चोरी के बाद उसे छिपाने के लिए लोग स्विस बैंकों की शरण लेते हैं. स्विस नेशनल बैंक की जारी रिपोर्ट के अनुसार 2017 में यहां के बैंकों में भारतीयों का पैसा 50 फीसदी तक बढ़ गया. अपने बैंकों की गोपनीयता के नियमों की वजह से स्विट्जरलैंड काला धन की जमाखोरी का अड्डा बन चुका है. इसी छवि को सुधारने के क्रम में स्विट्जरलैंड दो कंपनियों के बारे में भारतीय एजेंसियों को जानकारी देने जा रहा है. स्विट्जरलैंड के बैंकों की कई खासियतें उन्हें tax heaven बनाती हैं.

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यहां पर लगभग 400 बैंक हैं. ये तमाम बैंक स्विस फेडरल बैंकिंग एक्ट के गोपनीयता कानून के सेक्शन 47 के तहत बैंक अकाउंट खोलने का अधिकार रखते हैं. इस धारा के तहत जब तक अकाउंट होल्डर ऐसे वित्तीय अपराध से जुड़ा न हो, जो स्विट्जरलैंड में भी अपराध की श्रेणी में आता हो, तब तक बैंक उसके बारे में कोई जानकारी नहीं देगा और न ही पुलिस ऐसे मामले में पूछताछ कर सकती है. बैंक कड़ाई से धारा 47 का पालन करता है. यहां तक कि इसके उल्लंघन पर कड़ी सजा का प्रवधान है. यही वजह है कि लोग अपना काला धन स्विस बैंकों में जमा कराना पसंद करते हैं. हालांकि बैंक गोपनीयता कानून दूसरे देशों में भी हैं लेकिन वित्तीय मामलों में पूछताछ होने पर आमतौर पर सरकार जानकारी साझा करती है, सिवाय स्विस बैंकों के.







ऐसे हुई शुरुआत
स्विस बैंकों में सीक्रेसी बरकरार रखने का इतिहास काफी पुराना है. 17वीं सदी से ही इसकी शुरुआत हो चुकी थी, जब ग्रांड कौंसिल ऑफ जिनेवा ने एक कोड तैयार किया, जिसके तरह अकाउंट होल्डर की जानकारी किसी से भी साझा न करने का नियम बनाया गया. इसी दौर में फ्रेंच लेखक और दर्शक वॉल्टेयर ने कहा था कि अगर आप किसी स्विस बैंकर को खिड़की से कूदकर भागता देखें तो उसके पीछे दौड़ लें. इससे कोई न कोई फायदा जरूर होगा.

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लगभग 3 सौ साल पहले ही इसके टैक्स हेवन बनने की शुरुआत हो चुकी थी. यहां के नियम इतने सख्त थे कि पहले और फिर दूसरे विश्वयुद्ध के दौरान पड़ोसी देश स्विस बैंकों पर भड़कने लगे. यहां तक कि जर्मनी में एक कानून बन गया कि अगर कोई अपना पैसा स्विस बैंकों में जमा करने की कोशिश करता पाया जाए तो उसे मौत की सजा दी जा सकती है. कई यहूदियों को भी वित्तीय गड़बड़ी की कोशिश के आरोप में मौत की सजा दी गई.

क्यों चल रहे हैं स्विस बैंक
बहुत से लोगों की धारणा है कि स्विस बैंक सिर्फ कालाधन जमा करने का जरिया हैं. हालांकि ऐसा है नहीं. स्विस बैंकों में खाताधारक की पहचान गुप्त रखने के पीछे ये मंशा रही कि राजनैतिक अस्थिरता के हालात वाले देशों में लोगों का पैसा सुरक्षित रहे. जैसे कि सूडान, नॉर्थ कोरिया या इराक जैसे देशों में हालात लंबे अरसे से खराब हैं. ऐसे में पैसे लूटे जाने से बचाने के लिए स्विस बैंक अच्छा जरिया साबित होते रहे हैं. हालांकि इसका इस्तेमाल गलत इरादों से भी किया जाता रहा है.

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कौन खोल सकता है अकाउंट
स्विस बैंक में अकाउंट खोलने के लिए अरब-खरबपति होना जरूरी नहीं. ये किसी भी सामान्य व्यक्ति के लिए भी उसी तरह से काम करता है. आप खाता खोलने के लिए ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं. इसके लिए आपको पहचान संबंधी दस्तावेज भेजने होंगे जो सरकारी एजेंसी से सत्यापित हों. ये ई-मेल भी किया जा सकता है. बिना नाम का अकाउंट खोलने के लिए स्विटजरलैंड जाना जरूरी होता है. दस्तावेजों के आधार पर स्विटजरलैंड के बैंकों में पर्सनल, सेविंग्स अकाउंट और इन्वेस्टमेंट अकाउंट जैसे खाते खुलवा सकते हैं.

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बिना नाम का खाता खुलवाना आसान नहीं
टैक्स बचाने की नीयत से जो अकाउंट खुलता है उसे नंबर्ड अकाउंट कहा जाता है. इसकी शुरुआत लगभग 70 लाख से होती है और दस्तावेज भेजने की बजाए खुद वहां जाना होता है. इसके अलावा हर साल लगभग 20 हजार रुपए मेंटेनेंस के देने होते हैं. यहां हर ट्रांजेक्शन नाम की बजाए एक नंबर से होता है और बैंक के कनिष्ठ अधिकारियों के पास भी पहचान के तौर पर वही नंबर रहता है. अगर किसी स्विस बैंक की शाखा आपके देश में हो तो स्विस बैंक का गोपनीयता कानून वहां लागू नहीं होता और अकाउंट रखने वाले की तमाम जानकारी पुलिस और सरकार से बांटी जा सकती है. यही वजह है कि काला धन जमा करने वाले ऐसी कई गूढ़ बातों का ध्यान रखते हुए ही खाता खुलवाते हैं.

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बैंक अकाउंट होल्डर के किसी बड़े मामले में लिप्त होने की जानकारी आने पर भी बैंक के अधिकारी या कर्मचारी तब तक कोई बयान नहीं देते हैं, जब तक कि खुद स्विस सरकार उन्हें इसके आदेश न दे. हालांकि काला धन और खाताधारक के अपराधी होने के बढ़ते मामलों को देखते हुए स्विस सरकार नियमो में बदलाव की कोशिश कर रही है. साल 1998 में आए एक नियम के तहत बड़े ट्रांजेक्शन, जो संदिग्ध हों, पर बैंक खुद निगरानी आयोग को सूचना देने लगा है. अंतरराष्ट्रीय दबाव की वजह से भी स्विटरजरलैंड ने अपने बैंक नियम में कई बदलाव किए हैं ताकि टैक्स चोरी पर लगाम लग सके.
First published: December 3, 2018, 2:32 PM IST
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