ब्रिटेन में कायरों को अलग से देना होता था Tax, मिलती थी युद्ध में छूट

ब्रिटेन में जो लोग युद्ध में हिस्सा नहीं लेना चाहते थे, उन्हें एक खास तरह का टैक्स भरना पड़ता था- सांकेतिक फोटो

ब्रिटेन में जो लोग युद्ध में हिस्सा नहीं लेना चाहते थे, उन्हें एक खास तरह का टैक्स भरना पड़ता था- सांकेतिक फोटो

मध्यकालीन ब्रिटेन में जो लोग युद्ध में हिस्सा नहीं लेना चाहते थे, उन्हें एक खास तरह का टैक्स भरना पड़ता था. इसे बुजदिली का टैक्स (cowardice tax) कहते थे. अमीरों को इससे लड़ाई में विकलांग होने के डर से छुटकारा मिल जाता था.

  • News18Hindi
  • Last Updated: February 2, 2021, 1:11 AM IST
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दुनिया में एक से बढ़कर एक टैक्स की बात की जाती है लेकिन कोई भी टैक्स बुजदिली के टैक्स से अजीब नहीं. ये टैक्स ब्रिटेन में उन लोगों पर लगता था, जो सेना में भर्ती नहीं होना चाहते थे. बता दें कि मध्यकालीन समय में देशों के बीच विस्तारवादी रवैया हुआ करता था और कोई भी देश दूसरे देश पर हमला करके उसकी सीमाओं को अपना बना लेता था. उस दौर में हर युवा का सेना में जाना जरूरी हुआ करता था. लेकिन अमीर युवाओं ने इसका भी तोड़ खोज निकाला.

सेना से बचने का तरीका

वे शांतिकाल से लेकर युद्ध के दौरान भी सेना की ट्रेनिंग से बचे रहते थे. इससे उन्हें अपनी अय्याशियों के लिए भरपूर मौका मिल पाता था. साथ ही वे इस डर से भी बचे रहते थे कि लड़ाई में कहीं उन्हें कोई चोट न आ जाए. ये टैक्स किंग हैनरी 1 (1100–1135) से लेकर स्टीफन (1135–1154) के कार्यकाल के दौरान चलता रहा. वे जो टैक्स भरते थे, उससे दूसरे सैनिकों की भर्ती होती थी.

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तब इस टैक्स को स्कूटेज या शील्ड मनी भी कहा जाता था- सांकेतिक फोटो (pixabay)

शील्ड मनी भी कहते थे

तब इस टैक्स को स्कूटेज या शील्ड मनी भी कहा जाता था. यानी बचाव के लिए दी जाने वाली रकम. ये टैक्स शांति के दिनों में भी देना होता था, ताकि युवा अमीर की जगह किसी और को सेना में भर्ती कर उसे ट्रेनिंग दी जा सके. बहुत से अमीर पैसों की बजाए घोड़े या अस्त्र-शस्त्र भी दिया करते थे, जो सेना के काम आ सकें.

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दूसरे देशों में भी फैला

ब्रिटेन से शुरू हुआ ये चलन तेजी से फैला और 12वीं, 13वीं सदी में आसपास के देशों में भी बुजदिली पर टैक्स का चलन बढ़ निकला. फ्रांस और जर्मनी में भी इस टैक्स का इतिहास पता चलता है. जल्दी ही ऐसा हो गया कि अमीर लोग किसी भी युद्ध में जाने से इनकार करने लगे क्योंकि इसके बदले वे मनमांगे टैक्स भर पाते थे.

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राजस्व का जरिया बन गया

जल्द ही कर लेन-देन का ये तरीका राज्य के लिए रेवेन्यू का जरिया बन गया. हालांकि 14वीं सदी में इस टैक्स पर रोक लग गई. इसकी बजाए फिर अलग तरह के टैक्स लगाए जाने लगे ताकि राजस्व की प्राप्ति हो सके. अमीरों के लिए एक काफी दिलचस्प टैक्स है विंडो टैक्स यानी खिड़कियों के लिए दिया जाने वाला टैक्स. अठारहवीं सदी के मध्य में इंग्लैंड, फ्रांस, आयरलैंड और स्कॉटलैंड में विंडो टैक्स की शुरुआत हुई. ये एक तरह का प्रॉपर्टी टैक्स है जो इस आधार पर दिया जाता है कि आपके घर में कितनी ज्यादा खिड़कियां हैं. ये एक तरह से अमीरों पर लगा टैक्स था जो महलनुमा घरों में रहते थे. बाद में काफी विरोध के बाद इस टैक्स को हटाना पड़ा.

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ये टैक्स शांति के दिनों में भी देना होता था, ताकि सेना का काम चलता रहे- सांकेतिक फोटो (pxfuel)


इन देशों में अनिवार्य है सेना की ट्रेनिंग

वैसे कई सारे ऐसे देश हैं, जहां युवाओं के लिए सेना की ट्रेनिंग अनिवार्य है. इनमें सबसे पहले इजरायल का नाम आता है. यहां पुरुषों और महिलाओं, दोनों के ही लिए मिलिट्री सर्विस जरूरी है. इजरायल डिफेंस फोर्स में यहां पुरुषों को 3 और महिलाओं को 2 साल की सेवा देनी होती है. इसमें केवल मेडिकल ग्राउंड पर ही छूट मिलती है.

दक्षिण कोरिया सेना के मामले में काफी सख्त

साउथ कोरिया में भी आर्मी सर्विस की अनिवार्यता है. यहां शारीरिक और मानसिक तौर पर स्वस्थ सभी युवाओं को तय समय के लिए सेना के तीनों ही शाखाओं में सर्विस देनी होती है. रूस भी ऐसा ही एक देश है, जहां लगभग 1 साल तक मिलिट्री में सेवाएं देनी होती हैं. 18 से 27 साल की उम्र के युवाओं के लिए ये जरूरी है.

सीरिया भी इसी श्रेणाी में आता है

सीरिया में सभी पुरुषों के लिए सैन्य सेवा देना जरूरी है. ये अवधि 18 महीने की है. सैन्य सेवाओं को टालने वाले लोगों की नौकरी तक जा सकती है. यूरोपियन देश स्विट्जरलैंड में भी मिलिट्री सर्विस जरूरी है लेकिन ये अधिक से अधिक 8 महीने तक होती है. महिलाएं यहां वॉलंटियर सर्विस दे सकती हैं.
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