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पानी में TDS का क्या है काम; चीन की हरकत से क्यों नाला बन गई अरुणाचल प्रदेश की नदी?

पानी में TDS का क्या है काम; चीन की हरकत से क्यों नाला बन गई अरुणाचल प्रदेश की नदी?

प्रतीकात्मक तस्वीर

प्रतीकात्मक तस्वीर

What Is TDS In Water: चीन की सीमा से लगे पूर्वोत्तर के अरुणाचल प्रदेश में एक नदी के पानी के अचानक काला पड़ने की खबर से हर कोई स्तब्ध है. रिपोर्ट के मुताबिक कामेंग नदी में ऐसा हुआ और इस कारण लाखों मछलियां कुछ ही देर में मर गईं. नदी के पानी के काला पड़ने के पीछे चीन का हाथ बताया जा रहा है. चीन ने नदी में भारी मात्रा में मलबा डाला (locals blame China for increasing TDS in water) है जिससे कि उसके पानी में टीडीएस की मात्रा काफी ज्यादा बढ़ गई है और वह उस पानी में मछलियों का दम घुंट गया.

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    What Is TDS In Water:  चीन की सीमा से लगे पूर्वोत्तर के अरुणाचल प्रदेश में एक नदी के पानी के अचानक काला पड़ने की खबर से हर कोई स्तब्ध है. रिपोर्ट के मुताबिक कामेंग नदी में ऐसा हुआ और इस कारण लाखों मछलियां कुछ ही देर में मर गईं. यह घटना राज्य के ईस्ट कामेंग जिले की है. इसके बाद हुई जांच से पता चला कि नदी के पानी में अचानक से टीडीएस की मात्रा काफी ज्यादा बढ़ गई थी. इस कारण ये मछलियां मर गईं. वह सांस नहीं ले पा रही थीं.

    क्या होता है टीडीएस
    दरअसल, यह एक बेहद आम शब्द है. यह अंग्रेजी के शब्द टोटल डिजॉल्व सॉलिड (Total Dissolved Solids) संक्षिप्त रूप है. इसका मतलब यह है कि पानी में घुले हुए कण या ठोस पदार्थ की सांद्रता या जमाव (concentration) कितना है. टीडीएस में इनऑर्गेनिक सॉल्ट यानी कैल्शियम, मैग्नेशियम, क्लोराइड, सल्फेटस, बाइकार्बोनेट्स आदि पदार्थ होते हैं. इसके अलावा इसमें अन्य कई इनऑर्गेनिक पदार्थ भी हो सकते हैं. टीडीएस से पानी के खारापन का पता चलता है. जिस पानी में जितना अधिक टीडीएस होगा वह उतना ही ज्यादा खरा होगा.

    पीने के पानी में कितना होना चाहिए टीडीएस
    विश्व स्वास्थ्य संगठन ने प्रति दस लाख कणों (parts per million) में टीडीएस की मात्रा 300 तक होने पर उस पानी को पीने योग्य बताया है. इससे संक्षेप में पीएमपी कहा जाता है. इस तरह टीडीएस की माप पीएमपी में होती है. पानी में 300 पीएमपी से अधिक टीडीएस होने वह उसका स्वाद नमकीन लगेगा और उसमें मिनरल्स की मात्रा काफी ज्यादा होगी. इससे हमारे शरीर को नुकसान हो सकता है. वहीं दूसरी तरह पीने के पानी में शून्य या न के बराबर टीडीएस भी हानिकारक है. क्योंकि हमारे शरीर को कई तरह के मिनरल्स की जररूत है. ऐसे में पानी से इन मिनरल्स की पूर्ति होती है. डब्ल्यूएचओ ने पीने के पानी में 1000 पीएमपी के स्तर को खतरनाक करार दिया है.

    हिमाचल के नदी में कैसी बढ़ी टीडीएस की मात्रा
    पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक जिला मत्स्य पालन अधिकारी (डीएफडीओ) हाली ताजो ने बताया है कि ‘कुल उच्च घुलित पदार्थ’ (टीडीएस) की उच्च मौजूदगी से नदी का पानी काला पड़ गया. उन्होंने बताया कि हजारों मछलियां नदी में मृत मिलीं. बड़ी संख्या में मछलियों के मरने के पीछे की वजह टीडीसी की बड़ी मात्रा में मौजूदगी है, जिससे नदी के जीवों के लिए दृश्यता कम होती है और उन्हें सांस लेने में दिक्कत होने लगती है.

    नदी में टीडीएस का स्तर 6,800 मिलीग्राम प्रति लीटर था, जो सामान्य तौर पर 300-1,200 मिलीग्राम प्रति लीटर होता है. सेप्पा के लोगों ने इसके लिए चीन पर आरोप लगाया, उनका कहना है कि पड़ोसी देश की निर्माण गतिविधियों की वजह से नदी का रंग काला पड़ गया. इस पर चिंता व्यक्त करते हुए सेप्पा ईस्ट के विधायक तापुक टाकु ने कहा कि इससे पहले कामेंग नदी में कभी ऐसा नहीं हुआ था.

    इससे पहले 2017 में हुई थी ऐसी घटना
    रिपोर्ट के मुताबिक इससे पहले 2017 में सियांग नदी में ऐसा हुआ था और अरुणाचल ईस्ट के कांग्रेस सांसद निनोंग एरिंग ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर उनसे हस्तक्षेप करने की मांग की थी. उनका दावा था कि चीन में काफी लंबी सुरंग के निर्माण की वजह से ऐसा हुआ है क्योंकि इसने शिनजियांग प्रांत में सियांग के पानी को मोड़ दिया है. हालांकि, चीन ने इस आरोप से इनकार किया था.

    टीडीएस कम करने के क्या हैं उपाय
    आमतौर पर भूजल में डीटीएस की मात्रा काफी अधिक होती है. यह काफी हद तक जगह-जगह और भूजल की गहराई पर निर्भर करता है. कई इलाकों में पानी का एकदम स्वच्छ और काफी मीठा होता है. इसका मतलब है कि वहां पानी में टीडीएस की मात्रा कम है. शहरों में नगरपालिका द्वारा सप्लाई किए जाने वाले पानी और स्थिर पानी में टीडीएस की मात्रा कम होती है. इसके अलावा इन दिनों बाजार में तरह-तरह के आरओ वाटर प्यरिफायर उपलब्ध हैं जो पानी में डीटीएस की मात्रा को तीन से चार गुना तक कम कर देते हैं. यानी अगर किसी पानी टीडीएस की मात्रा 1200 पीएमपी है तो उसे आरओ सिस्टम आसानी से 150-200 के स्तर पर ला सकता है.

    Tags: Arunachal pradesh, China, Polluted water

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