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कैसे काम करता है Exit Poll और कितना भरोसा किया जा सकता है?

कैसे काम करता है Exit Poll और कितना भरोसा किया जा सकता है?

चुनावों के बाद लगभग दो दशक से एग्जिट पोल काफी अहम माने जा रहे हैं- सांकेतिक फोटो (Photo-news18 creative)

चुनावों के बाद लगभग दो दशक से एग्जिट पोल काफी अहम माने जा रहे हैं- सांकेतिक फोटो (Photo-news18 creative)

Bihar Election Result 2020: कई बार एग्जिट पोल (exit poll) के अनुमान एकदम गलत साबित होते हैं तो कई बार ये सही बताते हैं. तो क्या ये महज अंदाजों पर आधारित होते हैं या फिर इसके पीछे कोई प्रक्रिया भी होती है?

    बिहार विधानसभा (Bihar Election Results) की सभी 243 सीटों पर वोटों की गिनती जारी है. अब तक एग्जिट पोल लगातार आरजेडी की चमत्कारिक जीत का अनुमान लगा रहे थे, हालांकि शुरुआती रुझानों में अलग ही तस्वीर बन रही है. एनडीए और आरजेडी दोनों आगे-पीछे झूल रहे हैं. ऐसे में फिलहाल बिहार का भावी सीएम कौन बनेगा, ये तो साफ नहीं लेकिन ये पक्का है कि एग्जिट पोल गलत दिख रहा है. इससे पहले भी कई चुनावों में नतीजे पोल के अनुमानों से अलग उल्टे जा चुके हैं.

    चुनावों के बाद लगभग दो दशक से एग्जिट पोल काफी अहम माने जा रहे हैं. इसमें वोटरों का मन भांपने की कोशिश होती है. वोटिंग की प्रोसेस खत्म होते ही अनुमान बताए जाने की ये कोशिश शुरू हो जाती है. इसमें ये समझने की कोशिश होती है कि हवा किस तरफ बही होगी. सर्वे एजेंसियां कई न्यूज चैनलों के साथ मिलकर इस काम को अंजाम देती हैं.

    एग्जिट पोल के तहत में वोटरों का मन भांपने की कोशिश होती है- सांकेतिक फोटो (Photo-cnbc)


    तो एग्जिट पोल का क्या तरीका है?
    एक तरीका तो ये है कि वोट देने के बाद पोलिंग बूथ से बाहर निकले वोटर से बातचीत होती है. कई बार वोटर गोलमोल जवाब देते हैं तो कई बार बता भी देते हैं कि वे किसके साथ हैं. एक बड़ा सैंपल साइज लेकर उनसे सवाल-जवाब होता है और इसके आधार पर समझने की कोशिश की जाती है कि नतीजे किसके पक्ष में आ सकते हैं. ये काफी लंबी और थकाने वाली प्रक्रिया है लेकिन बहुत बार इसके नतीजे इतने सही निकले कि इसी के आधार पर पार्टी दफ्तर ने तय किया कि अपने यहां लड्डू बनवाए जाएं या दफ्तर को सूना छोड़ दिया जाए.

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    बिहार में पिछले विधानसभा चुनावों को लेकर एग्जिट पोल के नतीजे पछाड़ मारकर गिरे थे. तब पोल ने अनुमान लगाया था कि एनडीए सबसे बड़ा गठबंधन होगा. हालांकि नतीजे एकदम उलट आए थे. पिछले चुनावों में 4 और 9 सीटों पर अटके कांग्रेस ने बढ़त ली थी और यूपीए सबसे बड़ा गठबंधन हुआ था.

    बिहार में पिछले विधानसभा चुनावों को लेकर एग्जिट पोल के नतीजे पछाड़ मारकर गिरे थे


    अब बात करते हैं आम चुनावों की. तो साल 2004 में हुए चुनावों में एग्जिट पोल का शुरुआती दौर ही था. तब एनडीए की जीत का एलान ही कर दिया गया था. बता दें कि तब अटल बिहार वाजपेयी भाजपा लीडर थे. हालांकि नतीजों ने अनुमान को गलत साबित कर दिया. कांग्रेस को 222 सीटें मिलीं, जबकि एनडीए कुल मिलाकर 189 पर सिमट गया था.



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    हालांकि आम लोगों के बीच एग्जिट पोल काफी अहम माना जाता है और यहां तक कि पार्टियां भी इसपर कुछ हद तक भरोसा कर पाती हैं. इसके बाद भी पोल के नतीजे कई बार एकदम से सही या गलत हो जाते हैं. इसकी कई वजहें हो सकती हैं. जैसे पोलिंग बूथ से बाहर निकलते वोटरों से बात करने में कई उलझनें होती हैं. हो सकता है कि ज्यादातर वोटर बात न करना चाहे या फिर खुद सर्वेकर्ता किसी खास तबके या वर्ग तक सिमट जाएं. ऐसे में अगर सर्वे साइज 10 हजार है तो ये गिनती तो पूरी होगी लेकिन सारे वर्गों का प्रतिनिधित्व नहीं दिखेगा. ये बात एग्जिट पोल में भी दिखेगी, और नतीजे कुछ और आ जाएंगे.

    Tags: Bihar assembly election 2020, JDU nitish kumar, RJD leader Tejaswi Yadav

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