Explained: अमेरिका ने क्यों किया गृहयुद्ध में झुलस रहे सीरिया पर हमला?

सीरियाई तानाशाह के खिलाफ जनता के विरोध में देश का 70 फीसदी से ज्यादा इलाका जल रहा है (Photo- news18 English via Reuters 2)

सीरियाई तानाशाह के खिलाफ जनता के विरोध में देश का 70 फीसदी से ज्यादा इलाका जल रहा है (Photo- news18 English via Reuters 2)

सीरिया संकट (Syrian crisis) अब दुनियाभर की नजरों में है. सीरियाई तानाशाह के खिलाफ जनता के विरोध में देश का 70 फीसदी से ज्यादा इलाका जल रहा है. इस बीच अमेरिका अक्सर सीरिया पर हवाई हमले करता है.

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  • Last Updated: February 27, 2021, 10:29 AM IST
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सीरिया पर अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन के कार्यकाल में पहला हमला हुआ है. शुक्रवार को की गई इस अमेरिकी एयरस्ट्राइक में सीरिया के उन इलाकों पर बमबारी की गई, जहां ईरान के सहयोग से आतंकी गतिविधियां हो रही थीं. ये हमला बदले की कार्रवाई था क्योंकि पिछले कुछ दिनों के भीतर ही आतंकियों ने ईराक स्थित अमेरिकी एयरबेस पर हमला किया था. सीरिया पर पहले भी अमेरिकी हमले होते रहे हैं.

एक दशक पहले शुरू हुआ था विरोध
सीरिया, ईरान और अमेरिका का त्रिकोण समझने के लिए एक बार साल 2011 में जाना होगा. ये वो समय था, जब सीरिया में अरब स्प्रिंग की शुरुआत हुई थी. असल में उस दौरान सीरिया में जो सरकार थी, उसके विरोध में ये मुहिम चली. सीरियाई तानाशह बशर अल-असद देश के विकास में तमाम मोर्चों पर नाकाम हो चुके थे और जनता उन्हें गद्दी से उतारना चाहती थी.

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तानाशाह करने लगा क्रूरता 


जनता के सड़कों पर उतरने से भड़की सरकार ने आंदोलन को कुचलने के लिए क्रूरता शुरू कर दी. वो विद्रोहियों को मरवाने लगा. यहां तक कि आम लोगों पर भी केमिकल हमले करवा नरसंहार करवाने लगा.  इसके बाद ये मुद्दा देश तक नहीं रहा, बल्कि लड़ाई में रूस और ईरान जैसे देश शामिल हो गए. जनता सेना पर भारी पड़ रही थी, जिसे दबाने के लिए इन देशों ने धन और सैनिक मुहैया कराए. यहां तक कि तानाशाह अपने ही देशवासियों को क्रूरता से मरवाने लगा.

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एक ओर ईरान सीरिया में तानाशाह को बढ़ावा दे रहा है तो अमेरिका इसके विरोध में आ गया (Photo- news18 English via AFP)


अमेरिका भी हुआ शामिल
एक ओर ईरान सीरिया में तानाशाह को बढ़ावा दे रहा था तो दूसरी ओर अमेरिका इसके विरोध में आ गया. वो असद सरकार के तख्तापलट में जनता के साथ है. अमेरिका के पास सीरिया के लोगों के साथ खड़ा होने की एक वजह ईरान भी है. ईरान और अमेरिका में संबंध काफी तल्ख हैं और ईरान सीरियाई तानाशाह के साथ है. इससे अमेरिका अपने-आप दूसरे पाले में आ गया.

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रूस और अमेरिकी तनाव भी एक वजह 
अमेरिका के सीरियाई तानाशाह पर गुस्से की एक वजह रूस भी है. रूस खुलकर तानाशाह असद का समर्थन कर रहा है और यहां तक कि सीरिया में अपना युद्ध बेस तक बना चुका है, जहां से रूसी सैनिक सीरिया के विद्रोहियों के खिलाफ कार्रवाई करते हैं. रूस इस तरह से मिडिल ईस्ट में अपना दबदबा कायम करना चाहता था.

अब रूस और अमेरिका का तनाव तो किसी से छिपा नहीं है. शीत युद्ध के बाद से दोनों देशों के बीच जंग तो नहीं हो रही लेकिन तनाव बना हुआ है. वे एक-दूसरे पर सीधा हमला नहीं कर रहे लेकिन दूसरे देशों की आड़ में एक-दूसरे पर आक्रामक जरूर हो जाते हैं. यही कारण है कि अमेरिका सीरिया की मौजूदा सत्ता के खिलाफ लगातार सैन्य कार्रवाई कर रहा है.

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लाखों लोग मारे जा चुके 
अमेरिका, रूस और ईरान की आपसी दुश्मनी के बीच पहले से ही अपने तानाशाह से त्रस्त देश सीरिया अब खंडहर में बदलता जा रहा है. देश का लगभग 70 फीसदी इलाका युद्ध की चपेट में है. आएदिन बमबारी होती रहती है. यहां तक कि कई बार केमिकल अटैक भी हो चुके हैं. इससे सीरियाई आबादी बुरी तरह से प्रभावित है. क्विंट की एक रिपोर्ट के मुताबिक हमलों और आपसी लड़ाई के दौरान देश में लगभग 4 लाख जानें जा चुकी हैं.

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सीरिया से भागकर दूसरे देशों में शरण लेने के दौरान बहुत से निर्दोष मारे जा चुके (Photo- news18 English via Reuters)


दूसरे देशों में ले रहे शरण 
एक अनुमान के मुताबिक सीरिया में विद्रोहियों और तानाशाह की आपसी लड़ाई के बीच लगभग 60 लाख लोग देश छोड़कर दूसरे देशों में शरण ले चुके हैं. इसके अलावा देश से भागकर दूसरे देशों में शरण लेने के दौरान बहुत से निर्दोष मारे भी जा चुके. सीरिया से भागने के दौरान समुद्र में फंसकर जान गंवा चुके एक बच्चे और एक पिता-बेटी की तस्वीर साल 2017 में वायरल हुई थी, जिसने दुनिया को झकझोरकर रख दिया था. हालांकि वर्तमान हालातों में सीरिया में युद्धविराम होने की कोई संभावना नहीं दिख रही.

ट्रंप के कार्यकाल में रूस से बढ़ा तनाव 
साल 2017 में पुतिन और ट्रंप की मित्रता से सीरिया संकट के समाधान की उम्मीदें जागी थीं, लेकिन सीरिया संकट तो खत्म नहीं हुआ, बल्कि इसके कारण ट्रंप-पुतिन की दोस्ती जरूर कमजोर पड़ गई. हुआ ये था कि सीरिया के इदबिल प्रांत के खान शेखहुन में रासायनिक हमलों में काफी जानें गई थीं. इससे भड़के हुए अमेरिका ने तानाशाह के कैंपों पर ताबड़तोड़ हवाई हमले किए थे. इससे सीरियाई तानाशाह को सपोर्ट कर रहा रूस अमेरिका पर भड़क उठा था. तब से ही दोनों महाशक्तियां तनाव में आ गईं.
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